नई दिल्ली, 15 जुलाई (आईएएनएस)। भाजपा सांसद मनोज तिग्गा ने संसद के आगामी मॉनसून सत्र, परिसीमन विधेयक को लेकर कांग्रेस के आरोपों पर टिप्पणी की। इसके अलावा, उन्होंने पश्चिम बंगाल में ओबीसी आरक्षण, पश्चिम मिदनापुर में पहली कक्षा के छात्र के साथ कथित यौन उत्पीड़न की घटना, 21 जुलाई को मनाए जाने वाले तृणमूल कांग्रेस के ‘शहीद दिवस’ और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से शिवसेना सांसदों की मुलाकात पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय हित से जुड़े मुद्दों पर सभी राजनीतिक दलों को राजनीति से ऊपर उठकर सहयोग करना चाहिए।
संसद के आगामी मॉनसून सत्र पर मनोज तिग्गा ने कहा कि केंद्र सरकार जो भी विधेयक संसद में लाती है, उसका उद्देश्य देश और जनता का हित होता है। उन्होंने विश्वास जताया कि सदन में आने वाले विधेयकों को सभी सांसदों के सहयोग से पारित कराया जाएगा। विपक्षी दलों के सांसदों से अपील करते हुए उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर सरकार का साथ देना चाहिए। संसद लोकतांत्रिक चर्चा का मंच है और देशहित के विधेयकों को समर्थन मिलना चाहिए।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम द्वारा यह आरोप लगाए जाने पर कि भाजपा परिसीमन विधेयक पारित कराने के लिए एनसीपी (शरद पवार गुट) और डीएमके जैसे दलों का समर्थन जुटाने का प्रयास कर रही है, मनोज तिग्गा ने कहा कि यदि कोई राजनीतिक दल देशहित में किसी विधेयक का समर्थन करता है तो उसमें कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी केवल भारत ही नहीं बल्कि वैश्विक स्तर पर भी एक प्रभावशाली नेता के रूप में स्थापित हुए हैं। यदि विभिन्न दल राष्ट्रीय हित को ध्यान में रखते हुए सरकार के साथ किसी विधेयक पर सहमति बनाते हैं, तो उसका स्वागत किया जाना चाहिए।
पश्चिम बंगाल में ओबीसी आरक्षण के मुद्दे पर भाजपा सांसद ने राज्य की तृणमूल कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने पहले बिना उचित सर्वेक्षण के कुछ वर्गों को ओबीसी सूची में शामिल किया था, जिससे पात्रता को लेकर विवाद उत्पन्न हुआ। भविष्य में जो भी निर्णय होगा, वह पूरी प्रक्रिया और आवश्यक विचार-विमर्श के आधार पर होना चाहिए ताकि वास्तविक पात्र लोगों को उनका अधिकार मिल सके।
पश्चिम मिदनापुर में पहली कक्षा के एक छात्र के साथ कथित यौन उत्पीड़न की घटना पर विपक्ष द्वारा सरकार की कार्रवाई पर सवाल उठाए जाने के संबंध में मनोज तिग्गा ने कहा कि ऐसे मामलों में राजनीति नहीं होनी चाहिए। अपराधी का कोई धर्म या जाति नहीं होती और ऐसे मामलों में किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाना चाहिए। यदि सरकार कार्रवाई नहीं करती है तो विपक्ष सवाल उठाता है और जब सरकार कार्रवाई करती है तब भी आलोचना की जाती है। यौन उत्पीड़न जैसे गंभीर अपराधों में दोषी पाए जाने वाले व्यक्ति को कानून के अनुसार कड़ी सजा मिलनी ही चाहिए।
पश्चिम बंगाल में 21 जुलाई को मनाए जाने वाले तृणमूल कांग्रेस के ‘शहीद दिवस’ कार्यक्रम पर मनोज तिग्गा ने कहा कि पार्टी के अंदरूनी मामलों पर फैसला तृणमूल कांग्रेस को स्वयं करना चाहिए। यदि पार्टी के भीतर विभिन्न गुटों के बीच मतभेद हैं, तो यह उनका आंतरिक विषय है कि कार्यक्रम का नेतृत्व कौन करेगा और आयोजन किस प्रकार होगा। भाजपा का इससे कोई लेना-देना नहीं है।
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के साथ कई सांसदों द्वारा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात किए जाने को लेकर उठे सवालों पर मनोज तिग्गा ने कहा कि अमित शाह देश के गृह मंत्री हैं और उनसे किसी भी दल के जनप्रतिनिधि मुलाकात कर सकते हैं। विभिन्न राज्यों और क्षेत्रों से जुड़े विकास कार्यों, प्रशासनिक विषयों या अन्य जनहित के मुद्दों को लेकर सांसद और जनप्रतिनिधि केंद्रीय मंत्रियों से मिलते रहते हैं। इसलिए ऐसी मुलाकातों को अनावश्यक राजनीतिक रंग नहीं दिया जाना चाहिए। लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनप्रतिनिधियों का सरकार के वरिष्ठ मंत्रियों से मिलना एक सामान्य प्रक्रिया है।

