Wednesday, July 22, 2026
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हूतियों की नई धमकी: सऊदी बंदरगाहों से कारोबार करने वाले जहाज बन सकते हैं निशाना

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सना, 21 जुलाई (आईएएनएस)। यमन के हूती विद्रोहियों ने अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों को चेतावनी दी है कि जो जहाज सऊदी अरब के बंदरगाहों के साथ कारोबार करेंगे, वे सैन्य कार्रवाई का निशाना बन सकते हैं। यह चेतावनी ऐसे समय आई है जब हूतियों ने सऊदी अरब के खिलाफ समुद्री नाकेबंदी का ऐलान किया है, जिसे हालात में एक नए तनाव के रूप में देखा जा रहा है।

यमन की राजधानी सना में मौजूद हूती समूह के ‘ह्यूमैनिटेरियन ऑपरेशंस कोऑर्डिनेशन सेंटर’ की ओर से भेजे गए एक ईमेल में कहा गया है कि यह चेतावनी सिर्फ सऊदी झंडे वाले जहाजों के लिए नहीं है, बल्कि उन सभी जहाजों पर भी लागू होगी जो सऊदी बंदरगाहों पर सामान लादते या उतारते हैं।

इटली की समाचार एजेंसी एडनक्रोनोस की जानकारी के अनुसार, ईमेल में शिपिंग कंपनियों से कहा गया है कि वे सऊदी बंदरगाहों से जुड़े किसी भी सफर की योजना बनाते समय पूरी सावधानी बरतें। चेतावनी दी गई है कि ऐसे कारोबारी कामों में शामिल जहाज हूतियों की मारक क्षमता के दायरे में आने पर हमले का निशाना बन सकते हैं।

यह चेतावनी हूतियों की ओर से सऊदी जहाजों के खिलाफ समुद्री नाकेबंदी की घोषणा के कुछ ही घंटों बाद आई। कुवैत और कतर समेत कई क्षेत्रीय देशों ने हूतियों के इस कदम को खारिज किया और अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत समुद्री आवाजाही की आजादी का समर्थन दोहराया। फिलहाल, इन नए ऐलानों के बाद किसी भी कारोबारी जहाज पर हमले की खबर सामने नहीं आई है।

यह घटनाक्रम हूतियों और सऊदी अरब के बीच फिर से बढ़ते तनाव के बीच सामने आया है। इसकी वजह हूतियों के नियंत्रण वाले सना अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का विवाद बताया जा रहा है। 13 जुलाई को सऊदी समर्थित यमनी सरकार ने कहा था कि उसने सना हवाई अड्डे के रनवे पर हमला किया ताकि ईरान से लौट रहा एक विमान वहां उतर न सके। बताया गया कि उस विमान में हूती नेताओं का एक अहम प्रतिनिधिमंडल था, जो ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के निधन पर आयोजित अंतिम संस्कार से वापस आ रहा था।

हूतियों ने इस हमले का जिम्मेदार सऊदी अरब को ठहराया और इसके जवाब में मिसाइलों और ड्रोन से सऊदी अरब की ओर हमले किए। इससे पहले भी हूती, गाजा युद्ध के दौरान इजराइल और अमेरिका से जुड़े होने का आरोप लगाकर कई जहाजों पर मिसाइल, ड्रोन और समुद्री हथियारों से हमले कर चुके हैं। इन हमलों की वजह से कई शिपिंग कंपनियों को लाल सागर का रास्ता छोड़कर दूसरे रास्तों से जहाजा भेजने पड़े, जबकि लाल सागर दुनिया के व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद अहम समुद्री मार्ग है।

इस नए घटनाक्रम से इलाके में समुद्री व्यापार और जहाजों की सुरक्षा को लेकर खतरा और बढ़ सकता है। यह सब ऐसे समय हो रहा है जब होर्मुज स्‍ट्रेट पर प्रभाव को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव भी बना हुआ है।

यमन साल 2014 के आखिर से संघर्ष की चपेट में है। उसी समय हूतियों ने राजधानी सना और देश के उत्तरी हिस्से के बड़े इलाके पर कब्जा कर लिया था। इसके बाद 2015 में सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन ने यमनी सरकार के समर्थन में सैन्य अभियान शुरू किया। हाल की घटनाओं ने इस बात की चिंता बढ़ा दी है कि 2022 में संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता से शुरू हुई तनाव कम करने की कोशिशें अब नाकाम हो सकती हैं।