Friday, July 3, 2026
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उधमपुर: कानूनी औपचारिकताओं के बाद डीएम ने एक बच्चे को दत्तक माता-पिता को सौंपा

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उधमपुर, 3 जुलाई (आईएएनएस)। जिला मजिस्ट्रेट उधमपुर मिंगा शेरपा ने बुधवार को सभी कानूनी औपचारिकताओं के पूरा होने के बाद एक बच्चे को विधिवत रूप से दत्तक माता-पिता को सौंप दिया। यह प्रक्रिया जिला बाल संरक्षण अधिकारी उधमपुर कनिका गुप्ता की उपस्थिति में संपन्न हुई।

यह दत्तक ग्रहण प्रक्रिया राज्य दत्तक ग्रहण एजेंसी उधमपुर (फुलवारी) द्वारा मिशन वात्सल्य के तहत संबंधित अधिकारियों के समन्वय से पूरी की गई। इसमें यह सुनिश्चित किया गया कि कानून के तहत निर्धारित सभी आवश्यक प्रक्रियाओं और सुरक्षा मानकों का पालन किया गया है।

इस अवसर पर जिला मजिस्ट्रेट ने परिवार को बधाई दी और कहा कि यह बच्चा अब एक सुरक्षित, स्नेहपूर्ण और बेहतर वातावरण में अपना समग्र विकास कर सकेगा। उन्होंने कहा कि हर बच्चे को परिवार का प्रेम, देखभाल और सुरक्षा मिलनी चाहिए तथा दत्तक ग्रहण जरूरतमंद बच्चों के सर्वोत्तम हितों की पूर्ति का एक महत्वपूर्ण माध्यम है।

जिला बाल संरक्षण अधिकारी ने बताया कि यह दत्तक ग्रहण किशोर न्याय (बालकों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम, 2015 और केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण द्वारा बनाए गए नियमों के तहत पूरा किया गया है, जिससे बच्चे के सर्वोत्तम हितों को प्राथमिकता दी जा सके।

उन्होंने नागरिकों से अपील की कि जो लोग कानूनी रूप से दत्तक ग्रहण करना चाहते हैं, वे जिला बाल संरक्षण इकाई से संपर्क करें या केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण के अधिकृत पोर्टल के माध्यम से पंजीकरण कराएं।

इसके साथ ही, जिला मजिस्ट्रेट उधमपुर मिंगा शेरपा ने बुधवार को जिला पशु चिकित्सालय, उधमपुर में राष्ट्रीय पशु रोग नियंत्रण कार्यक्रम के तहत जिलेव्यापी एफएमडी (फुट एंड माउथ डिजीज) टीकाकरण अभियान का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने पशुधन को सुरक्षित रखने के लिए समय पर टीकाकरण के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इससे न केवल पशुओं को बीमारियों से बचाया जा सकेगा, बल्कि उनकी उत्पादकता भी बढ़ेगी और किसानों की आजीविका को मजबूती मिलेगी।

जिला मजिस्ट्रेट ने पशुपालकों से अपील की कि वे पशुपालन विभाग के साथ सक्रिय सहयोग करें और जिले में 100 प्रतिशत टीकाकरण सुनिश्चित करें, ताकि उधमपुर को पूरी तरह रोगमुक्त बनाया जा सके। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य पशुधन को गंभीर बीमारियों से बचाना और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना है।