Monday, June 29, 2026
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ग्राम सभाओं की सहभागिता को मजबूत करने को लेकर नीति आयोग जारी करने जा रहा अहम रिपोर्ट

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नई दिल्ली, 29 जून (आईएएनएस)। एक आधिकारिक बयान में सोमवार को कहा गया कि देश भर में ग्राम सभाओं में लोगों की भागीदारी का अध्ययन करने वाली एक राष्ट्रीय रिपोर्ट में पाया गया है कि ग्राम सभाओं में नागरिकों की उपस्थिति अभी भी कम है। साथ ही इसमें उन प्रमुख कारणों की पहचान की गई है, जिनकी वजह से लोगों की भागीदारी प्रभावित होती है। बयान के अनुसार, यह रिपोर्ट 30 जून को जारी की जाएगी।

पंचायती राज मंत्रालय ने बयान में कहा है कि ‘राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में ग्राम सभाओं में कम भागीदारी’ विषय पर तैयार राष्ट्रीय अध्ययन रिपोर्ट को नीति आयोग के सदस्य डॉ. आर. बालासुब्रमण्यम द्वारा राष्ट्रीय राजधानी में जारी किया जाएगा।

यह रिपोर्ट राष्ट्रीय ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज संस्थान (एनआईआरडीपीआर) ने पंचायती राज मंत्रालय के लिए तैयार की है। इसके लिए 26 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की करीब 400 ग्राम पंचायतों में व्यापक सर्वेक्षण किया गया। अध्ययन के दौरान करीब 7,790 लोगों से बातचीत की गई, जिनमें पेसा (पीईएसए) क्षेत्रों और महिला नेतृत्व वाली ग्राम पंचायतों को भी शामिल किया गया।

रिपोर्ट में यह समझने की कोशिश की गई है कि ग्राम सभाओं में लोगों की भागीदारी किन-किन पहलुओं से प्रभावित होती है। इसमें लोगों की जागरूकता, सूचना पहुंचाने की व्यवस्था, सभी वर्गों की भागीदारी, संस्थागत जवाबदेही, प्रशासनिक कार्यप्रणाली, उपलब्ध बुनियादी सुविधाएं और नागरिकों की सोच जैसे कई पहलुओं का विस्तृत अध्ययन किया गया है। इसका उद्देश्य जमीनी स्तर पर लोकतांत्रिक भागीदारी को मजबूत करने के लिए व्यावहारिक उपाय सुझाना है।

रिपोर्ट में ऐसे सुझाव भी दिए गए हैं, जो नीति निर्माण, संस्थागत सुधार और ग्राम सभाओं में नागरिकों की भागीदारी बढ़ाने में उपयोगी साबित हो सकते हैं।

बयान के अनुसार, संविधान के अनुच्छेद 243ए के तहत ग्राम सभा को स्थानीय स्तर पर सहभागी लोकतंत्र की सबसे महत्वपूर्ण इकाई माना गया है।

यह राष्ट्रीय अध्ययन रिपोर्ट उन कारणों की पहचान करने का प्रयास करती है, जिनकी वजह से लोग ग्राम सभाओं में कम शामिल होते हैं। साथ ही इसमें ऐसे उपाय सुझाए गए हैं, जिनसे ग्राम सभाओं को अधिक सक्रिय, समावेशी और जवाबदेह बनाया जा सके तथा देश भर में पंचायती राज संस्थाओं को और मजबूत किया जा सके।

भारत की ग्राम पंचायतों ने अब तक ई-ग्रामस्वराज प्लेटफॉर्म के माध्यम से 3 लाख करोड़ रुपए से अधिक के भुगतान किए हैं। वहीं, एआई-संचालित ‘सभासार’ मीटिंग टूल अब 23 भारतीय भाषाओं में उपलब्ध है।

ई-ग्रामस्वराज के माध्यम से भुगतान सीधे विक्रेताओं और सेवा प्रदाताओं के खातों में रियल टाइम में किए जाते हैं, जिससे प्रत्येक ट्रांजैक्शन का पूरा डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित रहता है।

इसके अलावा, यह प्लेटफॉर्म पब्लिक फाइनेंशियल मैनेजमेंट सिस्टम (पीएफएमएस) से भी जुड़ा हुआ है, जिससे ग्राम पंचायतों में योजना निर्माण, लेखांकन और खर्च की प्रक्रिया अधिक सरल और पारदर्शी हो गई है।

इस डिजिटल व्यवस्था ने नकद और कागजी प्रक्रिया की जगह तेज, जवाबदेह और धोखाधड़ी की संभावना को कम करने वाली प्रणाली विकसित की है।