Thursday, July 23, 2026
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नीट पेपर लीक पर ठाकरे भाइयों का केंद्र पर हमला, 26 जुलाई को संयुक्त मार्च का ऐलान

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मुंबई, 23 जुलाई (आईएएनएस)। शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे ने गुरुवार को संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस कर नीट पेपर लीक मामले और दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस कार्रवाई को लेकर केंद्र की एनडीए सरकार पर तीखा हमला बोला। दोनों नेताओं ने 26 जुलाई को मुंबई में संयुक्त विरोध मार्च निकालने की घोषणा की।

उद्धव और राज ठाकरे ने कहा कि यह विरोध मार्च 26 जुलाई (रविवार) को शिवाजी पार्क (शिवतीर्थ) से सिद्धिविनायक मंदिर तक निकाला जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह मार्च पूरी तरह गैर-राजनीतिक होगा और इसमें किसी भी राजनीतिक दल का झंडा नहीं, बल्कि केवल तिरंगा ही रहेगा।

राज ठाकरे ने कहा कि नीट पेपर लीक मामले में जवाबदेही तय होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यह मामला अब केवल केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान तक सीमित नहीं है, बल्कि इसकी जिम्मेदारी सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक जाती है।

उन्होंने महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री आर.आर. पाटिल के 26/11 मुंबई आतंकी हमले के बाद दिए गए इस्तीफे का उल्लेख करते हुए कहा कि जवाबदेही की परंपरा शीर्ष स्तर से शुरू होनी चाहिए।

राज ठाकरे ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने किसानों के आंदोलन, मणिपुर हिंसा और लद्दाख आंदोलन की तरह ही छात्रों की आवाज भी अनसुनी की है। उन्होंने कहा, “पहले किसान मर रहे थे, अब छात्र आत्महत्या करने को मजबूर होंगे। यह सत्ता का कैसा अहंकार है कि सरकार किसी की बात सुनने को तैयार नहीं है?”

उन्होंने कहा कि यदि केंद्र सरकार ने नीट पेपर लीक को लेकर छात्रों से बातचीत की होती, तो सोनम वांगचुक का अनशन और कॉकरोच जनता पार्टी का आंदोलन जैसी स्थिति पैदा नहीं होती।

राज ठाकरे ने कहा कि उनका विरोध प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहेगा। हालांकि, यदि दिल्ली की तरह किसी ने रैली में घुसपैठ कर माहौल बिगाड़ने की कोशिश की, तो उनके कार्यकर्ता उसका कड़ा जवाब देंगे।

वहीं, उद्धव ठाकरे ने दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस कार्रवाई की निंदा करते हुए आरोप लगाया कि छात्राओं को कीलों वाले डंडों से पीटा गया और उनके कपड़े तक फाड़ दिए गए। उन्होंने सवाल उठाया कि सादे कपड़ों में मौजूद लोगों को पुलिस के डंडे कैसे सौंप दिए गए।

उद्धव ठाकरे ने न्यायपालिका की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि अदालतों के पास आवारा पशुओं और कबूतरों जैसे छोटे मामलों के लिए समय है, लेकिन सरकारी दबाव झेल रहे छात्रों को समय पर न्याय नहीं मिल रहा।

उन्होंने केंद्र सरकार को “निर्दयी” बताते हुए देशवासियों और सभी राजनीतिक दलों से छात्रों के भविष्य की रक्षा के लिए आगे आने की अपील की।

दोनों नेताओं ने कहा कि इस विरोध मार्च में छात्र, अभिभावक, महाविकास आघाड़ी (एमवीए) के सहयोगी दलों सहित विपक्षी नेता और छात्रों के भविष्य को लेकर चिंतित सभी नागरिक शामिल हो सकते हैं।