कोलकाता, 4 जुलाई (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल विधानसभा के नवनिर्वाचित सदस्यों के लिए आयोजित दो दिवसीय ओरिएंटेशन कार्यक्रम के दूसरे दिन भारतीय जनता पार्टी के विधायकों ने कहा कि इससे जनप्रतिनिधियों को विधानसभा की कार्यप्रणाली को बेहतर ढंग से समझने और प्रभावी भूमिका निभाने का अवसर मिलेगा।
भाजपा विधायक राजेश कुमार ने कहा कि लंबे समय से इस तरह के कार्यक्रम की केवल उम्मीद ही की जाती रही थी। उन्होंने बताया कि कई वरिष्ठ विधायक भी मानते हैं कि पहले कभी ऐसा प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित नहीं हुआ, जिसमें विधायकों को यह सिखाया जाए कि वे विधानसभा की कार्यवाही में एक प्रभावी जनप्रतिनिधि के रूप में किस प्रकार सार्थक योगदान दे सकते हैं। उनके अनुसार, इस तरह का प्रशिक्षण लोकतांत्रिक संस्थाओं को और अधिक मजबूत बनाने में सहायक होगा।
भाजपा विधायक दीपांजन गुहा ने भी कार्यक्रम की प्रशंसा करते हुए कहा कि सीखने की प्रक्रिया निरंतर चलती रहनी चाहिए। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे पूजा के बर्तन को नियमित रूप से साफ करने पर ही उसकी चमक बनी रहती है, उसी प्रकार जनप्रतिनिधियों के लिए भी लगातार सीखना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि पहली बार विधायक बनने के कारण उन्हें अभी बहुत कुछ सीखना है और यह कार्यक्रम उसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
भाजपा विधायक रूपा गांगुली ने कहा कि संसद में इस प्रकार के ओरिएंटेशन कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित किए जाते हैं और उनके लिए निर्धारित नियम भी हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें जानकारी मिली है कि पश्चिम बंगाल विधानसभा में इस तरह का कार्यक्रम पहली बार आयोजित किया जा रहा है, जिससे सदन की कार्यप्रणाली अधिक व्यवस्थित और प्रभावी बन सकेगी। उन्होंने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के संघर्ष के कारण ही पश्चिम बंगाल भारत का हिस्सा बना रहा। उन्होंने मांग की कि राज्य में डॉ. मुखर्जी की प्रतिमा स्थापित की जानी चाहिए।
विपक्ष के नेता रितब्रत बनर्जी के गुट द्वारा टीएमसी भवन पर कब्जे के विवाद पर भाजपा विधायक भास्कर भट्टाचार्य ने कहा कि यह उनका आंतरिक मामला है और जनता सब कुछ देख रही है। उन्होंने कहा कि इस पर जवाब संबंधित लोगों को ही देना होगा।
ओरिएंटेशन कार्यक्रम पर भास्कर भट्टाचार्य ने कहा कि यह एक स्वागतयोग्य पहल है। उनके अनुसार, जनता की सेवा करने के लिए केवल चुनाव जीतना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह भी सीखना जरूरी है कि विधानसभा में कैसे बोलना है, कार्यवाही में कैसे भाग लेना है और संसदीय परंपराओं का पालन कैसे करना है। उन्होंने विश्वास जताया कि वैचारिक मतभेदों के बावजूद इस तरह का प्रशिक्षण विधानसभा की कार्यक्षमता को और बेहतर बनाएगा।

