नई दिल्ली, 5 जुलाई (आईएएनएस)। नई दिल्ली म्युनिसिपल काउंसिल (एनडीएमसी) के वाइस चेयरमैन कुलजीत सिंह चहल ने रविवार को बीके दत्त कॉलोनी के बीडी पार्क में ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत वृक्षारोपण कार्यक्रम का नेतृत्व किया।
अधिकारी ने एक बयान में कहा कि ‘गुड गवर्नेंस एट योर डोरस्टेप’ (आपके द्वार पर सुशासन) पहल के तहत चहल ने रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (आरडब्ल्यूए) और स्थानीय नागरिकों से बातचीत की और उन्हें जन-समस्याओं का तुरंत और समय पर समाधान सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।
इस मौके पर चहल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में शुरू किए गए ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान का यह लगातार 31वां रविवार है। इस अभियान का मकसद जन-भागीदारी के जरिए पर्यावरण संरक्षण को एक जन-आंदोलन में बदलना है।
उन्होंने आगे कहा कि साप्ताहिक अभियान के अलावा एनडीएमसी विश्वविद्यालयों, विभिन्न दूतावासों और अन्य संस्थानों के सहयोग से बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण अभियान भी आयोजित कर रहा है।
जन भागीदारी में हो रही वृद्धि की सराहना करते हुए चहल ने एनडीएमसी टीम के समर्पित प्रयासों की प्रशंसा की और कहा कि ऐसे सामूहिक प्रयास नई दिल्ली को हरा-भरा, स्वच्छ और पर्यावरण के अनुकूल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
इस कार्यक्रम में आरडब्ल्यूए अध्यक्ष हरबंस डंकल, गुरु सिंह सभा के प्रतिनिधि एचएस सिंह, सनातन धर्म सभा के प्रतिनिधि एसएस चौहान, नरेंद्र विनायक और मदन भूटानी, ब्रह्मा कुमारिस के प्रतिनिधि अशोक चिटकारा, आर्य समाज के दीपक वोहरा और विनोद गिल, वाल्मीकि समाज के प्रतिनिधि, विभिन्न आरडब्ल्यूए अधिकारियों और बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिकों ने अपनी माताओं के नाम पर पौधे लगाए।
भाग लेने वालों ने इस अभियान की तारीफ करते हुए कहा कि यह भावनात्मक मूल्यों को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ता है और समाज को प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने के लिए प्रेरित करता है।
प्रधानमंत्री मोदी से प्रेरित, ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान हर नागरिक को अपनी मां के सम्मान में एक पेड़ लगाने के लिए प्रोत्साहित करता है और पर्यावरण संरक्षण तथा जन-भागीदारी के बीच एक मजबूत भावनात्मक जुड़ाव बनाता है।
एनडीएमसी के वाइस चेयरमैन ने कहा कि ‘एक पेड़ मां के नाम’ सिर्फ पेड़ लगाने का अभियान नहीं है, बल्कि भावनात्मक और सामाजिक जिम्मेदारी का एक जन-आंदोलन है। पेड़ लगाकर हम न केवल अपनी मां और ‘मां प्रकृति’ को सम्मान देते हैं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य के लिए एक मजबूत नींव भी रखते हैं।
उन्होंने आगे कहा कि सिर्फ पेड़ लगाना ही काफी नहीं है; उनकी नियमित सुरक्षा, सिंचाई और देखभाल भी उतनी ही जरूरी है।

