नई दिल्ली, 22 जुलाई (आईएएनएस)। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 का आगाज 23 जुलाई से होने जा रहा है। इस बार टूर्नामेंट की मेजबानी स्कॉटलैंड का ग्लासगो शहर कर रहा है। भारत के कुल 125 एथलीट्स देश के लिए मेडल जीतने के इरादे से स्कॉटलैंड पहुंचे हैं। कॉमनवेल्थ गेम्स में खिलाड़ियों की उपलब्धियों के साथ हर बार कई तरह के विवाद सामने आते हैं। आइए आपको इन गेम्स से जुड़े कुछ बड़े विवादों से अवगत कराते हैं।
हसीन फकीरी की शर्मनाक हरकत: 2010 में भारत में आयोजित हुए कॉमनवेल्थ गेम्स के दौरान ऑस्ट्रेलियाई पहलवान हसीन फकीरी ने अपने बर्ताव की वजह से खूब सुर्खियां बटोरी थीं। फाइनल मैच में रेफरी के फैसले से नाखुश होने के बाद उन्होंने अश्लील इशारा किया था, जिसके चलते उन पर तुरंत बैन लगा दिया गया था। हसीन को फाइनल मैच से अयोग्य ठहराते हुए उन्हें मिलने वाला सिल्वर मेडल भी जब्त कर लिया गया था। इस विवाद के बाद हसीन को लिखित में माफी मांगनी पड़ी थी लेकिन विवाद के बाद वह दोबारा इंटरनेशनल स्टेज पर देश का प्रतिनिधित्व करने नहीं उतर सकी थीं।
कोरोना पॉजिटिव होने के बावजूद खेली थीं ताहिला मैक्ग्रा: कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 में महिला क्रिकेट के फाइनल मुकाबले में ताहिला मैक्ग्रा के खेलने पर खूब बवाल मचा था। दरअसल, ताहिला कोरोना पॉजिटिव थीं, लेकिन इसके बावजूद भी उन्हें मैदान पर उतरने की इजाजत दे दी गई थी। इस फैसले की काफी आलोचना हुई थी। फाइनल में भारतीय टीम को ऑस्ट्रेलिया के हाथों हार का सामना भी करना पड़ा था।
महिला रिले टीम से ले लिया था गोल्ड मेडल: कॉमनवेल्थ गेम्स 2006 के दौरान 4x 400 मीटर रेस में इंग्लैंड की महिला टीम ने गोल्ड मेडल को अपने नाम किया था। हालांकि, नियमों के उल्लंघन के चलते टीम को अयोग्य ठहरा दिया गया था और उनसे गोल्ड मेडल भी ले लिया था। इसके बाद ऑस्ट्रेलिया को गोल्ड मेडल दे दिया गया था। इस विवाद ने काफी सुर्खियां बटोरी थीं।
‘नो नीडल पॉलिसी’ के चलते भारतीय एथलीट भेजे गए स्वदेश: साल 2018 में गोल्ड कोस्ट में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स के दौरान नो नीडल पॉलिसी के उल्लंघन के कारण भारत के एथलीट राकेश बाबू और रेस वॉकर केटी इरफान को कॉमनवेल्थ गांव से बाहर करते हुए स्वदेश भेज दिया गया था। इन दोनों खिलाड़ियों के कमरे से सीरिंज मिले थे, जिसके कारण यह फैसला लिया गया था। नियमों के अनुसार, खिलाड़ियों को किसी भी तरह की सीरिंज, दवाई या पेनकिलर लेने पर पूरी तरह से रोक थी।
कॉमनवेल्थ गेम्स में घोटाला: कॉमनवेल्थ गेम्स 2010 के दौरान कई तरह के विवाद हुए थे, लेकिन गेम्स खत्म होने के बाद सामने आए घोटाले ने विश्व स्तर पर भारत की छवि को धूमिल करने का काम किया था। इस कॉमनवेल्थ गेम्स में लगभग 70 हजार करोड़ के घोटाले की बात सामने आई थी। सुरेश कलमाड़ी इस घोटाले में मुख्य आरोपी पाए गए थे और उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था।

