वाशिंगटन, 28 जून (आईएएनएस)। भारत और अमेरिका के बीच सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), क्वांटम टेक्नोलॉजी और क्रिटिकल मिनरल्स जैसे भविष्य की तकनीकों में साझेदारी लगातार मजबूत होती जा रही है। दोनों देशों के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि अब यह रणनीतिक सहयोग केवल नीतियों तक सीमित नहीं है, बल्कि वास्तविक परियोजनाओं और भरोसेमंद तकनीकी सप्लाई चेन के निर्माण की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
इसी सप्ताह वाशिंगटन में आयोजित एक उच्चस्तरीय राउंडटेबल बैठक में भारत के अमेरिका स्थित राजदूत विनय क्वात्रा ने कहा कि भारत और अमेरिका एक-दूसरे के पूरक हैं, जिससे उभरती तकनीकों के क्षेत्र में सहयोग की अपार संभावनाएं हैं।
उन्होंने कहा, “अमेरिका और भारत के सामने चिप्स से लेकर न्यूरल नेटवर्क तक साथ मिलकर काम करने का बड़ा अवसर है। सेमीकंडक्टर, एआई और क्वांटम टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में भारत का मिशन आधारित दृष्टिकोण और अमेरिका का मजबूत इनोवेशन इकोसिस्टम मिलकर शानदार सहयोग का रास्ता तैयार करते हैं।”
विनय क्वात्रा ने कहा कि दोनों देश मिलकर भरोसेमंद और मजबूत तकनीकी इकोसिस्टम तैयार कर सकते हैं। साथ ही उन महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर तक सुरक्षित पहुंच सुनिश्चित कर सकते हैं, जो भविष्य की इन उभरती तकनीकों को शक्ति प्रदान करेंगे।
इस राउंडटेबल में राजनयिकों, नीति निर्माताओं और उद्योग जगत के प्रमुख प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। चर्चा का मुख्य फोकस सेमीकंडक्टर, एआई, क्वांटम टेक्नोलॉजी और क्रिटिकल मिनरल्स के क्षेत्र में मजबूत सप्लाई चेन तैयार करने, एआई इनोवेशन को तेज करने और वैश्विक आर्थिक मजबूती बढ़ाने पर रहा।
इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव एस. कृष्णन ने कहा कि भारत तेजी से वैश्विक तकनीकी सप्लाई चेन का एक भरोसेमंद साझेदार बनकर उभर रहा है।
उन्होंने कहा, “भारत खुद को एक विश्वसनीय और मजबूत तकनीकी साझेदार के रूप में स्थापित कर रहा है। देश का इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम तेजी से बढ़ा है और अब सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन भी हकीकत बनता जा रहा है। हमारी सेमीकंडक्टर मिशन की अगली चरण की योजना इसी गति को आगे बढ़ाएगी।”
एस. कृष्णन ने कहा कि भारत की प्रतिभा, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और एआई क्षमताओं के साथ मिलकर ऐसे समाधान विकसित किए जा सकते हैं, जो केवल भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया के लिए उपयोगी साबित होंगे।
विदेश मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव (अमेरिका) के. नागराज नायडू ने कहा कि भारत-अमेरिका संबंध अब 21वीं सदी की जरूरतों के अनुरूप एक व्यापक रणनीतिक साझेदारी का रूप ले चुके हैं।
उन्होंने कहा, “एआई, क्वांटम टेक्नोलॉजी, क्रिटिकल मिनरल्स, एडवांस्ड एनर्जी और भरोसेमंद सप्लाई चेन जैसी पहलों के जरिए अब हम सिद्धांतों से आगे बढ़कर वास्तविक परियोजनाओं की दिशा में काम कर रहे हैं। इन योजनाओं को जमीन पर उतारने में निजी क्षेत्र की भूमिका सबसे अहम होगी।”
यूएस-इंडिया स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप फोरम (यूएसआईएसपीएफ) के अध्यक्ष और सीईओ मुकेश अघी ने कहा कि आने वाले समय में माइक्रोचिप्स और क्रिटिकल मिनरल्स वैश्विक अर्थव्यवस्था की दिशा तय करेंगे।
उन्होंने कहा, “अमेरिका और भारत 21वीं सदी की सबसे भरोसेमंद तकनीकी साझेदारी बनाने की मजबूत स्थिति में हैं। सेमीकंडक्टर, एआई, क्रिटिकल मिनरल्स और क्वांटम टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में सरकारें सहयोग का ढांचा तैयार कर सकती हैं, लेकिन असली क्रियान्वयन, नवाचार और निवेश की जिम्मेदारी उद्योग जगत निभाएगा।”
इस राउंडटेबल का आयोजन यूएस-इंडिया स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप फोरम (यूएसआईएसपीएफ) ने वाशिंगटन स्थित भारतीय दूतावास और सिल्वराडो पॉलिसी एक्सेलेरेटर के सहयोग से किया। कार्यक्रम में अमेरिकी वाणिज्य विभाग के डिप्टी अंडर सेक्रेटरी फॉर इनोवेशन एंड एंगेजमेंट बिल गुइडेरा और अमेरिकी ऊर्जा विभाग के ऑफिस ऑफ क्रिटिकल मिनरल्स, मैटेरियल्स एंड मैन्युफैक्चरिंग के डिप्टी असिस्टेंट सेक्रेटरी क्रिस्टोफर साल्डाना भी शामिल हुए।

