अयोध्या, 20 जुलाई (आईएएनएस)। श्रीराम जन्मभूमि से जुड़े मामलों में निर्मोही अखाड़े ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। अखाड़े की ओर से दायर याचिका में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में अपनी भागीदारी को लेकर स्पष्टीकरण, ट्रस्ट के कामकाज का फोरेंसिक ऑडिट, जब्त की गई मूर्तियों की वापसी और ट्रस्ट की निगरानी के लिए व्यवस्था बनाने जैसी कई मांगें रखी गई हैं।
निर्मोही अखाड़े के वकील तरुणजीत वर्मा ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा, “अखाड़े की ओर से सुप्रीम कोर्ट में एम. सिद्दीक बनाम महंत सुरेश दास मामले में याचिका दाखिल की गई है। इस याचिका में कुल आठ मांगें रखी गई हैं। इनमें सबसे प्रमुख मांग सुप्रीम कोर्ट के 9 नवंबर 2019 के फैसले में दिए गए ‘उचित प्रतिनिधित्व’ के निर्देश को स्पष्ट करने की है।”
वकील तरुणजीत वर्मा के अनुसार, “सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में निर्मोही अखाड़े के प्रतिनिधि के रूप में महंत दिनेंद्र दास शामिल हैं। अखाड़ा अब यह स्पष्ट करना चाहता है कि ‘उचित प्रतिनिधित्व’ का वास्तविक अर्थ और दायरा क्या है। वर्तमान में महंत दिनेंद्र दास 15 सदस्यीय ट्रस्ट के ट्रस्टियों में शामिल हैं।”
याचिका में ट्रस्ट के वित्तीय और प्रशासनिक कामकाज की फोरेंसिक ऑडिट कराने की मांग भी की गई है। इसके अलावा अखाड़े ने मांग की है कि 5 जनवरी 1950 और 16 फरवरी 1982 को विवादित परिसर के अंदरूनी और बाहरी आंगन से जब्त की गई मूर्तियों को पूजा के लिए वापस किया जाए। यदि ऐसा संभव नहीं है तो अखाड़े को अपने स्तर पर पूजा करने की अनुमति दी जाए।
निर्मोही अखाड़े ने ट्रस्ट के कामकाज पर नजर रखने के लिए हाई कोर्ट के तहत एक निगरानी समिति गठित करने की मांग भी की है। अखाड़े का कहना है कि ऐसी व्यवस्था से ट्रस्ट के संचालन में पारदर्शिता बनी रहेगी और किसी भी तरह की अनियमितता होने पर उसे सुधारा जा सकेगा।
तरुणजीत वर्मा ने बताया कि ट्रस्ट में अखाड़े के प्रतिनिधि को लेकर अभी कोई बदलाव नहीं किया गया है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार यदि अखाड़े की ओर से नामित प्रतिनिधि की मृत्यु हो जाती है, इस्तीफा होता है या किसी अन्य कारण से पद खाली होता है, तो अखाड़ा तीन नामों का पैनल सुझाएगा। इनमें से एक नाम को ट्रस्ट का कोरम मंजूरी देकर नियुक्त कर सकता है। फिलहाल यह प्रक्रिया शुरू नहीं की गई है।
वहीं, निर्मोही अखाड़े ने महंत दिनेंद्र दास को मुख्य महंत पद से हटाने का भी निर्णय लिया है। वर्मा के मुताबिक, 5 जुलाई 2026 को अखाड़े ने कई कारणों का हवाला देते हुए यह प्रस्ताव पारित किया था। इसमें कथित तौर पर मनमाने तरीके से काम करने और अन्य लोगों की बात नहीं सुनने जैसे आरोप शामिल हैं। अब महंत दिनेंद्र दास केवल पंच की भूमिका में रहेंगे, मुख्य महंत के पद पर नहीं।
उन्होंने बताया कि गुजरात के डाकोर निवासी 102 वर्षीय राजा रामचंद्राचार्य जी को निर्मोही अखाड़े का नया मुख्य महंत बनाया गया है।

