Tuesday, June 30, 2026
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चंपत राय के पास अगर अवैध संपत्ति होती तो पैतृक घर जर्जर न होता, सभी आरोप बेबुनियाद: परिजन

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बिजनौर, 29 जून (आईएएनएस)। राम मंदिर चढ़ावे में गड़बड़ी के मामले में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के समर्थन में उनके परिजन और स्थानीय लोग सामने आए हैं। उन्होंने चंपत राय पर लगाए जा रहे आरोपों को पूरी तरह बेबुनियाद बताया और कहा कि उनका जीवन हमेशा सादगी, ईमानदारी और समाज सेवा के लिए समर्पित रहा है। उनका कहना है कि चंपत राय को जानबूझकर बदनाम करने की कोशिश की जा रही है।

चंपत राय के छोटे भाई सुनील कुमार बंसल ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में कहा कि उनके भाई के खिलाफ लगाए जा रहे सभी आरोप झूठे और निराधार हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी दल साजिश के तहत चंपत राय, राम मंदिर और उत्तर प्रदेश सरकार की छवि खराब करने का प्रयास कर रहे हैं।

उन्होंने अपने पैतृक घर की ओर इशारा करते हुए कहा कि यह करीब 150 साल पुराना मकान है, जो आज भी जर्जर हालत में खड़ा है। यदि चंपत राय के पास अवैध संपत्ति होती तो उनके परिवार की स्थिति ऐसी नहीं होती। उन्होंने कहा, “अगर देश में कहीं भी चंपत राय के नाम कोई अवैध जमीन या संपत्ति निकल आए तो सरकार उसे तुरंत अपने कब्जे में ले ले।”

सुनील कुमार बंसल ने कहा कि चंपत राय का सार्वजनिक जीवन पूरी तरह पारदर्शी रहा है। उन्होंने बताया कि वर्ष 1977 में आपातकाल के दौरान चंपत राय करीब 18 महीने तक जेल में रहे थे। इसके बाद वर्ष 1980 में उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े इंटर कॉलेज में प्रवक्ता की नौकरी छोड़ दी और अपना पूरा जीवन समाज सेवा, राम मंदिर आंदोलन, आरएसएस और विश्व हिंदू परिषद को समर्पित कर दिया। उन्होंने कहा कि चंपत राय ने आजीवन अविवाहित रहकर समाज और राष्ट्र के लिए काम किया है।

उन्होंने यह भी कहा कि यदि दानपात्र मामले में किसी ने गड़बड़ी की है, तो उसने चंपत राय के विश्वास का गलत फायदा उठाया है। ऐसे लोगों के खिलाफ जांच चल रही है और दोषियों को कानून के मुताबिक सजा मिलनी चाहिए।

वहीं, स्थानीय निवासी मनोज अरोड़ा ने भी चंपत राय के पक्ष में बयान देते हुए कहा कि उन पर लगाए गए आरोप पूरी तरह झूठे हैं। उन्होंने कहा कि एसआईटी जांच कर रही है और जांच पूरी होने से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा। उन्होंने कहा कि उनके व्यक्तिगत विचार में चंपत राय जैसे व्यक्ति पर इस तरह के आरोप लगना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि जांच पूरी होने के बाद ही पूरी सच्चाई सामने आएगी।

मनोज अरोड़ा ने कहा कि चंपत राय का जीवन बेहद सादा रहा है और उन्होंने कभी निजी लाभ के लिए कोई काम नहीं किया। उन्होंने कहा कि ऐसे व्यक्ति की छवि खराब करने की कोशिश नहीं होनी चाहिए।

स्थानीय निवासी नौबार ने कहा कि अभी तक सीधे तौर पर चंपत राय पर आरोप नहीं लगाए गए हैं, बल्कि उनके कर्मचारियों पर आरोप लगे हैं। उन्होंने कहा कि इलाके के अधिकांश लोग आज भी चंपत राय को ईमानदार और निर्दोष मानते हैं।

उन्होंने कहा कि यदि करोड़ों के गबन जैसे आरोप सही होते तो उसका असर उनके जीवन में दिखाई देता लेकिन उनका पैतृक घर और परिवार की स्थिति सबके सामने है। उन्होंने कहा कि चंपत राय वर्षों से ट्रस्ट के महासचिव हैं। यदि उनका उद्देश्य धन कमाना होता तो अब तक उनकी जीवनशैली पूरी तरह बदल चुकी होती, लेकिन ऐसा कुछ भी दिखाई नहीं देता। उन्होंने बताया कि वह चंपत राय के परिवार को लंबे समय से जानते हैं। उनके अनुसार, परिवार के सदस्य सामान्य जीवन जीते हैं और बच्चों ने भी मेहनत करके पढ़ाई की है। उन्होंने कहा कि चंपत राय ने कभी अपने पद का फायदा उठाकर परिवार के किसी सदस्य को लाभ नहीं पहुंचाया।

उन्होंने आपातकाल के बाद का एक प्रसंग भी साझा करते हुए कहा कि जब चंपत राय जेल से रिहा हुए थे, तब स्थानीय लोग उनके स्वागत के लिए पहुंचे थे, लेकिन उन्होंने सादगी के कारण किसी तरह के सम्मान समारोह से भी बचने की कोशिश की थी। इससे उनके व्यक्तित्व का अंदाजा लगाया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव नजदीक होने के कारण विरोधी ताकतें इस तरह के आरोपों के जरिए चंपत राय और राम मंदिर आंदोलन को बदनाम करने की कोशिश कर सकती हैं।

वहीं, शीतल कुमार अग्रवाल ने कहा कि चंपत राय पर लगाए जा रहे सभी आरोप राजनीतिक साजिश का हिस्सा हैं। उन्होंने कहा कि चंपत राय का जीवन हमेशा बेहद सादा रहा है और उन्होंने कभी निजी संपत्ति बनाने पर ध्यान नहीं दिया। उन्होंने कहा कि उनके जैसे व्यक्ति पर आरोप लगाना उचित नहीं है। उन्होंने भी दावा किया कि चुनावी माहौल को देखते हुए राजनीतिक कारणों से इस पूरे मामले को उछाला जा रहा है। उनके अनुसार, कुछ राजनीतिक दल इस विवाद के जरिए राम मंदिर से जुड़े लोगों की छवि खराब करना चाहते हैं।

नवीन कुमार ने भी आईएएनएस से बातचीत में कहा कि चंपत राय को जानबूझकर बदनाम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पूरे मामले में कोषाध्यक्ष का नाम सामने नहीं लाया जा रहा, जबकि केवल चंपत राय का नाम उछाला जा रहा है।

उन्होंने कहा कि चंपत राय लंबे समय तक विश्व हिंदू परिषद के वरिष्ठ नेता अशोक सिंघल के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम करते रहे और राम मंदिर आंदोलन की पूरी जिम्मेदारी संभाली। ऐसे व्यक्ति की ईमानदारी पर सवाल उठाना उचित नहीं है।