Monday, July 13, 2026
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आंध्र प्रदेश: जगन मोहन रेड्डी का विशाखापत्तनम दौरा 14 जुलाई को, लापता मछुआरों के परिवारों से मिलेंगे

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विशाखापत्तनम, 12 जुलाई (आईएएनएस)। पूर्व मुख्यमंत्री और वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) के अध्यक्ष वाई.एस. जगन मोहन रेड्डी 14 जुलाई को विशाखापत्तनम का दौरा करेंगे। वे विशाखापत्तनम तट के पास हाल ही में हुई नाव दुर्घटना में लापता हुए छह मछुआरों के परिवारों से मिलकर उन्हें सांत्वना देंगे।

वाईएसआरसीपी विशाखापत्तनम जिला अध्यक्ष के.के. राजू ने रविवार को बताया कि जगन मोहन रेड्डी सुबह 10:30 बजे विशाखापत्तनम एयरपोर्ट पहुंचेंगे और सीधे विशाखापत्तनम दक्षिण विधानसभा क्षेत्र के जब्बारपेट में लापता मछुआरों के घरों पर जाएंगे। वह हादसे में बचे अकेले व्यक्ति कारी चिन्ना और उनके परिवार के सदस्यों से भी मिलेंगे।

के.के. राजू ने इस त्रासदी पर असरदार ढंग से प्रतिक्रिया न देने के लिए राज्य सरकार की आलोचना की।

उन्होंने कहा कि हादसा तट से सिर्फ आठ नॉटिकल मील दूर हुआ था, फिर भी आधुनिक तकनीक होने के बावजूद बचाव दलों को घटनास्थल तक पहुंचने में लगभग 20 घंटे लग गए।

उन्होंने छह मछुआरों के लापता होने के लिए कोस्ट गार्ड, नेवी, मरीन पुलिस, मत्स्य विभाग और राजस्व विभाग के बीच तालमेल की कमी को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने लापता मछुआरों का पता चलने से पहले ही बचाव अभियान रोकने के राज्य सरकार के फैसले पर भी सवाल उठाए।

उन्होंने इस बात पर निराशा जताई कि संयुक्त विशाखापत्तनम जिले का प्रतिनिधित्व करने वाली गृह मंत्री वी. अनीता पीड़ितों से मिलने नहीं गईं।

उन्होंने मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू, उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण, आईटी मंत्री नारा लोकेश और कृषि मंत्री के. अच्चन्नायडू की भी इस त्रासदी पर चुप रहने के लिए आलोचना की।

उन्होंने राज्य सरकार पर कारी चिन्ना को बचाने का झूठा श्रेय लेने का आरोप लगाया और कहा कि मंत्रियों ने प्रभावित परिवारों की बात सुने बिना ही मुआवजे के चेक बांट दिए।

4 जुलाई को विशाखापत्तनम में गंगावरम तट से 10 नॉटिकल मील दूर सात मछुआरों को ले जा रही एक मशीनीकृत नाव पलट गई। मछली पकड़ने के लिए समुद्र में गए सात मछुआरों में से छह के मारे जाने की आशंका है।

मछुआरों ने 1 जुलाई को मछली पकड़ने के लिए यात्रा शुरू की थी। तट पर लौटते समय नाव पलट गई। उनमें से एक को मर्चेंट जहाज के चालक दल ने बचाया और उसे 6 जुलाई को तट पर लाया गया।

भारतीय नौसेना और कोस्ट गार्ड द्वारा चार दिन तक चले खोज और बचाव अभियान के बाद भी मछुआरों का पता नहीं चल सका। खोज अभियान 8 जुलाई को रोक दिया गया। राज्य सरकार ने छह मछुआरों के परिवारों को 10-10 लाख रुपए की अनुग्रह राशि बांटी।