Wednesday, July 22, 2026
SGSU Advertisement
Home राष्ट्रीय सुरक्षित मातृत्व की दिशा में यूपी सरकार की बड़ी उपलब्धि, 16 जिलों...

सुरक्षित मातृत्व की दिशा में यूपी सरकार की बड़ी उपलब्धि, 16 जिलों में 100 फीसदी संस्थागत प्रसव

0
8

लखनऊ, 20 जुलाई (आईएएनएस)। उत्तर सरकार ने मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। प्रदेश के 16 जिलों में पिछले तीन महीनों के दौरान सभी प्रसव स्वास्थ्य संस्थानों में हुए हैं। इस अवधि में इन जिलों में एक भी गैरसंस्थागत (घर या अन्य स्थान पर) प्रसव दर्ज नहीं किया गया।

योगी सरकार की यह उपलब्धि सुरक्षित मातृत्व की दिशा में राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं की बढ़ती पहुंच, जनजागरूकता और स्वास्थ्य कर्मियों के समन्वित प्रयासों का परिणाम मानी जा रही है।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की मिशन निदेशक डॉ. पिंकी जोवेल ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का लक्ष्य प्रत्येक गर्भवती महिला को गुणवत्तापूर्ण मातृ स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है। इसी उद्देश्य से जिला महिला अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर प्रसूति सेवाओं को लगातार सुदृढ़ किया जा रहा है। आवश्यक उपकरणों, प्रशिक्षित मानव संसाधन और दवाओं की उपलब्धता बढ़ाने के साथ-साथ रेफरल व्यवस्था को भी मजबूत किया गया है।

उन्होंने उम्मीद जताई कि यदि इसी प्रकार संस्थागत प्रसव की दर लगातार बनी रहती है तो मातृ मृत्यु दर (एमएमआर) और नवजात मृत्यु दर (एनएमआर) में और अधिक कमी लाने में मदद मिलेगी। साथ ही सुरक्षित मातृत्व और स्वस्थ नवजात के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में उत्तर प्रदेश नई मिसाल कायम कर सकेगा।

एचएमआईएस से प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक गोरखपुर, देवरिया, आजमगढ़, वाराणसी, अमेठी, अयोध्या, सुलतानपुर, प्रतापगढ़, प्रयागराज, गाजीपुर, शामली, गाजियाबाद, हाथरस, इटावा, महोबा व कौशांबी में अप्रैल से जून के बीच एक भी प्रसव गैरसंस्थागत नहीं हुआ है। संयुक्त निदेशक डॉ. शालू गुप्ता ने बताया कि संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने के लिए पिछले कुछ वर्षों में निरंतर प्रयास किए गए हैं।

गर्भवती महिलाओं का समय पर पंजीकरण, नियमित प्रसव पूर्व जांच, उच्च जोखिम वाली गर्भावस्थाओं की पहचान, आशा कार्यकर्ताओं द्वारा घर-घर संपर्क, एम्बुलेंस सेवाओं की उपलब्धता तथा जननी सुरक्षा एवं मातृत्व लाभ से जुड़ी योजनाओं ने महिलाओं को स्वास्थ्य संस्थानों में प्रसव के लिए प्रेरित किया है।

वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. चंद्रावती का मानना है कि संस्थागत प्रसव मातृ एवं नवजात मृत्यु दर को कम करने का सबसे प्रभावी उपाय है। अस्पतालों में प्रशिक्षित डॉक्टरों और स्टाफ नर्सों की मौजूदगी, आपातकालीन प्रसूति सेवाएं, नवजात की तत्काल देखभाल, रक्त की उपलब्धता तथा आवश्यकता पड़ने पर रेफरल की व्यवस्था होने से जटिल परिस्थितियों में भी मां और शिशु की जान बचाने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार, यह उपलब्धि केवल स्वास्थ्य संस्थानों की क्षमता का परिणाम नहीं है, बल्कि समुदाय की बढ़ती जागरूकता और फ्रंटलाइन स्वास्थ्य कर्मियों की सतत मेहनत का भी प्रतिफल है। आशा, एएनएम और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने गर्भवती महिलाओं से नियमित संपर्क बनाए रखा, प्रसव की संभावित तिथि से पहले परिवारों को तैयार किया और समय पर अस्पताल तक पहुंच सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

–आईएएनएस

विकेटी/वीसी