Thursday, July 2, 2026
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आईएस गतिविधि से जुड़ा युवक गिरफ्तार, सिक्किम पुलिस बोली- राज्य में कोई आतंकी नेटवर्क नहीं

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गंगटोक, 1 जुलाई (आईएएनएस)। सिक्किम पुलिस ने 19 वर्षीय युवक की कथित इस्लामिक स्टेट (आईएस) से जुड़ी ऑनलाइन गतिविधियों के मामले में गिरफ्तारी के बाद स्पष्ट किया है कि राज्य में किसी संगठित आतंकी मॉड्यूल, स्थानीय उग्रवादी नेटवर्क या सांप्रदायिक साजिश के कोई सबूत नहीं मिले हैं। पुलिस के अनुसार, यह मामला फिलहाल एक व्यक्ति के कथित ऑनलाइन कट्टरपंथी बनने (सेल्फ-रेडिकलाइजेशन) से जुड़ा है।

पुलिस ने बताया कि नाम नांग निवासी 19 वर्षीय मोहम्मद अर्जू को सदर थाना पुलिस ने दिल्ली पुलिस के सहयोग से संयुक्त अभियान में गिरफ्तार किया। यह कार्रवाई राज्य स्पेशल ब्रांच और केंद्रीय खुफिया एजेंसियों से मिली सूचना के आधार पर की गई। इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए), 1967 और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की संबंधित धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की गई है।

आधिकारिक बयान के अनुसार, डीएसपी मिंग्यूर टेंपो नादिक के नेतृत्व में चल रही जांच में सामने आया है कि आरोपी सोशल मीडिया और एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के जरिए बिना किसी प्रत्यक्ष संपर्क के ऑनलाइन कट्टरपंथी विचारधारा से प्रभावित हुआ।

जांच के दौरान लोअर एमजी मार्ग, नाम नांग रोड स्थित एक घर पर छापेमारी की गई। इस दौरान परिवार के छह सदस्यों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया तथा लैपटॉप, आईपैड और पेन ड्राइव जब्त किए गए। आरोपी के सैमसंग मोबाइल फोन की फॉरेंसिक जांच में चरमपंथी एप्लीकेशन, “जीआईएम (ग्रुप ऑफ इस्लामिक मेंबर्स)” नामक इंस्टाग्राम ग्रुप से जुड़ी सक्रिय चैट, आतंकी फंडिंग पर बातचीत और भारत तथा पाकिस्तान के लोगों से संपर्क के रिकॉर्ड मिले। जांचकर्ताओं को चरमपंथी विचारधारा के समर्थन से जुड़े चैटजीपीटी बातचीत के रिकॉर्ड भी मिले। हालांकि परिवार के अन्य पांच सदस्यों के खिलाफ कोई आपत्तिजनक साक्ष्य नहीं मिलने पर उन्हें जमानती मुचलके पर रिहा कर दिया गया।

पुलिस ने बताया कि मामले का सार्वजनिक खुलासा इसलिए देर से किया गया क्योंकि जांच के दौरान विभिन्न राज्यों की पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों के साथ समन्वय कर सूचनाओं का सत्यापन जरूरी था। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) अधिनियम, 2008 की धारा-6 के तहत आवश्यक रिपोर्ट सक्षम प्राधिकारियों को भेज दी गई है।

गंगटोक रेंज के डीआईजी और पुलिस के प्रमुख प्रवक्ता तेनजिंग लोडेन लेपचा ने कहा, “सिक्किम पुलिस सभी नागरिकों को आश्वस्त करना चाहती है कि फिलहाल राज्य में सार्वजनिक सुरक्षा, सांप्रदायिक सौहार्द या कानून-व्यवस्था के लिए किसी आसन्न खतरे की कोई खुफिया सूचना नहीं है। अभी तक राज्य में किसी संगठित आतंकी मॉड्यूल, स्थानीय उग्रवादी नेटवर्क या सांप्रदायिक कोण का कोई प्रमाण नहीं मिला है। जांच फिलहाल एक व्यक्ति की कथित गतिविधियों तक सीमित है।”

उन्होंने कहा कि जांच में अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय संपर्कों के संकेत मिले हैं, जिनकी केंद्रीय एजेंसियों और अन्य राज्यों की पुलिस के साथ मिलकर गहन जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन कट्टरपंथ आज एक उभरती हुई सुरक्षा चुनौती है और अभिभावकों, शैक्षणिक संस्थानों तथा आम लोगों को डिजिटल माध्यमों पर फैलाए जा रहे चरमपंथी कंटेंट के प्रति सतर्क रहना चाहिए तथा किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना पुलिस को देनी चाहिए।

इस बीच, अपर बर्तुक के विधायक काला राय ने घटना पर चिंता जताते हुए कहा कि सिक्किम अंतरराष्ट्रीय सीमाओं से घिरा राज्य है और ऐसी घटनाओं को गंभीरता से लेने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि इससे पहले भी पाकिस्तान के दो संदिग्ध आतंकियों की गिरफ्तारी हुई थी और अतीत में उल्फा का एक शीर्ष नेता कई वर्षों तक राज्य में रहकर स्कूल में पढ़ाता रहा था।

राय ने प्रशासन से बाहरी लोगों के सत्यापन अभियान को तेज करने, व्यापारिक प्रतिष्ठानों और दुकानों का व्यापक सत्यापन कराने तथा मकान मालिकों की जवाबदेही तय करने की मांग की। उन्होंने कहा कि राज्य की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए यह जानना जरूरी है कि दुकानें कौन चला रहा है, उनका पृष्ठभूमि क्या है और वे कहां से आए हैं। उन्होंने प्रशासन से इस दिशा में सख्त और सतर्क कार्रवाई करने का आग्रह किया।