नई दिल्ली, 27 जून (आईएएनएस)। महाराष्ट्र में शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) के कथित पेपर लीक को लेकर बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस और एआईएमआईएम नेताओं ने इस मुद्दे पर राज्य और केंद्र सरकार को निशाने पर लिया। नेताओं ने इसे छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ बताया है। दूसरी तरफ, भाजपा ने दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का भरोसा दिलाया।
कांग्रेस नेता हुसैन दलवई ने कहा कि भ्रष्टाचार की जड़ें ऊपर से नीचे तक फैली हुई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह की घटनाएं किसी एक स्तर की समस्या नहीं हैं, बल्कि व्यवस्था में व्याप्त भ्रष्टाचार का परिणाम हैं। गलत काम करने वालों में किसी प्रकार का डर नहीं रह गया है। रिश्वतखोरी और भ्रष्टाचार लगातार बढ़ रहा है, जिसके कारण लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता भी प्रभावित हो रही है। जब भ्रष्टाचार के जरिए सांसदों और विधायकों तक को प्रभावित करने की बातें सामने आती हैं, तो आम मतदाताओं और छात्रों के हितों की अनदेखी होना स्वाभाविक है। इस स्थिति के लिए सरकार जिम्मेदार है। सरकार की नीतियां कहीं न कहीं ऐसे माहौल को बढ़ावा दे रही हैं।
एआईएमआईएम नेता वारिस पठान ने भी सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि सरकार अपनी मूल प्राथमिकताओं से पूरी तरह भटक चुकी है और छात्रों के भविष्य की सुरक्षा करने में विफल साबित हुई है। पहले नीट परीक्षा और अब टीईटी परीक्षा में पेपर लीक की घटनाएं सामने आई हैं। इससे लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित हुआ है। लगातार होने वाले पेपर लीक से छात्रों और उनके परिवारों की मेहनत पर पानी फिर रहा है।
वारिस पठान ने कहा कि छात्र वर्षों तक कठिन परिश्रम करते हैं और उनके परिवार भी उनकी तैयारी में हर संभव सहयोग करते हैं, लेकिन परीक्षा से पहले पेपर लीक होने की घटनाएं उनकी उम्मीदों को तोड़ देती हैं। सरकार छात्रों के हितों की रक्षा करने के बजाय सरकार अन्य मुद्दों में व्यस्त है। पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोकने के लिए प्रभावी और सख्त तंत्र विकसित करने की आवश्यकता है। इस मामले में जवाबदेही तय की जाए और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
वहीं, दिल्ली में भाजपा के राज्यसभा सांसद गुलाम अली खटाना ने कहा कि पेपर लीक मामले में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

