नई दिल्ली, 24 जुलाई (आईएएनएस)। भारत में ऑफिस स्पेस की मांग में ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (जीसीसी) की हिस्सेदारी दो वर्षों में करीब 50 प्रतिशत होने की उम्मीद है, जिससे ग्लोबल इनोवेशन हब के रूप में देश की स्थिति और मजबूत होगी। यह जानकारी शुक्रवार को जारी एक रिपोर्ट में दी गई।
कोलियर्स की रिपोर्ट के अनुसार, 2026 और 2027 में भारत में ग्रेड-ए ऑफिस स्पेस की कुल लीजिंग मांग में जीसीसी की हिस्सेदारी 45-50 प्रतिशत रहने का अनुमान है। इस दौरान सालाना लीजिंग 3.5 से 4 करोड़ वर्ग फुट तक पहुंच सकती है।
रिपोर्ट के मुताबिक, 2021 से अब तक जीसीसी ने देश के सात प्रमुख शहरों में करीब 11.8 करोड़ वर्ग फुट ग्रेड-ए ऑफिस स्पेस लीज पर लिया है, जो इस अवधि के दौरान कुल ऑफिस स्पेस मांग का 37 प्रतिशत है।
सिर्फ 2026 की पहली छमाही में ही जीसीसी ने 1.66 करोड़ वर्ग फुट ग्रेड-ए ऑफिस स्पेस लीज पर लिया, जो लिए गए कुल ग्रेड-ए ऑफिस स्पेस का 46 प्रतिशत रहा।
रिपोर्ट के अनुसार, भारत में जीसीसी अब केवल पारंपरिक बैक-ऑफिस संचालन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), इंजीनियरिंग, एनालिटिक्स, रिसर्च एंड डेवलपमेंट (आरएंडडी) और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन के रणनीतिक केंद्र बन चुके हैं।
कोलियर्स इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर (ऑफिस सर्विसेज) अर्पित मेहरोत्रा ने कहा, “भारत ने प्रतिभा, लागत दक्षता, तकनीकी क्षमता, नीतिगत समर्थन और अनुकूल कारोबारी माहौल के दम पर जीसीसी आधारित नवाचार के वैश्विक केंद्र के रूप में खुद को मजबूती से स्थापित किया है।”
उन्होंने कहा कि बहुराष्ट्रीय कंपनियां भारत में अपने कैपेबिलिटी सेंटर का विस्तार जारी रखेंगी और एआई आधारित इनोवेशन ऑफिस स्पेस की मांग का प्रमुख चालक बना रहेगा।
क्षेत्रवार देखें तो 2021 से अब तक जीसीसी लीजिंग में टेक्नोलॉजी सेक्टर की हिस्सेदारी सबसे अधिक 39 प्रतिशत रही।
हालांकि, रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि अब विविधीकरण तेजी से बढ़ रहा है। बैंकिंग, वित्तीय सेवाएं और बीमा (बीएफएसआई) क्षेत्र की हिस्सेदारी 22 प्रतिशत रही, जबकि इंजीनियरिंग और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर का योगदान 16 प्रतिशत रहा।
2021 से 2025 के बीच बीएफएसआई सेक्टर की लीजिंग लगभग तीन गुना बढ़ी, जबकि इंजीनियरिंग और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की लीजिंग 2.5 गुना से अधिक बढ़ी।
शहरों के लिहाज से बेंगलुरु और हैदराबाद जीसीसी बाजार में सबसे आगे रहे। 2021 से अब तक कुल लीजिंग में इन दोनों शहरों की संयुक्त हिस्सेदारी 60 प्रतिशत से अधिक रही।
हालांकि, अब मांग का दायरा भी तेजी से बढ़ रहा है और चेन्नई, पुणे, मुंबई तथा दिल्ली-एनसीआर में भी बहुराष्ट्रीय कंपनियां नए कैपेबिलिटी सेंटर स्थापित करने में बढ़ती रुचि दिखा रही हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि एआई-नेटिव जीसीसी, नैनो और मिड-साइज जीसीसी एवं ‘हब-प्लस-वन’ रणनीति के तहत टियर-2 और टियर-3 शहरों तक परिचालन का विस्तार आने वाले वर्षों में जीसीसी क्षेत्र की वृद्धि के अगले चरण को आकार देगा।

