Friday, June 26, 2026
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केरल में शराब नीति पर सियासत तेज, माकपा ने किया पुरानी नीति का बचाव

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तिरुवनंतपुरम, 26 जून (आईएएनएस)। केरल में कम अल्कोहल वाले पेयों (लो-अल्कोहल बेवरेज) पर टैक्स कम करने के प्रस्ताव को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। शुक्रवार को माकपा ने अपनी पूर्ववर्ती सरकार की शराब नीति का बचाव किया, जबकि धार्मिक नेताओं ने इस मुद्दे पर सावधानी बरतने और व्यापक चर्चा के बाद ही फैसला लेने की सलाह दी।

माकपा के राज्य सचिव एम.वी. गोविंदन ने नई दिल्ली में मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) सरकार की नीति का उद्देश्य कभी भी बहुराष्ट्रीय शराब कंपनियों को बढ़ावा देना नहीं था। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार कृषि उत्पादों से मूल्यवर्धित (वैल्यू एडेड) उत्पाद तैयार कर किसानों की आय बढ़ाना चाहती थी।

गोविंदन ने बताया कि जब वह आबकारी मंत्री थे, तब काजू, सेब और अन्य कृषि उत्पादों से कम अल्कोहल वाले पेय बनाने की अवधारणा नीति का हिस्सा बनाई गई थी। इस नीति पर विस्तृत चर्चा के बाद ही इसे तैयार किया गया था।

उन्होंने कहा कि नीति बनने के बाद ही बैकार्डी जैसी शराब कंपनियां वितरण अधिकार लेने के लिए सरकार के पास आई थीं। उनका दावा है कि सरकार का फोकस स्थानीय कृषि उत्पादों से बने पेयों के उत्पादन को बढ़ावा देना था, न कि बहुराष्ट्रीय कंपनियों के ब्रांडेड उत्पादों की बिक्री को।

गोविंदन ने आरोप लगाया कि विपक्ष जानबूझकर उत्पादन नीति और कर नीति को एक-दूसरे से जोड़कर भ्रम फैला रहा है। उन्होंने कहा कि पिछली सरकार की नीति कृषि आधारित उत्पादन से संबंधित थी, जबकि मौजूदा विवाद कम अल्कोहल वाले पेयों पर टैक्स संरचना में बदलाव के प्रस्ताव को लेकर है।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जनवरी 2022 में जब यह मामला विधानसभा की विषय समिति (सब्जेक्ट कमेटी) के पास भेजा गया, तब वह आबकारी मंत्री नहीं थे और उनके कार्यकाल में इस फाइल पर कोई कार्रवाई नहीं हुई थी।

मौजूदा सरकार पर निशाना साधते हुए गोविंदन ने कहा कि नई सरकार के गठन के महज तीन दिनों के भीतर इस फाइल का मुख्यमंत्री के पास पहुंचना असामान्य है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि गठबंधन सहयोगियों और विपक्ष से चर्चा किए बिना इस प्रस्ताव को बजट में शामिल किया गया।

इस विवाद पर धार्मिक नेताओं की भी प्रतिक्रिया सामने आई है। समस्ता (ईके गुट) के अध्यक्ष सैयद जिफरी मुत्तुकोया थंगल ने कहा कि इस्लाम में हर प्रकार की शराब प्रतिबंधित है, हालांकि उन्होंने यह भी माना कि शराब नीति बनाना निर्वाचित सरकार का अधिकार है और सरकार से मुस्लिम धार्मिक सिद्धांतों के आधार पर नीति बनाने की अपेक्षा नहीं की जा सकती।

वहीं, थालास्सेरी के आर्चबिशप मार जोसेफ पाम्पलानी ने मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन द्वारा इस मुद्दे पर व्यापक चर्चा कराने के फैसले का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि शराब संबंधी कोई भी नीति ऐसी नहीं होनी चाहिए जिससे नशे को बढ़ावा मिलने का संदेश जाए। उन्होंने सामाजिक जिम्मेदारी और सावधानी बरतने की आवश्यकता पर जोर दिया।

सरकार द्वारा गठबंधन सहयोगियों से विचार-विमर्श के बाद अंतिम फैसला लिए जाने की संभावना के बीच, केरल की नई शराब नीति को लेकर राजनीतिक बहस आने वाले दिनों में और तेज होने के आसार हैं।