Tuesday, July 14, 2026
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अखिलेश यादव पर आपत्तिजनक टिप्पणी मामले में निशिकांत दुबे को मानहानि का नोटिस : कृष्ण कन्हैया पाल

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लखनऊ, 14 जुलाई (आईएएनएस)। समाजवादी अधिवक्ता सभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं अधिवक्ता कृष्ण कन्हैया पाल ने भाजपा सांसद निशिकांत दुबे को भेजे गए मानहानि नोटिस को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि पूरा विवाद उस समय शुरू हुआ जब बालासुब्रमण्यम नामक व्यक्ति ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के संबंध में कथित रूप से आपत्तिजनक सामग्री साझा की। इसके बाद भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने उसी पोस्ट को व्यंग्यात्मक टिप्पणी के साथ रीपोस्ट किया।

समाजवादी अधिवक्ता सभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं अधिवक्ता कृष्ण कन्हैया पाल ने आईएएनएस से कहा कि वह समाजवादी पार्टी के फ्रंटल संगठन समाजवादी अधिवक्ता सभा के सदस्य होने के साथ-साथ संगठन में वरिष्ठ पद पर कार्यरत हैं। उनके अनुसार, किसी राजनीतिक दल और उसके राष्ट्रीय अध्यक्ष के बारे में अपमानजनक टिप्पणी करना भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के प्रावधानों के तहत मानहानि के दायरे में आता है। इसी आधार पर उन्होंने निशिकांत दुबे को कानूनी नोटिस भेजा।

उन्होंने कहा कि यदि निशिकांत दुबे यह सवाल उठा रहे हैं कि उनका व्यक्तिगत रूप से कैसे अपमान हुआ, तो उन्हें इस विषय पर अपने कानूनी विशेषज्ञों से सलाह लेनी चाहिए।

पाल का दावा है कि सांसद ने बाद में उनसे व्यक्तिगत रूप से माफी मांगी लेकिन दूसरी ओर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर समाजवादी पार्टी के करोड़ों कार्यकर्ताओं को “चापलूस” बताने और समाजवादी विचारधारा को अफवाह फैलाने वाली विचारधारा बताने का प्रयास किया।

एडवोकेट पाल ने आरोप लगाया कि निशिकांत दुबे ने उनकी पहचान, विशेषकर एक अधिवक्ता के रूप में उनकी गरिमा को लेकर भी टिप्पणी की, जिसके बाद उन्होंने अपने वकील के माध्यम से मानहानि का नोटिस भेजा। उन्होंने कहा कि यह मामला केवल व्यक्तिगत सम्मान का नहीं बल्कि राजनीतिक कार्यकर्ताओं और लोकतांत्रिक मूल्यों के सम्मान से भी जुड़ा हुआ है।

उन्होंने अपने बयान में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, वह स्वयं और अखिलेश यादव सभी पिछड़े वर्ग से आते हैं। सपा प्रमुख अखिलेश यादव का राजनीतिक संघर्ष भारतीय संविधान और सामाजिक न्याय के मूल्यों की रक्षा के लिए है। कृष्ण कन्हैया पाल ने कहा कि कानून सभी के लिए समान है और यदि किसी व्यक्ति या संगठन की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाई जाती है, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करना प्रत्येक नागरिक का अधिकार है।