नई दिल्ली, 22 जुलाई (आईएएनएस)। महज 15 वर्षीय सलामी बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी पर दुनिया की निगाहें हैं। भारत और जिम्बाब्वे के बीच गुरुवार से तीन मुकाबलों की टी20 सीरीज हरारे में खेली जाएगी, जिसमें अंडर-19 सर्किट से सीनियर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कदम रखने वाले किशोर सूर्यवंशी के सामने खुद को साबित करने का मौका होगा।
हरारे स्पोर्ट्स क्लब में सूर्यवंशी नाबाद 175 रन बनाकर भारत को अंडर-19 वर्ल्ड कप फाइनल का खिताब जिता चुके हैं। ये वही मैदान है, जहां जिम्बाब्वे के लंबे और तेज गेंदबाजों जैसे ब्लेसिंग मुजरबानी और रिचर्ड नगारवा को सीम मूवमेंट और उछाल मिलती रही है। ये गेंदबाज शॉर्ट-पिच बॉलिंग से उनके हौसले की परीक्षा लेने के लिए तैयार हैं—ठीक वैसे ही जैसे जोफ्रा आर्चर ने किया था।
हालांकि, भारत के पूर्व स्पिनर मनिंदर सिंह का मानना है कि भले ही विरोधी टीमें इस किशोर बल्लेबाज की कमजोरियों को बारीकी से देखें और उन पर निशाना साधें, लेकिन सूर्यवंशी में स्वाभाविक प्रतिभा, कड़ी मेहनत करने की आदत और ऐसा सपोर्ट सिस्टम है जिससे वह हालात के हिसाब से खुद को ढाल सकते हैं और इंग्लैंड में अपने पहले तीन अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में बनाए गए कुल 42 रनों के मामूली स्कोर से आगे बढ़ सकते हैं।
भारत-जिम्बाब्वे के बीच टी20 सीरीज के ब्रॉडकास्टर ‘फैनकोड’ के जरिए हुई एक खास बातचीत में मनिंदर ने ‘आईएएनएस’ से कहा, “हां, लेकिन बात हालात की भी है। जब आप अंडर-19 खिलाड़ियों के साथ खेलने के बाद सीनियर खिलाड़ियों के साथ खेलना शुरू करते हैं, तो उस स्तर के हिसाब से वह बहुत ही बेहतरीन क्रिकेटर हैं। जब आप सीनियर खिलाड़ियों के साथ खेलना शुरू करते हैं, और इंग्लैंड जैसे हालात हों जहां थोड़ी उछाल हो, तो कुछ कमजोरियां जरूर सामने आती हैं जिन्हें अंतरराष्ट्रीय टीमें पकड़ लेती हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि आजकल बहुत सारे वीडियो देखे जाते हैं और कमजोरियां खोजने की कोशिश की जाती है। तो, यह सिलसिला चलता रहेगा, और अब जब आपने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलना शुरू कर दिया है, तो लोग यह भी सोचेंगे कि यह 15 साल का खिलाड़ी कैसे रन बनाएगा। तो, आप देखेंगे कि गेंदबाज उन्हें मात देने के लिए थोड़ी ज्यादा कोशिश करेंगे।”
मनिंदर, सूर्यवंशी को एक असाधारण टैलेंट मानते हैं जो हालात के हिसाब से ढलने का अपना तरीका ढूंढ लेंगे। उन्हें उम्मीद है कि सूर्यवंशी इस समस्या को ऐसे ही नहीं छोड़ेंगे, बल्कि इस पर सक्रिय रूप से काम करना शुरू करेंगे।
उन्होंने कहा, “वैभव बहुत प्रतिभाशाली हैं। वह इस हालात में खुद को ढालने का अपना तरीका खोज लेंगे। मुझे लगता है कि वह इस दिशा में काम करना भी शुरू कर देंगे। उनके साथ फायदा यह है कि कोच उन पर लगातार नजर रखते हैं। पिता भी उनके साथ रहते हैं। इसलिए, उनकी कमजोरियां भी पता चल जाएंगी और उन पर काम शुरू हो जाएगा। अगर कोई माता-पिता अपने बच्चे को 8-9-10 साल की उम्र से क्रिकेट की ट्रेनिंग देना शुरू करते हैं, और वह 15 साल की उम्र में भारत के लिए खेलते हैं, तो एक बात तो पक्की है: बच्चा प्रतिभाशाली है। दूसरी बात यह है कि उनके साथ बहुत मेहनत की गई है। तीसरी बात, जो मैं आने वाले समय में देखता हूं, वह यह है कि वैभव इंटरनेशनल क्रिकेट खेलते हुए अपनी कमजोरियों पर काम करना शुरू कर देंगे।”

