पुरी, 24 जुलाई (आईएएनएस)। भगवान जगन्नाथ, बड़े भाई बलभद्र और बहन देवी सुभद्रा की बहुड़ा यात्रा शुक्रवार को पूरे धार्मिक उत्साह और भक्ति के माहौल में शुरू हुई। नौ दिनों तक श्री गुंडिचा मंदिर में विराजमान रहने के बाद अब तीनों देवता अपने मूल धाम श्रीमंदिर की ओर लौट रहे हैं। शुक्रवार सुबह पारंपरिक पूजा-अर्चना के साथ यात्रा की शुरुआत हुई। इस दौरान बड़ी संख्या में भक्त पहुंचे। वहीं, भक्तों की संख्या को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था के भी खास इंतजाम किए गए हैं।
बहुड़ा यात्रा के अवसर पर आध्यात्मिक गुरु इंद्रेश जी महाराज भी पुरी पहुंचे। उन्होंने भगवान जगन्नाथ के दर्शन किए और भक्ति भाव से भजन गाया।
यात्रा में शामिल संत बाबा भैरबानंद सरस्वती ने कहा कि भगवान जगन्नाथ वर्षभर मंदिर में विराजमान रहते हैं लेकिन साल में एक बार बाहर निकलकर स्वयं अपने भक्तों को दर्शन देते हैं। यही इस यात्रा की सबसे बड़ी विशेषता है। उन्होंने कहा कि श्रीमंदिर में प्रवेश सभी लोगों को नहीं मिल पाता लेकिन जब भगवान स्वयं रथ पर सवार होकर बाहर आते हैं तो हर जाति, हर वर्ग और हर धर्म का व्यक्ति उनके दर्शन कर सकता है। यही भगवान जगन्नाथ की मानव लीला है, जो पूरी दुनिया को समानता और करुणा का संदेश देती है।
उन्होंने बताया कि वे वर्ष 1996 से लगातार रथ यात्रा और बहुड़ा यात्रा में शामिल हो रहे हैं और भगवान को दीप, धूप तथा अगरबत्ती अर्पित करते हैं। उनके अनुसार भगवान को अर्पित की जाने वाली यह विशेष अगरबत्ती करीब 12 फीट लंबी होती है, जिसे विशेष रूप से तैयार कराया जाता है। उन्होंने कहा कि भगवान के चरणों में दीप-धूप अर्पित करने से आत्मिक शांति और आनंद की अनुभूति होती है।
यात्रा को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने के लिए भारतीय रेड क्रॉस सोसाइटी के स्वयंसेवक भी पूरी निष्ठा के साथ सेवा में जुटे हैं। सेवा प्रशिक्षक जयंती महापात्रा ने कहा कि सेवा करना उनका कर्तव्य ही नहीं बल्कि भगवान जगन्नाथ की कृपा है। उन्होंने बताया कि वर्षों से सेवा करते हुए उन्हें कभी थकान महसूस नहीं होती। इतनी बड़ी भीड़ के बीच लोगों की मदद करना, उन्हें सुरक्षित रास्ता दिखाना और जरूरत पड़ने पर सहायता पहुंचाना ही उनके जीवन का उद्देश्य बन गया है।
उन्होंने युवाओं को संदेश देते हुए कहा कि आज का दौर डिजिटल जरूर है लेकिन सबसे पहले संस्कार, अनुशासन और सेवा की भावना जरूरी है। उनका कहना है कि जो व्यक्ति निस्वार्थ भाव से सेवा करता है, भगवान की कृपा अपने आप उस पर बनी रहती है। उन्होंने सभी से अपील की कि वे भगवान के प्रति श्रद्धा रखें और दूसरों की मदद करने की भावना विकसित करें।
रेड क्रॉस की एफएमआर स्वयंसेवक मधुमिता महापात्रा ने बताया कि वह पिछले 38 वर्षों से सेवा कार्य से जुड़ी हुई हैं। उन्होंने कहा कि रथ यात्रा के दौरान उनकी टीम घायल या बीमार श्रद्धालुओं को प्राथमिक उपचार देती है, जरूरत पड़ने पर स्ट्रेचर के जरिए सुरक्षित स्थान तक पहुंचाती है और रेस्क्यू कार्य भी करती है। उनके अनुसार मानव सेवा ही सबसे बड़ी ईश्वर सेवा है। उन्होंने कहा कि हर सुबह उन्हें सिर्फ यही उत्साह रहता है कि जल्दी से सेवा स्थल पहुंचकर लोगों की मदद कर सकें। उन्होंने प्रार्थना की कि इस बार की बहुड़ा यात्रा पूरी तरह सुरक्षित रहे और एक भी दुर्घटना न हो।
बहुड़ा यात्रा के दौरान सुरक्षा और आपदा प्रबंधन के लिए प्रशासन ने भी व्यापक इंतजाम किए हैं। ओडिशा अग्निशमन एवं आपदा प्रबंधन विभाग के निदेशक रमेश चंद्र माझी ने बताया कि भारी बारिश या भीड़ की किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पहले से पूरी तैयारी कर ली गई है। नगर निगम और प्रशासन की टीमें लगातार जल निकासी, मार्गों की निगरानी और भीड़ प्रबंधन पर काम कर रही हैं ताकि श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशानी न हो।
उन्होंने बताया कि रथ यात्रा शुरू होने से पहले ही विशेष बचाव दलों की तैनाती कर दी गई थी। पूरे मार्ग पर 38 स्थानों पर विशेष व्यवस्था की गई है, जबकि 25 क्विक रिस्पॉन्स टीमों में करीब 125 प्रशिक्षित जवान तैनात किए गए हैं। ये टीमें किसी श्रद्धालु के गिरने, तबीयत बिगड़ने या अन्य आपात स्थिति में तुरंत सहायता उपलब्ध करा रही हैं। उन्होंने बताया कि अब तक सैकड़ों लोगों को तत्काल मदद पहुंचाई जा चुकी है और अधिकांश लोगों को अस्पताल तक ले जाने की जरूरत भी नहीं पड़ी।
रमेश चंद्र माझी ने श्रद्धालुओं से अपील की कि वे अनावश्यक रूप से भीड़ के बीच जाने से बचें और प्रशासन के निर्देशों का पालन करें। उन्होंने कहा कि भगवान दूर से भी सभी भक्तों की प्रार्थना स्वीकार करते हैं, इसलिए सुरक्षा को प्राथमिकता देना भी उतना ही जरूरी है।
कर्नाटक से पहली बार पुरी पहुंचीं श्रद्धालु ऋषिका आर्या ने कहा कि पिछले तीन वर्षों से उनकी इच्छा थी कि वह रथ यात्रा में शामिल हों और इस बार उन्हें ऐसा महसूस हुआ जैसे स्वयं भगवान जगन्नाथ ने उन्हें बुलाया हो। उन्होंने कहा कि मंदिर में हर किसी को प्रवेश नहीं मिलता, लेकिन बहुड़ा यात्रा के दौरान भगवान स्वयं बाहर आकर सभी को दर्शन देते हैं। यही इस यात्रा की सबसे बड़ी विशेषता है।
उन्होंने बताया कि वह मूल रूप से एक दूसरे काम से हैदराबाद गई थीं, लेकिन परिस्थितियां ऐसी बनीं कि वह भुवनेश्वर पहुंच गईं और फिर पुरी आने का अवसर मिल गया। उनके अनुसार पूरा अनुभव इतना भावुक और आध्यात्मिक रहा कि उसे शब्दों में बयां करना मुश्किल है। उन्होंने कहा कि भीड़ को लेकर उन्हें पहले डर था, लेकिन भगवान की कृपा से सब कुछ सहजता से हुआ और उन्हें दर्शन का सौभाग्य प्राप्त हुआ। उन्होंने कहा कि उनके मन में केवल कृतज्ञता है और वह इस अनुभव को जीवनभर नहीं भूल पाएंगी।

