Wednesday, July 22, 2026
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भारत के पहले निजी ऑर्बिटल रॉकेट ‘विक्रम-1’ की 18 जुलाई को ऐतिहासिक उड़ान, स्काईरूट रचेगा नया इतिहास

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नई दिल्ली, 16 जुलाई। भारत के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए 18 जुलाई का दिन ऐतिहासिक बनने जा रहा है। देश की अग्रणी निजी अंतरिक्ष कंपनी स्काईरूट एयरोस्पेस का पहला ऑर्बिटल लॉन्च व्हीकल ‘विक्रम-1’ शनिवार सुबह 11:30 बजे आंध्र प्रदेश के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र (एसडीएससी-शार) से अपनी पहली परीक्षण उड़ान भरेगा। यह पहली बार होगा जब किसी निजी भारतीय कंपनी द्वारा पूरी तरह डिजाइन और विकसित ऑर्बिटल श्रेणी का रॉकेट भारतीय धरती से अंतरिक्ष की ओर उड़ान भरेगा।

इस महत्वाकांक्षी अभियान को ‘मिशन आगमन’ नाम दिया गया है, जिसे वैश्विक अंतरिक्ष प्रक्षेपण सेवाओं के क्षेत्र में भारत के निजी अंतरिक्ष उद्योग के प्रवेश का प्रतीक माना जा रहा है। लॉन्च से पहले हवाई और समुद्री क्षेत्र के लिए आवश्यक सुरक्षा अधिसूचनाएं जारी कर दी गई हैं तथा रॉकेट के उड़ान मार्ग और संभावित प्रभाव क्षेत्र को प्रतिबंधित घोषित किया गया है।

सात मंजिला रॉकेट, अत्याधुनिक स्वदेशी तकनीक

करीब सात मंजिला ऊंचाई वाला विक्रम-1 एक बहु-चरणीय (मल्टी-स्टेज) ऑर्बिटल लॉन्च व्हीकल है। इसे पूरी तरह कार्बन कंपोजिट संरचना से तैयार किया गया है। इसमें स्काईरूट द्वारा विकसित अत्याधुनिक प्रणोदन प्रणाली का उपयोग किया गया है, जिसमें 3डी-प्रिंटेड इंजन और उच्च क्षमता वाले ठोस ईंधन रॉकेट बूस्टर शामिल हैं।

यह रॉकेट 350 किलोग्राम तक वजन वाले छोटे उपग्रहों को पृथ्वी की निचली कक्षा (लो अर्थ ऑर्बिट) में स्थापित करने में सक्षम है। इसकी पहली परीक्षण उड़ान का लक्ष्य 450 किलोमीटर की ऊंचाई पर 60 डिग्री झुकाव वाली कक्षा तक पहुंचना है।

कई पेलोड भी जाएंगे अंतरिक्ष

विक्रम-1 अपने साथ कई प्रौद्योगिकी प्रदर्शन पेलोड भी लेकर जाएगा। इनमें ग्राहा स्पेस, कॉसमोसर्व, डीक्यूब्ड और स्काईरूट के स्वयं के SCOPE प्लेटफॉर्म के पेलोड शामिल हैं। इसके अलावा कॉसमॉस डायमंड्स की कलाकृति ‘कॉस्मिक ब्लूम’ और एक माइक्रो-आर्ट पीस भी अंतरिक्ष में भेजी जाएगी।

“भारत के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक क्षण”

स्काईरूट एयरोस्पेस के सह-संस्थापक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी पवन कुमार चंदाना ने कहा कि विक्रम-1 के सभी ग्राउंड टेस्ट और तकनीकी परीक्षण सफलतापूर्वक पूरे कर लिए गए हैं। अब वास्तविक उड़ान परिस्थितियों में इसके प्रदर्शन का मूल्यांकन किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि यह परीक्षण उड़ान भविष्य में नियमित अंतरिक्ष प्रक्षेपण क्षमता विकसित करने की दिशा में मजबूत आधार तैयार करेगी। छोटे उपग्रहों के प्रक्षेपण के वैश्विक बाजार में बढ़ती मांग और सीमित आपूर्ति के बीच स्काईरूट के लिए यह बड़ा अवसर है।

हजार लोगों की मेहनत का परिणाम

कंपनी के सह-संस्थापक एवं मुख्य परिचालन अधिकारी नागा भरत डाका ने बताया कि यह मिशन केवल एक रॉकेट लॉन्च नहीं, बल्कि लगभग 1,000 विशेषज्ञों, 400 से अधिक आपूर्तिकर्ताओं और करीब 3,000 दिनों की लगातार मेहनत का परिणाम है।

उन्होंने कहा कि इस परीक्षण उड़ान से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर कंपनी अपनी तकनीक को और बेहतर बनाएगी तथा भारत से विश्वस्तरीय वाणिज्यिक प्रक्षेपण सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में आगे बढ़ेगी।

लॉन्च से पहले सभी तैयारियां पूरी

स्काईरूट के अनुसार विक्रम-1 के सभी चरणों का सफलतापूर्वक एकीकरण कर उसे लॉन्च पैड पर स्थापित किया जा चुका है। लॉन्च कंट्रोल सेंटर से अंतिम संयुक्त परीक्षण, टेलीमेट्री ग्राउंड स्टेशनों और ट्रैकिंग राडार के साथ इंटरफेस टेस्ट भी सफलतापूर्वक पूरे हो चुके हैं।

पहले भी बना चुका है इतिहास

यह स्काईरूट एयरोस्पेस का दूसरा अंतरिक्ष मिशन है। इससे पहले 18 नवंबर 2022 को कंपनी ने विक्रम-एस नामक सब-ऑर्बिटल रॉकेट का सफल प्रक्षेपण किया था, जो भारत की धरती से अंतरिक्ष तक पहुंचने वाला पहला निजी रॉकेट बना था। अब विक्रम-1 की उड़ान के साथ भारत निजी ऑर्बिटल लॉन्च क्षमता के एक नए युग में प्रवेश करने जा रहा है।