मुंबई, 8 जुलाई (आईएएनएस)। महाराष्ट्र सरकार ने एक बड़ा नीतिगत फैसला लेते हुए राज्य के सभी वाणिज्यिक यात्री वाहनों (कमर्शियल पैसेंजर व्हीकल्स) के चालकों के लिए मराठी भाषा का व्यावहारिक ज्ञान अनिवार्य कर दिया है।
यह नियम 16 अगस्त 2026 से लागू होगा। इसके लिए महाराष्ट्र मोटर वाहन नियम, 1989 के नियम 4, 22, 78 और 85 में संशोधन किया गया है।
परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने बुधवार को राज्य विधानसभा और विधान परिषद में इस फैसले की घोषणा की। उन्होंने बताया कि इस संबंध में आधिकारिक अधिसूचना (नोटिफिकेशन) 8 जुलाई को जारी कर दी गई है।
सदन को संबोधित करते हुए सरनाईक ने कहा कि इस फैसले का उद्देश्य गैर-स्थानीय कामगारों को अलग-थलग करना नहीं, बल्कि यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा सुनिश्चित करना है।
उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र ने हमेशा देश के हर हिस्से से रोजगार की तलाश में आने वाले लोगों का स्वागत किया है, लेकिन राज्य के लोगों से संवाद करने के लिए मराठी भाषा का पर्याप्त व्यावहारिक ज्ञान होना एक सामाजिक जिम्मेदारी भी है।
मंत्री ने कहा कि चालक और यात्रियों के बीच स्पष्ट संवाद होने से गलतफहमियां कम होती हैं, आपात स्थिति में तुरंत मदद मिल सकती है और सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था पर लोगों का भरोसा भी मजबूत होता है।
इस बदलाव को आसान बनाने के लिए परिवहन विभाग ने पिछले कुछ महीनों में राज्यभर में बड़े पैमाने पर प्रशिक्षण व्यवस्था तैयार की है।
इसके तहत राज्य मराठी भाषा विभाग, उद्योग मंत्री उदय सामंत, कोंकण मराठी साहित्य परिषद और मुंबई मराठी साहित्य संघ के सहयोग से एक विशेष प्रशिक्षण अभियान चलाया जा रहा है।
सरनाईक ने बताया कि हजारों अनुभवी भाषा शिक्षकों को इस अभियान से जोड़ा गया है। प्रशिक्षण क्षेत्रीय परिवहन कार्यालयों (आरटीओ) और विशेष केंद्रों के माध्यम से दिया जा रहा है। चालकों की कार्य परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए प्रशिक्षण का समय भी लचीला रखा गया है।
सरकार ने पारंपरिक और जटिल व्याकरण पढ़ाने के बजाय एक व्यावहारिक पाठ्यक्रम तैयार किया है। इसमें रोजमर्रा के परिवहन से जुड़े शब्द, यात्रियों से संवाद, सहायता प्रदान करने और आपातकालीन परिस्थितियों में इस्तेमाल होने वाले वाक्यांश शामिल हैं।
प्रशिक्षण के दौरान दिशा बताने, मार्ग की जानकारी देने, किराया तय करने, बिलिंग करने और यात्रियों से विनम्र व्यवहार करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
महिलाओं, वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांग यात्रियों से बेहतर संवाद स्थापित करने के लिए भी विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके अलावा, वाहन खराब होने, चिकित्सा आपातकाल या दुर्घटना जैसी स्थितियों में उपयोगी भाषा सिखाई जाएगी।
मंत्री ने बताया कि प्रशिक्षण को आसान बनाने के लिए चित्रयुक्त पुस्तिकाएं, ऑडियो-वीडियो सामग्री और सरल प्रशिक्षण किट तैयार की गई हैं, ताकि चालक बिना किसी तनाव के मराठी सीख सकें।
सरनाईक ने कहा कि सरकार इस पहल को कार्यस्थल पर सांस्कृतिक समन्वय की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानती है।
उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में काम करने वाले हर व्यक्ति को अपनी मातृभाषा पर गर्व होना चाहिए, लेकिन साथ ही राज्य की भाषा को भी दिल से अपनाना चाहिए।
परिवहन मंत्री ने वाणिज्यिक वाहन चालकों, वाहन मालिकों, परिवहन यूनियनों और आम नागरिकों से नए नियमों के पालन में सहयोग करने की अपील की। उन्होंने आश्वासन दिया कि इस बदलाव के दौरान सरकार की ओर से आवश्यक बुनियादी सुविधाएं, अध्ययन सामग्री और मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाएगा।

