Friday, June 26, 2026
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‘देशभक्ति और सांस्कृतिक भावना को किया जागृत’, पीएम मोदी ने बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की जयंती पर दी श्रद्धांजलि

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नई दिल्ली, 26 जून (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम के रचयिता बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। पीएम मोदी ने उन्हें एक ऐसे महान साहित्यिक व्यक्तित्व के रूप में याद किया, जिनकी रचनाओं ने भारतीयों की कई पीढ़ियों में देशभक्ति और सांस्कृतिक गौरव की भावना को प्रज्वलित किया।

पीएम मोदी ने उल्लेख किया वंदे मातरम के माध्यम से बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन और राष्ट्र को प्रेरणा के सबसे चिरस्थायी स्रोतों में से एक प्रदान किया।

प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट किया, ”बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि। एक महान साहित्यकार के रूप में, उनकी रचनाओं ने पीढ़ियों से भारतीयों में देशभक्ति और सांस्कृतिक गौरव की भावना को जागृत किया है। उनका समृद्ध साहित्यिक कार्य आज भी हमारी चेतना को प्रकाशित करता है और राष्ट्र निर्माण के प्रति हमारे सामूहिक संकल्प को मजबूत करता है।”

उन्होंने आगे लिखा कि यह वह समय है जब हम वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ मना रहे हैं। वंदे मातरम के माध्यम से उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन और हमारे राष्ट्र को सबसे स्थायी प्रेरणाओं में से एक का उपहार दिया।

इसके अलावा पीएम मोदी ने राजर्षि छत्रपति शाहूजी महाराज की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि वे सामाजिक न्याय और समानता के प्रबल समर्थक थे। उन्होंने वंचित, शोषित एवं पिछड़े वर्गों के उत्थान के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया। उनके महान कार्य और आदर्श युगों-युगों तक राष्ट्र का मार्गदर्शन करते रहेंगे।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने एक्स पोस्ट में लिखा, ”महान साहित्यकार एवं सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के प्रणेता बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय जी की जयंती पर उनका स्मरण कर उन्हें नमन करता हूं। बंकिमचंद्र जी ने अपनी अमर कृति ‘आनंदमठ’ के माध्यम से मातृभूमि के प्रति समर्पण, त्याग व राष्ट्रीय चेतना का संदेश दिया। ‘वंदे मातरम’ की रचना कर उन्होंने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम को नई ऊर्जा, प्रेरणा व वैचारिक आधार प्रदान किया। आज ‘वंदे मातरम’ 150 वर्ष पूर्ण होने पर अपने आदि स्वरूप में संपूर्ण देश में राष्ट्रीय एकता और आत्मगौरव का संदेश दे रहा है।”