Monday, July 13, 2026
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यूसीसी पर राष्ट्रीय बहस जरूरी, लेकिन पहले कांग्रेस अपना रुख स्पष्ट करे: प्रियंका चतुर्वेदी

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नई दिल्ली, 13 जुलाई (आईएएनएस)। शिवसेना (यूबीटी) नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने अयोध्या राम मंदिर के चढ़ावे में कथित हेराफेरी, समान नागरिक संहिता (यूसीसी), महाराष्ट्र के मंत्री नितेश राणे के बयान और जम्मू-कश्मीर की राजनीति, यूसीसी सहित कई अहम मुद्दों पर अपनी पार्टी का पक्ष रखा।

शिवसेना (यूबीटी) नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने अयोध्या राम मंदिर चढ़ावे में कथित हेराफेरी के मामले पर कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ लंबे समय से धर्म और राम मंदिर को लेकर अपनी भूमिका का प्रचार करता रहा है। यदि आरएसएस और विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) से जुड़े ट्रस्टियों की निगरानी में इस तरह की कथित अनियमितता हुई है, तो यह बेहद शर्मनाक है। यदि उत्तर प्रदेश सरकार का फैसला राजनीतिक प्रभाव से मुक्त होता तो मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से कराई जाती।

महाराष्ट्र के मंत्री नितेश राणे द्वारा विपक्ष को “औरंगजेब की औलाद” बताए जाने वाले बयान पर प्रियंका चतुर्वेदी ने प्रतिक्रिया देने से इनकार करते हुए कहा कि वे हर सुबह उठकर एक के बाद एक बेतुके बयान देते हैं। महाराष्ट्र सरकार में मंत्री होने के बावजूद उन्हें अपने पद की गरिमा का एहसास नहीं है और इसलिए वह इस विषय पर आगे कोई टिप्पणी नहीं करना चाहतीं।

समान नागरिक संहिता (यूसीसी) पर कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी के बयान के संबंध में प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि यह अच्छी बात है कि इस विषय पर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा हो रही है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि अधीर रंजन चौधरी को पहले यह स्पष्ट करना चाहिए कि यह कांग्रेस पार्टी का आधिकारिक रुख है या उनकी व्यक्तिगत राय। यूसीसी जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे पर जरूरत से ज्यादा राजनीति की गई है। दरअसल अधीर रंजन चौधरी ने कहा था कि यूसीसी को केंद्रीय स्तर पर लागू करना चाहिए और किसी भी समुदाय को हाशिए पर महसूस नहीं करना चाहिए।

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला द्वारा दिए गए “ऑपरेशन लोटस” संबंधी बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए चतुर्वेदी ने कहा कि उन्हें इस तरह के आरोपों पर कोई हैरानी नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा राजनीतिक अस्थिरता और अस्पष्ट परिस्थितियों का फायदा उठाती है तथा विधायकों के साथ “घोड़ों जैसा व्यवहार” करती है।

शिवसेना (यूबीटी) नेता ने कहा कि इससे जनता के जनादेश और लोकतांत्रिक मूल्यों की अनदेखी होती है। सत्ता में बने रहने के लिए भाजपा इस तरह की राजनीतिक रणनीतियां अपनाती है और इससे पार्टी की वास्तविक कार्यशैली सामने आती है।