मुंबई, 29 जून (आईएएनएस)। समाजवादी पार्टी के विधायक रईस शेख (भिवंडी ईस्ट) ने महाराष्ट्र की उपमुख्यमंत्री और अल्पसंख्यक विकास मंत्री सुनेत्रा पवार को पत्र लिखकर मुस्लिम समुदाय के लंबे समय से लंबित सामाजिक-आर्थिक सर्वेक्षण के लिए एक अध्ययन समूह (स्टडी ग्रुप) बनाने की मांग की है। उन्होंने सुझाव दिया है कि इस अध्ययन समूह का नाम दिवंगत अजित पवार के नाम पर रखा जाए।
रईस शेख ने अपने पत्र में कहा कि 2013 में महाराष्ट्र सरकार द्वारा गठित डॉ. मेहबूब-उर-रहमान स्टडी ग्रुप ने मुस्लिम समुदाय का सामाजिक और शैक्षणिक सर्वे कराने की सिफारिश की थी। उन्होंने बताया कि 2022 में राज्य सरकार ने इस सर्वेक्षण का जिम्मा टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज को सौंपा था और 21 सितंबर 2022 को इसके लिए शासन निर्णय भी जारी किया गया था, लेकिन सरकार बदलने के बाद यह सर्वे आगे नहीं बढ़ पाया।
विधायक ने कहा कि मुस्लिम समुदाय की आर्थिक स्थिति, सरकारी योजनाओं का लाभ, शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे तक पहुंच का व्यापक अध्ययन बेहद जरूरी है। इससे समुदाय की वास्तविक स्थिति का आकलन होगा और सरकार को क्षेत्र-विशेष नीतियां बनाने में मदद मिलेगी।
उन्होंने यह भी कहा कि 2006 में सच्चर समिति की रिपोर्ट के बाद से मुस्लिम समुदाय के सामाजिक-आर्थिक और शैक्षणिक हालात पर कोई व्यापक डेटा उपलब्ध नहीं है।
रईस शेख ने मांग की कि प्रस्तावित अध्ययन समूह का नाम दिवंगत अजित दादा पवार के नाम पर रखा जाए, क्योंकि उन्होंने अल्पसंख्यक समुदाय से जुड़े मुद्दों को लगातार आगे बढ़ाया था। उन्होंने कहा कि अजित पवार के प्रयासों से ही अल्पसंख्यक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान और अल्पसंख्यक आयोग जैसी संस्थाओं की स्थापना संभव हुई।
विधायक ने यह भी कहा कि मुस्लिम समुदाय महाराष्ट्र की आबादी का 11.54 प्रतिशत हिस्सा है और राज्य में 56 मुस्लिम बहुल कस्बे हैं। ऐसे सर्वे सीमित लागत और संसाधनों में आउटसोर्स एजेंसियों के माध्यम से किए जा सकते हैं, जैसा कि सरकार पहले अन्य समुदायों के लिए कर चुकी है।

