गयाजी, 12 जुलाई (आईएएनएस)। बिहार विधानसभा के सदस्यों के लिए बिहार विधानसभा सचिवालय, बिहार लोक प्रशासन एवं ग्रामीण विकास संस्थान (बिपार्ड) तथा प्राइड (लोकसभा सचिवालय) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय आवासीय ‘प्रबोधन कार्यक्रम’ रविवार को गया जी स्थित बिपार्ड परिसर में संपन्न हो गया। कार्यक्रम के अंतिम दिन संसदीय परंपराओं, विधायी प्रक्रिया, विशेषाधिकार, नवाचार तथा संसदीय समितियों की भूमिका जैसे विषयों पर तीन तकनीकी सत्र आयोजित किए गए, जिनमें विशेषज्ञों और जनप्रतिनिधियों ने अपने विचार साझा किए।
दूसरे दिन के कार्यक्रम की शुरुआत बिपार्ड परिसर में ब्रह्मयोनि पहाड़ी के निकट वृक्षारोपण से हुई। इसके बाद आयोजित पहले तकनीकी सत्र में पूर्व उपमुख्यमंत्री तारकिशोर प्रसाद ने बजट निर्माण, वित्तीय प्रावधानों और विभागीय कार्यप्रणाली पर अपने अनुभव साझा किए। प्राइड (लोकसभा सचिवालय) के निदेशक पार्थो गोस्वामी ने विधायी प्रक्रिया, सरकारी एवं गैर-सरकारी विधेयकों, बजटीय प्रक्रिया तथा संसदीय समितियों की भूमिका पर विस्तार से जानकारी दी।
विधायक संदीप सौरभ ने प्रश्नकाल की उपयोगिता पर अपने विचार रखे, जबकि उमेश कुशवाहा ने कहा कि आधुनिक तकनीक ने विधायी कार्यों को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाया है। दूसरे सत्र में उत्तर प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष सतीश महाना ने कहा कि जनता का विश्वास ही जनप्रतिनिधियों की सबसे बड़ी पूंजी है और विधायकों को अपने विशेषाधिकारों का उपयोग जिम्मेदारी के साथ करना चाहिए। राज्यसभा सचिवालय के संयुक्त सचिव राघव प्रसाद दास और पुलिस मुख्यालय के सहायक महानिदेशक (रेल) डॉ. कमल किशोर सिंह ने विशेषाधिकारों और संसदीय परंपराओं के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से जानकारी दी।
तीसरे सत्र में सांसद जगदंबिका पाल सहित अन्य वक्ताओं ने संसदीय समितियों की भूमिका, वित्तीय अनुशासन, विधेयकों की समीक्षा और जनहित आधारित कानून निर्माण की आवश्यकता पर बल दिया। इस दौरान विधायक दीपा कुमारी, कमरुल होदा और सतीश कुमार सिंह यादव ने भी अपने विचार रखे। सभी सत्रों में प्रश्नोत्तर के माध्यम से सदस्यों ने विशेषज्ञों से संवाद कर अपनी जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त किया। समापन समारोह के बाद आयोजित प्रेस वार्ता में बिहार विधानसभा के अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने कहा कि कार्यक्रम में सत्ता पक्ष और विपक्ष, दोनों के सदस्यों ने समान उत्साह और गंभीरता के साथ भागीदारी की।
उन्होंने कहा कि संसदीय कार्यप्रणाली, विधायी दायित्व, सदन की मर्यादा और लोकतांत्रिक मूल्यों पर हुए विमर्श से विधायकों की कार्यक्षमता और संसदीय दक्षता को नई दिशा मिलेगी। उन्होंने विश्वास जताया कि इस कार्यक्रम से प्राप्त ज्ञान और अनुभव सदन की कार्यवाही की गुणवत्ता तथा जनप्रतिनिधियों के दायित्व निर्वहन को और अधिक प्रभावी बनाएगा। इस प्रेस वार्ता में मंत्री विजय सिन्हा भी उपस्थित रहे।
बता दें कि इस दो दिवसीय कार्यक्रम का उद्घाटन 11 जुलाई को उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने किया था। समापन अवसर पर विधानसभा के उपाध्यक्ष नरेन्द्र नारायण यादव ने धन्यवाद ज्ञापन दिया। कार्यक्रम में गया की आयुक्त सफीना एएन, पुलिस महानिरीक्षक विकास वैभव, जिलाधिकारी शशांक शुभंकर, वरीय पुलिस अधीक्षक सुशील कुमार सहित कई अधिकारियों को सम्मानित किया गया। इस दौरान कृषि मंत्री एवं गया के प्रभारी मंत्री विजय कुमार सिन्हा भी उपस्थित रहे।

