तेहरान, 30 जून (आईएएनएस)। दोहा में अमेरिका-ईरान समझौता ज्ञापन को लेकर वार्ता तय है। इससे पहले कतर ने और फिर खुद ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि तेहरान और वाशिंगटन के बीच बैठक नहीं होगी। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माईल बाघेई ने प्रेस ब्रीफिंग के दौरान स्पष्ट किया कि अमेरिकी अधिकारियों के साथ किसी भी स्तर पर बैठक की कोई योजना नहीं है।
उन्होंने कहा, “संभावना है कि बुधवार को दोहा में कतर के अधिकारियों के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) के प्रावधानों के क्रियान्वयन पर चर्चा होगी। इसमें ईरान की कतर में फंसी प्रतिबंधित वित्तीय संपत्तियों की रिहाई से जुड़ा प्रावधान भी शामिल है।”
बाघेई ने दोहराया, “मैं फिर स्पष्ट कर रहा हूं कि अगले कुछ दिनों में अमेरिकी पक्ष के साथ किसी भी स्तर पर कोई बैठक निर्धारित नहीं की गई है।”
इससे पहले कतर के विदेश मंत्रालय ने कहा था कि कतर में रखे ईरान के 6 अरब डॉलर के फ्रीज किए गए फंड अभी तक तेहरान को हस्तांतरित नहीं किए गए हैं।
वहीं बाघेई ने लेबनान को लेकर अपने देश का रुख एक बार फिर स्पष्ट किया। उन्होंने कहा, “समझौता ज्ञापन के पहले प्रावधान के अनुरूप अमेरिका के लिए सभी मोर्चों, विशेषकर लेबनान में युद्ध समाप्त कराने की अपनी प्रतिबद्धता निभाना महत्वपूर्ण है।”
ईरानी प्रवक्ता ने कहा, “अमेरिका को अपनी प्रतिबद्धताओं का पालन करना चाहिए और आवश्यकता पड़ने पर जायोनी शासन (इजरायल) को भी अपने वादों का पालन करने के लिए बाध्य करना चाहिए।” उन्होंने दोहराया, “अमेरिका की प्रतिबद्धता का आकलन समझौता ज्ञापन के पाठ के आधार पर किया जाएगा।”
होर्मुज को लेकर पूछे सवाल पर बाघेई ने कहा कि स्ट्रेट में बारूदी सुरंग हटाने के लिए उन्हें किसी विदेशी मदद की आवश्यकता नहीं है। पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि किसी भी बाहरी दखल का उद्देश्य “सद्भावनापूर्ण नहीं होगा” और इससे स्थिति और अधिक जटिल होगी।
उन्होंने बताया कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बारूदी सुरंगों को हटाने का मुद्दा पहले से ही समझौता ज्ञापन का हिस्सा है, इसलिए इस मामले में क्षेत्र के बाहर के किसी पक्ष के हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है।
इन सब हलचलों के बीच यूरोपीय संघ (ईयू) खाड़ी क्षेत्र के विशेष प्रतिनिधि लुइगी डी मायो ने दोहा में कतर के प्रधानमंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान बिन जासिम अल थानी से मुलाकात की।
कतर के विदेश मंत्रालय के अनुसार, दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा की। साथ ही अमेरिका और ईरान के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर के बाद खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा और स्थिरता को बढ़ावा देने के लिए जारी कूटनीतिक प्रयासों पर भी चर्चा की।

