कोलकाता, 28 जून (आईएएनएस)। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के विधायक कुणाल घोष ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में चल रही अंदरूनी खींचतान के लिए भाजपा को जिम्मेदार बताया हैं। उन्होंने दावा किया कि ममता बनर्जी के प्रति वफादार नेताओं और विधायकों को पुराने मामलों और अन्य आरोपों के जरिए निशाना बनाया जा रहा है, जबकि दूसरे खेमे के नेताओं के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है।
कोलकाता में मीडिया से बातचीत के दौरान कुणाल घोष ने कहा कि पार्टी के भीतर जो विवाद सामने आ रहे हैं, वे पूरी तरह आंतरिक मामले हैं। जिन लोगों की ओर से आरोप लगाए जा रहे हैं और जिन समितियों या संगठनों की आलोचना की जा रही है, उनमें शामिल कई लोग स्वयं उन्हीं संस्थाओं के पदाधिकारी हैं। ऐसे में यह पूरा विवाद विरोधाभासी और भ्रम की स्थिति पैदा करने वाला है।
इस दौरान कुणाल घोष ने रितब्रता से जुड़े कथित विवादों का भी जिक्र किया। हालांकि, उन्होंने इस मामले में लगाए गए आरोपों को लेकर कोई ठोस टिप्पणी नहीं की, लेकिन कहा कि इन मुद्दों को लेकर राजनीतिक माहौल बनाया जा रहा है।
कुणाल घोष ने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी के साथ मजबूती से खड़े नेताओं को गिरफ्तार कर उन पर दबाव बनाया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि पार्टी की उस धारा को निशाना बनाया जा रहा है, जिसे ममता बनर्जी ने स्वयं खड़ा किया था। उनके अनुसार, दूसरी ओर मौजूद नेताओं के खिलाफ किसी तरह की कार्रवाई नहीं हो रही है, जिससे राजनीतिक पक्षपात की आशंका पैदा होती है।
तारातला बिल्डिंग हादसे का मुद्दा उठाते हुए कुणाल घोष ने विधानसभा में दिए गए मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के बयान पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि यदि संबंधित इमारत के स्वीकृत नक्शे पर पूर्व मेयर और वरिष्ठ टीएमसी नेता फिरहाद हकीम के हस्ताक्षर मौजूद हैं, तो उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है? यदि दस्तावेजों के आधार पर जिम्मेदारी तय की जा रही है, तो सभी संबंधित लोगों पर समान रूप से कार्रवाई होनी चाहिए।
टीएमसी विधायक ने आरोप लगाया कि मौजूदा घटनाक्रम से यह संदेश जा रहा है कि केवल ममता बनर्जी के करीबी नेताओं को ही चुन-चुनकर निशाना बनाया जा रहा है।

