ऑकलैंड, 11 जुलाई (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने छह दिवसीय दौरे के आखिरी चरण में ऑकलैंड में आयोजित सामुदायिक कार्यक्रम के दौरान भारतीय समुदाय को संबोधित किया। इस दौरान पीएम मोदी ने कहा कि भले ही आपका शरीर न्यूजीलैंड में है, लेकिन आपकी आत्मा हिन्दुस्तान में है।
भारतीय समुदाय को संबोधित करने के लिए पीएम मोदी जैसे ही मंच पर पहुंचे, पूरा हॉल मोदी-मोदी के नारे और तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उंठा।
पीएम मोदी ने भारत और न्यूजीलैंड की सभ्यता और विरासत को लेकर कहा, “भारत हजारों वर्ष पुरानी सभ्यता है, जो आज अपनी प्राचीनता को सहेजते हुए आधुनिकता को स्वीकार कर रहा है। हर युग में भारत ने खुद को बदला है। इसका कारण हमारी सीखने की ललक है। भारत सबसे सीखता है। हमारे लिए सामने वाले देश की जनसंख्या नहीं, जन कल्याण की भावना मायने रखती है। इसलिए हमने न्यूजीलैंड से भी बहुत कुछ सीखा है और अब भी सीख रहे हैं।”
उन्होंने कहा कि न्यूजीलैंड दुनिया का वो देश है, जिसने सबसे पहले महिलाओं को वोटिंग का अधिकार दिया था। आज हम देखते हैं कि न्यूजीलैंड की सोसायटी में महिलाएं बहुत बड़े पैमाने पर योगदान दे रही हैं। भारत भी महिलाओं के विकास का नेतृत्व करता है, महिलाओं के लिए संभावनाओं के नए द्वार खोलता है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था कैसे किसी देश की तकदीर बदल सकती है, ये न्यूजीलैंड ने करके दिखाया। इसकी ताकत कृषि के इर्द-गिर्द बनाया गया इकोसिस्टम है। ये बहुत बड़ी प्रेरणा है। ये भारत जैसे छोटे किसानों वाले बड़े कृषि देश के लिए बड़ी सीख है।
न्यूजीलैंड के मानुका शहद का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि न्यूजीलैंड ने दिखाया है कि छोटे किसान भी बाजार के एक बड़े ब्रांड बन सकते हैं। न्यूजीलैंड की क्लाइमेट स्मार्ट प्रिसिजन फार्मिंग तकनीक में भी हमारे लिए सीखने के लिए बहुत कुछ है। न्यूजीलैंड के ‘मानुका हनी’ को लिक्विड गोल्ड कहा जाता है। जैसे यहां शहद ट्रेडिशन और टेस्ट के अलावा स्वास्थ्य से जुड़ा है, वैसे ही भारत के आयुर्वेद में भी शहद का बड़ा महत्व है। भारत में भी हम ‘बी कीपिंग’ को लेकर एक मिशन चला रहे हैं। इससे भारत में शहद के उत्पादन में काफी बढ़ोतरी हुई है। आजकल तो हिमालय की ऊंचाइयों से जो शहद आता है, वो सोना क्या हीरा बनता जा रहा है। न्यूजीलैंड के साथ शहद के प्रोडक्शन को बढ़ाने के बारे में बहुत कुछ सीखा जा सकता है।
दोनों देशों के बीच खेल के क्षेत्र में सहयोग को लेकर उन्होंने कहा कि इस साल इंडिया-न्यूजीलैंड स्पोर्टिंग रिलेशंस को एक साल पूरे हो रहे हैं। सौ साल पहले हमारी हॉकी टीम न्यूजीलैंड खेलने आई थी और उस टूर में मेजर ध्यानचंद के परफॉर्मेंस की हर तरफ चर्चा हो रही थी। उनकी हॉकी ने न्यूजीलैंड के लोगों का दिल जीता था। कंटेंट क्रिएटर्स की भाषा में कहूं तो ये कोलैब का जमाना है।
रग्बी में सहयोग को लेकर प्रधानमंत्री ने कहा, “दोनों देश खेल में भी शानदार सहयोग कर सकते हैं; एक उदाहरण रग्बी का है। कुछ देर पहले ही पता चला कि ऑल ब्लैट्स ने रग्बी के मैच में शानदार जीत दर्ज की है। भारत रग्बी में न्यूजीलैंड से सीखना चाहता है। भारत भी रग्बी में आगे आए, इसके लिए हमें कोच चाहिए, एक्सपर्ट्स चाहिए। इसके लिए न्यूजीलैंड हमारी बहुत मदद कर सकता है। हाल ही में भुवनेश्वर में न्यूजीलैंड रग्बी और रग्बी इंडिया के कोचिंग प्रोग्राम को मैं एक अच्छी शुरुआत मानता हूं।”
स्पोर्ट्स टेक को लेकर भारत के प्रधानमंत्री ने कहा कि आज यहां आने से पहले न्यूजीलैंड के एक स्पोर्ट्स स्टार्टअप इवेंट में गया था। स्पोर्ट्स टेक में हो रहे इनोवेशन के नए आइडिया ने मुझे प्रभावित किया। मुझे विश्वास है कि इसमें भी हम साथ मिलकर बहुत कुछ कर सकते हैं। भारत और न्यूजीलैंड का भविष्य आपस में जुड़ा हुआ है। इसका एक उदाहरण स्पेस के क्षेत्र में भी है। भारत के चंद्रयान ने जब चंद्रमा के साउथ पोल पर लैंड किया, तो पूरा न्यूजीलैंड नृत्य कर रहा था। उस दिन हम सबको गर्व हुआ।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “आपको मैं गर्व की एक और बात बताता हूं। इस सफलता में और आपको गर्व दिलाने में न्यूजीलैंड की तकनीक का भी बहुत बड़ा योगदान रहा है। स्पेस कंपनी ने कई अवसरों पर हमारे साथ मिलकर काम किया। हम इस सहयोग को और आगे ले जाने के लिए काम कर रहे हैं। स्पेस सेक्टर यह बताने के लिए काफी है कि भारत और न्यूजीलैंड की इकोनॉमी एक-दूसरे को कितना कुछ दे सकती है, यही हमारे व्यापार समझौते की स्प्रिरिट है। यह व्यापार समझौता हमारे विकसित भारत की तरफ हमारी यात्रा को गति देगा।”
न्यूजीलैंड के माओरी समाज का जिक्र करते हुए उन्होंने आगे कहा कि भारत और न्यूजीलैंड दोनों के व्यवसाय को अवसर देगा। दोनों देशों के बीच एक और बड़ी समानता है। यह समानता हमारी भारतीय संस्कृति की है, इसके संरक्षण की है। आज मैं ‘माओरी समाज’ को विशेष रूप से याद करना चाहता हूं। मैंने हाक्का को केवल एक परफॉर्मेंस के रूप में नहीं देखा, मैंने इसमें एक समाज की आत्मा देखी है। इसमें साहस है, आत्मसम्मान है, अपने पूर्वजों के प्रति श्रद्धा है और पूरे समुदाय की सामूहिक शक्ति का एक एहसास है। माओरी संस्कृति में एक बहुत ही सुंदर शब्द है, ‘मनाकितांगा,’ इसका मतलब है सम्मान देना, अपनापन देना और पूरे मन से उसकी देखभाल करना। भारत में भी हम कहते हैं, ‘अतिथि देवो भवः।’ शब्द, परिवेश, पहनावा, और भाषाएं अलग हैं, लेकिन भावना बिल्कुल एक ही है। ऐसे ही माओरी संस्कृति में परिवार के लिए एक सुंदर शब्द है, ‘फानो’, यानी कि परिवार।
उन्होंने आगे कहा कि इसमें कई पीढ़ियां होती हैं, रिश्ते और पूरा समुदाय होते हैं। भारत भी परिवार को केवल एक सामाजिक व्यवस्था नहीं मानता। हमारे लिए परिवार एक संस्था है। माओड़डी परंपरा का एक और सुंदर विचार है, काइत्या कितांगा। यह हमें सिखाती है कि हम प्रकृति के मालिक नहीं, संरक्षक हैं। भारत में भी कहा गया है कि माता भूमिः पुत्रोऽहं पृथिव्याः। पृथ्वी हमारी माता है, इसी सोच को आधार बनाते हुए हम भारत में धरती मां के संरक्षण के लिए एक पेड़ मां के नाम, प्राकृतिक खेती मिशन, जैसे अनेकों अभियान चला रहे हैं। मैं जानता हूं कि हजारों किमी दूर रहते हुए भी गदिल के किसी ना किसी कोने में दिनभर की प्रक्रिया में कहीं न कहीं हिंदुस्तान झलकता ही है। शरीर यहां होगा, मन वहां होगा। इसलिए आप भारत की हर उपलब्धि पर भी नजर रखते हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा, “जब क्रिकेट स्टेडियम में बैठकर देखते हैं तो बहुत सी चीजें छूट जाती है, लेकिन घर में टीवी पर देखते हैं तो हर बारीकी का पता चलता है। वैसे ही आपको भी भारत की हर बारीकी का पता चलता है। यही बात हमें सबसे खास बनाती है। भारतीय जिस देश में भी रहते हैं, वहां उस देश की प्रगति में पूरी तरह मदद करते हैं। अपने देश की विकास की भी जानकारी रखते हैं। हम जितना प्यार जन्मभूमि को करते हैं, उतना ही समर्पण कर्मभूमि को भी करते हैं।”

