नई दिल्ली, 23 जुलाई (आईएएनएस)। हिंदू धर्म में पंचांग का काफी महत्व होता है। कोई शुभ काम, यात्रा, निवेश या पूजा-पाठ करने से पहले पंचांग जरूर देखा जाता है। पंचांग हिंदू काल-गणना पद्धति है जो सूर्य, चंद्रमा और अन्य ग्रहों की स्थिति पर आधारित है।
24 जुलाई 2026 को आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि सुबह 9:13 बजे तक है। इसके बाद एकादशी तिथि लग जाएगी। शुक्रवार को देवशयनी एकादशी सुबह 9:13 बजे शुरू होगी और 25 जुलाई 2026 को सुबह 11:35 बजे समाप्त होगी। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करना फलदाई होगा।
इस दिन सुबह 5:58 बजे सूर्योदय और शाम 7:08 बजे सूर्यास्त होगा। वहीं दोपहर 3:11 बजे चन्द्रोदय और रात 1:54 बजे चन्द्रास्त होगा। पंचांग के अनुसार, 24 जुलाई 2026 को सूर्य पुष्य नक्षत्र में स्थित रहेगा, जबकि चंद्रमा सुबह 4:37 तक विशाखा नक्षत्र रहेगा। इसके बाद अनुराधा नक्षत्र में संचार करेगा।
शुक्रवार को हर्षण योग प्रभावी नहीं रहेगा। रात 8:10 बजे तक शुक्ल योग रहेगा, इसके बाद ब्रह्म योग शुरू होगा। शुक्रवार को अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:07 से 12:59 बजे तक रहेगा। यह दिन का सबसे शुभ समय माना जाता है। मान्यता है कि इस दौरान बिना किसी राहुकाल या अन्य अशुभ समय की चिंता किए कोई भी महत्वपूर्ण कार्य, पूजा या व्यापार शुरू किया जा सकता है।
वहीं, राहुकाल सुबह 10:45 से दोपहर 12:27 बजे तक और गुलिक काल सुबह 7:20 बजे से 9:02 बजे तक रहेगा। इसके अलावा यमगंड काल दोपहर 3:30 से 5:06 बजे तक रहेगा। पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, इन समयों में नए कार्य शुरू करने से बचना चाहिए, क्योंकि इसे अशुभ समय माना जाता है।
शुक्रवार को इस दिन सूर्य कर्क राशि में स्थित रहेगा, जबकि चंद्रमा वृश्चिक राशि में स्थित रहेगा। पश्चिम दिशा में दिशाशूल रहेगा। ज्योतिष और वास्तु के मुताबिक, इस दिशा में यात्रा करने से बचना चाहिए। यदि यात्रा करना अनिवार्य हो, तो कुछ विशेष ज्योतिषीय उपायों को अपनाकर प्रस्थान किया जा सकता है।

