Monday, June 29, 2026
SGSU Advertisement
Home मनोरंजन बेटी की परवरिश में कभी समाज की नहीं सुनी, दिल से लिए...

बेटी की परवरिश में कभी समाज की नहीं सुनी, दिल से लिए हर फैसले : कुणाल खेमू

0
5

मुंबई, 29 जून (आईएएनएस)। फिल्म अभिनेता कुणाल खेमू और उनकी पत्नी, अभिनेत्री सोहा अली खान, दोनों अक्सर अपनी बेटी इनाया नौमी खेमू के साथ बिताए गए खास पलों की झलक सोशल मीडिया पर साझा करते रहते हैं। आईएएनएस से बातचीत में कुणाल ने बच्चे की परवरिश को लेकर कहा कि यह किसी समाज के हिसाब से नहीं, बल्कि माता-पिता की समझ के आधार पर होनी चाहिए।

आईएएनएस से खास बातचीत में कुणाल खेमू ने कहा, “मैंने और सोहा ने बेटी की परवरिश को लेकर कभी भी समाज के दबाव को महत्व नहीं दिया। दोनों ने हमेशा अपने दिल की बात सुनी और वही फैसले लिए, जो बेटी के लिए सही लगे।”

कुणाल ने कहा, ”हम हमेशा स्वाभाविक तरीके से आगे बढ़े हैं। मेरी किस्मत अच्छी है कि मुझे ऐसी दोस्त, जीवनसाथी और पत्नी मिली है, जो मुझे अच्छे से समझती है और भरोसा करती है। जहां तक बेटी की परवरिश की बात है, अब हमें भी कुछ सालों का अनुभव हो गया है। इस साल इनाया नौ साल की हो जाएगी। इन सालों में हमने हर फैसला अपने मन और समझ के अनुसार लिया। हमने कभी यह नहीं सोचा कि लोग क्या कहेंगे या समाज इसे कैसे देखेगा।”

उन्होंने आगे कहा, ”हमें बच्चों की परवरिश के तरीके को लेकर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं मिलीं। कुछ लोगों ने हमारी सोच की तारीफ की, जबकि कुछ लोगों ने आलोचना भी की। लेकिन हमने कभी इस बात को अपने फैसलों पर हावी नहीं होने दिया।”

कुणाल ने बताया कि हमने कभी भी समाज की नजरों में ‘आदर्श माता-पिता’ दिखने की कोशिश नहीं की। हमने हमेशा वही किया जो हमें अपनी बेटी के लिए सही लगा। सोहा एक मां के तौर पर जो सही समझती हैं, वह करती हैं, और मैं एक पिता के रूप में जो उचित समझता हूं, वही करता हूं।

उन्होंने कहा, ”हर परिवार की तरह हमारे बीच भी कई बार छोटे-छोटे मतभेद हो जाते हैं। लेकिन इन मतभेदों का असर कभी रिश्ते या बेटी की परवरिश पर नहीं पड़ता। दोनों एक-दूसरे की राय का सम्मान करते हैं और मिलकर सही रास्ता निकालते हैं। माता-पिता होने का मतलब यह नहीं कि दोनों हर बात पर हमेशा एक जैसी सोच रखें।”

उन्होंने आगे कहा, ”कई बार मुझे लगता है कि किसी चीज की जरूरत नहीं है, लेकिन अगर सोहा को लगता है कि वह जरूरी है तो एक मां होने के नाते उन्हें पूरा अधिकार है। उसी तरह कई बार वह मुझसे कहती हैं कि मैं बेटी की कुछ आदतें बिगाड़ रहा हूं। जैसे वह कहती हैं कि अभी उसे आइसक्रीम मत खिलाओ, लेकिन अगर मुझे लगता है कि सही समय है तो मैं उसे आइसक्रीम खिला देता हूं। ऐसी छोटी-छोटी बातें हर घर में होती हैं और हमारे यहां भी होती हैं।”