Saturday, July 4, 2026
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समावेशी विकास से ही साकार होगा विकसित भारत का सपना : राज्यपाल आनंदीबेन पटेल

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लखनऊ, 4 जुलाई (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहा कि विकसित भारत का संकल्प तभी सार्थक होगा, जब समाज के अंतिम व्यक्ति तक शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छ पेयजल, पोषण, अवसर और गरिमापूर्ण जीवन की समान पहुंच सुनिश्चित हो। उन्होंने कहा कि समावेशी विकास ही वास्तविक विकास है और स्वामी विवेकानंद का सच्चा सम्मान उनके विचारों को आचरण और जीवन में उतारने से होगा।

राज्यपाल ने शनिवार को जन भवन में स्वामी विवेकानंद की पुण्यतिथि पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित किया। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने जन भवन में स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर जन भवन के अधिकारियों और कर्मचारियों ने भी पुष्प अर्पित कर राष्ट्र और समाज की सेवा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

कार्यक्रम में जन भवन के शिक्षा विभाग की ओर से स्वामी विवेकानंद के जीवन, व्यक्तित्व और विचारों पर आधारित सांस्कृतिक एवं शैक्षिक प्रस्तुतियां दी गईं। “स्वामी विवेकानंद की बातें अमल में लाओ” गीत पर समूह गायन तथा वर्ष 1893 की विश्व धर्म संसद में दिए गए उनके ऐतिहासिक शिकागो भाषण की नाट्य प्रस्तुति ने उपस्थित लोगों को उनके सार्वभौमिक बंधुत्व, सहिष्णुता और भारतीय संस्कृति के संदेश से परिचित कराया। इस दौरान उनके जीवन और राष्ट्र निर्माण में योगदान पर आधारित एक डॉक्यूमेंट्री का भी प्रदर्शन किया गया।

अपने संबोधन में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहा कि स्वामी विवेकानंद का जीवन भारत की सनातन चेतना का जीवंत प्रकाश-स्तंभ है। उन्होंने अल्पायु में ही आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और राष्ट्रीय चेतना का ऐसा संचार किया, जिसका प्रभाव आज भी पूरी दुनिया महसूस कर रही है। स्वामी विवेकानंद ने भारतीयों में अपनी सांस्कृतिक विरासत के प्रति गर्व का भाव जगाया और यह विश्वास पैदा किया कि भारत विश्व का नैतिक और आध्यात्मिक नेतृत्व करने की क्षमता रखता है। वर्ष 1893 में शिकागो की विश्व धर्म संसद में दिया गया उनका संबोधन आज भी विश्व मानवता के इतिहास का अमर अध्याय है।

राज्यपाल ने कहा कि किसी भी महापुरुष का सच्चा सम्मान उनके विचारों को अपने व्यवहार, कार्य और जीवन में उतारने से होता है। विकसित भारत-2047 के लक्ष्य की प्राप्ति के लिए आत्मनिर्भरता, नवाचार और समावेशी विकास के साथ-साथ नैतिक मूल्यों का पालन भी उतना ही आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि आज का युवा तकनीक और नवाचार से लैस है, लेकिन तकनीक तभी सार्थक होगी जब उसके साथ अनुशासन, संवेदनशीलता, नैतिकता और राष्ट्रहित का भाव भी जुड़ा हो। उन्होंने युवाओं से स्वामी विवेकानंद के “उठो, जागो और लक्ष्य प्राप्ति तक मत रुको” के संदेश को जीवन में अपनाने का आह्वान किया।

आनंदीबेन पटेल ने कहा कि विकसित भारत का सपना तभी पूरा होगा, जब समाज के अंतिम व्यक्ति तक शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छ पेयजल, पोषण, अवसर और सम्मानजनक जीवन की समान पहुंच सुनिश्चित होगी। उन्होंने कहा कि समावेशी विकास ही वास्तविक विकास है। उन्होंने लोगों से जाति-भेद से ऊपर उठकर सामाजिक समरसता और सहयोग की भावना विकसित करने, बेटा-बेटी को समान शिक्षा के अवसर देने तथा पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन बनाने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद के आदर्शों और गुणों को आत्मसात करना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।