ग्लासगो, 23 जुलाई (आईएएनएस)। ओलंपिक में देश के लिए रजत पदक जीतने वाली दिग्गज वेटलिफ्टर साइखोम मीराबाई चानू ने कहा है कि वह कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में लोगों की उम्मीदों पर खरा उतरने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। उन्होंने कहा कि हमारी संख्या बेशक कम है, लेकिन पूरी टीम पदक जीतने के लिए कड़ी मेहनत कर रही है।
मीराबाई ने कहा कि वेटलिफ्टिंग कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत के लिए पदक जीतने की सबसे बड़ी उम्मीदों में से एक बनकर उभरा है।
आईएएनएस से बात करते हुए मीराबाई ने कहा, “इस बार वेटलिफ्टिंग में ज्यादा पदक आने की उम्मीदें हैं। हम सभी बहुत कड़ी मेहनत कर रहे हैं। हमारी टीम अच्छा प्रदर्शन कर रही है। हम पदक जीतेंगे या नहीं, यह तो इवेंट वाले दिन ही पता चलेगा, लेकिन हम अपनी पूरी कोशिश करेंगे। हम अपना श्रेष्ठ प्रदर्शन करेंगे। मैं भी अपना श्रेष्ठ प्रदर्शन करूंगी।”
हालांकि, मीराबाई ने गेम्स के इस संस्करण में वेटलिफ्टिंग में हिस्सा लेने वाले एथलीटों की कम संख्या पर चिंता जताई।
उन्होंने कहा, “इस बार अलग-अलग जगहों से इतने सारे प्रतिभागियों को देख बहुत अच्छा लग रहा है। एक बुरी बात यह है कि एथलीटों की संख्या कम है। यह खेल के लिए अच्छा नहीं है। एक तरफ से यह अच्छी बात नहीं है। लेकिन जो भी हिस्सा लेने आए हैं, सभी देश के लिए अपना श्रेष्ठ प्रदर्शन करेंगे।”
कॉमनवेल्थ गेम्स मीराबाई के करियर का सबसे सफल मल्टी-स्पोर्ट इवेंट रहा है। उन्होंने ग्लासगो 2014 में अपने कॉमनवेल्थ डेब्यू पर रजत पदक जीता था। इसके बाद 2018 में गोल्ड कोस्ट में कॉमनवेल्थ गेम्स में मीराबाई ने स्वर्ण पदक जीता था। बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 में भी मीराबाई ने स्वर्ण पदक जीता था। इस सफलता के बाद वह कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास में भारत की सबसे सफल वेटलिफ्टर्स में से एक बन गईं।
मीराबाई पेरिस 2024 ओलंपिक की निराशा को भी पीछे छोड़ने की कोशिश करेंगी, जहां महिलाओं के 49 किग्रा श्रेणी में वह बहुत कम अंतर से पदक जीतने से चूक गई थीं।
उस कैंपेन को याद करते हुए उन्होंने कहा, “ओलंपिक की तैयारी के दौरान, मैं भारी ट्रेनिंग का बोझ नहीं झेल पा रही थी। जब भी मैं ट्रेनिंग का लोड बढ़ाती, तो दर्द की वजह से मुझे ट्रेनिंग रोकनी पड़ती थी। मेरी चोट पूरी तरह ठीक नहीं हुई थी, इसलिए मैं अपना पूरा जोर नहीं लगा पा रही थी। नतीजतन, मैंने अपनी योजना से बहुत कम ट्रेनिंग किया और शायद इसीलिए मैं वैसा प्रदर्शन नहीं कर पाई।”
मीराबाई ने टोक्यो ओलंपिक में 49 किग्रा वर्ग में रजत पदक जीतकर वेटलिफ्टिंग में ओलंपिक पदक का भारत का 21 साल का इंतजार समाप्त किया था। इस ऐतिहासिक उपलब्धि ने उन्हें भारत की महानतम वेटलिफ्टरों में से एक और उभरते हुए एथलीटों के लिए एक रोल मॉडल के तौर पर स्थापित किया।

