नई दिल्ली, 12 जुलाई (आईएएनएस)। जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री और नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) के उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला द्वारा भाजपा पर उनकी पार्टी के विधायकों को तोड़ने की कोशिश करने का आरोप लगाने के बाद सियासी विवाद तेज हो गया है। भाजपा ने रविवार को कहा कि यदि उमर अब्दुल्ला अपने आरोपों के समर्थन में सबूत पेश नहीं करते हैं तो उनके खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर किया जाएगा। वहीं, नेशनल कॉन्फ्रेंस ने मुख्यमंत्री के बयान का बचाव किया है।
दरअसल, शनिवार को पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए उमर अब्दुल्ला ने आरोप लगाया था कि जब पैसे और मंत्री पद का लालच देकर उनकी पार्टी के विधायकों को तोड़ने की कोशिश नाकाम रही, तो अब बंद कमरों में उन्हें अपने पाले में लाने की कोशिश की जा रही है।
उन्होंने कहा, “भाजपा एक बार फिर नेशनल कॉन्फ्रेंस को तोड़ने की कोशिश कर रही है। मुझे जानकारी मिली है कि जम्मू के हमारे एक विधायक को 20 से 30 करोड़ रुपये, मंत्री पद और राज्य का दर्जा दिलाने का वादा कर भाजपा में शामिल होने का प्रस्ताव दिया गया। उन्हें लगता है कि लोगों का जमीर इतनी सस्ती चीज है।” हालांकि, उन्होंने संबंधित विधायक का नाम नहीं बताया।
उमर अब्दुल्ला के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए जम्मू-कश्मीर विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और भाजपा विधायक सुनील शर्मा ने कहा कि भाजपा पहले ही इन आरोपों को खारिज कर चुकी है। उन्होंने कहा, “हमने उमर अब्दुल्ला को चुनौती दी है कि वे उन भाजपा नेताओं के नाम बताएं, जिन्होंने कथित तौर पर यह प्रस्ताव दिया। वे ऐसा नहीं कर पाएंगे, क्योंकि ये आरोप पूरी तरह निराधार हैं। इस तरह के गैर-जिम्मेदाराना बयान देकर वह अपनी अपरिपक्वता दिखा रहे हैं।”
सुनील शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री या तो अपने आरोपों के समर्थन में सबूत पेश करें या फिर सार्वजनिक रूप से माफी मांगें। अन्यथा भाजपा उनके खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर करेगी।
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता आर.पी. सिंह ने भी उमर अब्दुल्ला को खुली चुनौती देते हुए कहा कि यदि उनके पास आरोपों के समर्थन में कोई प्रमाण नहीं है तो उन्हें मानहानि के मुकदमे का सामना करना पड़ेगा।
वहीं, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) नेता प्रफुल्ल पटेल ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में सरकार बदलने का कोई सवाल ही नहीं उठता। उन्होंने कहा कि यदि किसी दल के भीतर मतभेद होते हैं या कोई विधायक किसी अन्य पार्टी में जाता है तो हर मामले में भाजपा को दोष देना उचित नहीं है। भाजपा लोकतांत्रिक परंपराओं का पालन करती है और जहां किसी दल को स्पष्ट बहुमत मिलता है, वहां सरकार गठन में कोई बाधा नहीं डालती।
दूसरी ओर, नेशनल कॉन्फ्रेंस के सांसद सज्जाद अहमद किचलू ने मुख्यमंत्री का बचाव करते हुए कहा कि उमर अब्दुल्ला एक जिम्मेदार नेता हैं और वह बिना सबूत के कोई सार्वजनिक बयान नहीं देते। उन्होंने कहा कि देश में पहले भी ‘ऑपरेशन लोटस’ और ‘ऑपरेशन टाइगर’ जैसे अभियानों के जरिए निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को दल बदलने के लिए प्रोत्साहित किए जाने के आरोप लगते रहे हैं। जम्मू-कश्मीर में भी ऐसे प्रयास हुए हैं, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिलेगी।
कांग्रेस सांसद जेबी मैथर ने भी अपने सहयोगी दल नेशनल कॉन्फ्रेंस का समर्थन करते हुए आरोप लगाया कि भाजपा लंबे समय से विधायकों की खरीद-फरोख्त, दबाव और बड़े-बड़े प्रलोभनों के जरिए सरकारें गिराने की राजनीति करती रही है। उन्होंने दावा किया कि असम, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, पंजाब और अब जम्मू-कश्मीर में भी ऐसे प्रयास देखने को मिल रहे हैं, जो लोकतंत्र को कमजोर करने वाले हैं।

