नई दिल्ली, 29 जून (आईएएनएस)। नई दिल्ली के पूसा परिसर में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय ग्रामीण विकास सम्मेलन ‘ग्रामोदय से राष्ट्रोदय’ के दूसरे दिन केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण व ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने देशभर से आए 29 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के ग्रामीण विकास मंत्रियों के साथ व्यापक मंथन किया।
सम्मेलन में न सिर्फ योजनाओं की समीक्षा हुई, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और मार्गदर्शन में ‘विकसित ग्राम-विकसित भारत’ के विजन को जमीन पर उतारने के लिए ठोस रणनीतियां भी सामने आईं। इस अवसर पर शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि गांव केवल धूल-मिट्टी या चौपाल का नाम नहीं, बल्कि भारत की शक्ति, भारत की चेतना और भारत की आत्मा हैं। उन्होंने कहा कि अगर हमें समृद्ध और विकसित भारत बनाना है तो गांव को समृद्ध और विकसित बनाए बिना काम नहीं चलेगा। गांव की प्रगति के बिना देश की प्रगति संभव नहीं है।
पहली बार एक मंच पर देश के 29 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के ग्रामीण विकास मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी और नीति-निर्माता एक साथ जुटे। उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और छत्तीसगढ़ के उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा सहित राज्यों के ग्रामीण विकास मंत्रियों और अन्य वरिष्ठ प्रतिनिधियों ने भाग लिया। यह सहकारी संघवाद का जीवंत उदाहरण रहा, जहां राजनीतिक भिन्नताओं से ऊपर उठकर विकास पर फोकस किया गया।
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने स्पष्ट कहा कि विकसित भारत का सपना तभी साकार होगा, जब गांव आत्मनिर्भर, रोजगारयुक्त और बुनियादी सुविधाओं से संपन्न बनेंगे। उन्होंने गांव को ‘भारत की आत्मा, शक्ति और चेतना’ बताते हुए कहा कि ग्रामीण विकास ही राष्ट्रीय विकास की धुरी है।
शिवराज सिंह चौहान ने घोषणा की कि 1 जुलाई से ‘विकसित भारत- जी राम जी’ योजना देशभर में लागू होगी जो मनरेगा की जगह लेगी। इसके लिए 95,682 करोड़ रुपए की अंतरिम स्वीकृति दी जा चुकी है। उन्होंने राज्यों से अपील की कि वे समय पर अपनी औपचारिकताएं पूरी करें ताकि योजना का सुचारू क्रियान्वयन सुनिश्चित हो सके।
सम्मेलन में ‘लखपति दीदी डैशबोर्ड’ लॉन्च किया गया और स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं के लिए एक डिजिटल प्लेटफॉर्म का शुभारंभ करते हुए शिवराज सिंह ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से 3 करोड़ से बढ़ाकर 6 करोड़ महिलाओं को लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य रखा गया है, जिसके लिए अगले 5 वर्षों में 10 लाख करोड़ रुपए का बैंक लिंकिंग रोडमैप तैयार किया गया है।
शिवराज सिंह ने योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए कई अहम बिंदु रखे। उन्होंने कहा कि राज्यों को समय पर अपना वित्तीय हिस्सा जारी करना होगा। ग्रामीण विकास से जुड़े खाली पदों को शीघ्र भरना जरूरी है। उन्होंने कहा कि अधिकारियों के बार-बार ट्रांसफर से काम प्रभावित होता है, जिम्मेदार पदों पर अधिकारियों को कम से कम दो‑तीन वर्ष एक ही स्थान पर रखा जाए, योजनाओं के प्रचार-प्रसार और जनजागरूकता पर विशेष ध्यान व सोशल ऑडिट और एआई आधारित मॉनिटरिंग को मजबूत करने की जरूरत है।
प्रधानमंत्री आवास योजना, ग्रामीण सड़क योजना और दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल योजना की प्रगति की समीक्षा करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कई राज्यों ने उत्कृष्ट कार्य किया है जबकि कुछ को सुधार की जरूरत है। उन्होंने भूमिहीन लाभार्थियों को जमीन उपलब्ध कराने और लंबित आवासों के शीघ्र समाधान पर विशेष जोर दिया।
झारखंड, बिहार, महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश आदि राज्यों के सफल मॉडल जैसे मल्टी‑चैनल मार्केटिंग, सामुदायिक उद्यम और हाउसहोल्ड आजीविका ऋण योजनाओं का जिक्र करते हुए, उन्होंने कहा कि इन बेस्ट प्रैक्टिस को सभी राज्यों के साथ साझा किया जाएगा ताकि अच्छा काम पूरे देश में दोहराया जा सके। उन्होंने खुले मन से स्वीकार किया कि कई योजनाओं और प्रक्रियाओं में अभी भी सुधार की गुंजाइश है और भरोसा दिलाया कि यदि राज्यों को किसी नियम या प्रक्रिया में व्यावहारिक दिक्कत है तो ग्रामीण विकास मंत्रालय कैबिनेट और वित्त मंत्रालय के साथ मिलकर उचित संशोधन की दिशा में काम करेगा।
केंद्रीय मंत्री ने संभावित कम बारिश को देखते हुए 14 राज्यों को जागरूक रहने की अपील की। उन्होंने जल संरक्षण संरचनाओं को मजबूत करने और ग्रामीण क्षेत्रों में अतिरिक्त रोजगार की तैयारी रखने के निर्देश दिए ताकि किसी भी स्थिति से प्रभावी तरीके से निपटा जा सके। शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि यह समय प्रतिस्पर्धा का नहीं, बल्कि सहभागिता का है। केंद्र नीति बनाए, राज्य उसे लागू करें, पंचायत नेतृत्व करे और जनता सहभागी बने- इसी मॉडल से ग्रामीण भारत की तस्वीर और तकदीर बदली जा सकती है।
सम्मेलन में ‘वीबी-जीरामजी’ से जुड़े लोगो डिजाइन, क्विज और डिजिटल कंटेंट प्रतियोगिताओं के विजेताओं को शिवराज सिंह चौहान की ओर से सम्मानित किया गया। साथ ही पुस्तकों का विमोचन भी हुआ जो ग्रामीण विकास के नए विचारों और मॉडलों को आगे बढ़ाने का संकेत है।

