Friday, July 24, 2026
SGSU Advertisement
Home राजनीति छात्रों की आवाज दबाने के बजाय उनकी मांगें माने सरकार: विपक्ष

छात्रों की आवाज दबाने के बजाय उनकी मांगें माने सरकार: विपक्ष

0
5

नई दिल्ली, 24 जुलाई (आईएएनएस)। दिल्ली के जंतर-मंतर छात्र आंदोलन और हालिया पुलिस कार्रवाई को लेकर विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। नगीना से सांसद चंद्रशेखर, समाजवादी पार्टी के सांसद जिया उर रहमान और राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) की सांसद मीसा भारती ने सरकार से छात्रों की मांगों पर जवाब देने और पुलिस कार्रवाई की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।

विपक्षी नेताओं का कहना है कि छात्रों की आवाज सुनने के बजाय उन पर बल प्रयोग किया गया, जो लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।

नगीना सांसद चंद्रशेखर ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा, “जिस लाठी का इस्तेमाल आतंकवादियों, गुंडों और अपराधियों के खिलाफ होना चाहिए था, वह छात्रों और पत्रकारों पर चलाई गईं। यह कार्रवाई देश के भविष्य पर हमला है। यदि संसद सुचारू रूप से चल रही होती तो वह वहीं सरकार से जवाब मांगते, लेकिन सदन में कामकाज प्रभावित होने के कारण उन्हें बाहर अपनी बात रखनी पड़ रही है।”

उन्होंने सवाल उठाया, “जिन पुलिसकर्मियों ने छात्रों के साथ कथित तौर पर मारपीट की, उनके खिलाफ अब तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं हुई? पुलिस ने किसके निर्देश पर यह कार्रवाई की और सरकार इस पूरे मामले पर चुप क्यों है?”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पेपर लीक के दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का भरोसा देने वाले वीडियो पर प्रतिक्रिया देते हुए चंद्रशेखर ने कहा, “यदि प्रधानमंत्री छात्रों से पहले संवाद करते तो हालात इस स्तर तक नहीं पहुंचते। देर रात जारी वीडियो से स्पष्ट है कि सरकार आंदोलन पर नजर रखे हुए थी, लेकिन समय रहते संवाद स्थापित किया जाता तो टकराव से बचा जा सकता था।”

चंद्रशेखर ने सोनम वांगचुक द्वारा भूख हड़ताल समाप्त किए जाने का स्वागत करते हुए उनके बेहतर स्वास्थ्य की कामना की। हालांकि उन्होंने कहा कि कई महत्वपूर्ण सवाल अब भी अनुत्तरित हैं। उन्होंने पूछा कि छात्रों को मुआवजा देने की घोषणा किस आधार पर की गई और क्या सरकार ने इस संबंध में कोई आधिकारिक आदेश या पत्र जारी किया है। उनके अनुसार सरकार को इस विषय पर स्पष्ट स्थिति सामने रखनी चाहिए।

समाजवादी पार्टी के सांसद जिया उर रहमान ने भी सोनम वांगचुक के अनशन समाप्त करने का स्वागत किया। उन्होंने कहा, “यह सकारात्मक कदम है, लेकिन छात्र और युवा अपनी मूल मांगों से पीछे नहीं हटे हैं। सरकार उनकी मांगों पर गंभीरता से चर्चा करने के बजाय उन्हें नजरअंदाज कर रही है। विपक्ष का दायित्व है कि वह छात्रों की आवाज संसद और जनता के बीच उठाए तथा सरकार से जायज मांगों को स्वीकार करने की अपील करे।”

वहीं, आरजेडी सांसद मीसा भारती ने कहा, “अब सभी की नजर प्रधानमंत्री के अगले कदम पर है। लंबे समय तक विरोध-प्रदर्शन और भूख हड़ताल के बाद प्रधानमंत्री ने पहली बार इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया दी है। सरकार का यह आरोप कि विपक्ष आंदोलन को हवा दे रहा है, तथ्यात्मक रूप से सही नहीं है। किसी भी राजनीतिक दल ने इस आंदोलन का नेतृत्व नहीं किया, बल्कि विपक्ष केवल छात्रों के समर्थन में खड़ा है।”

मीसा भारती ने आंदोलन को विदेशी फंडिंग मिलने के आरोपों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा, “जब भी देश में कोई बड़ा जन आंदोलन होता है, सरकार उस पर बाहरी ताकतों के प्रभाव या विदेशी फंडिंग का आरोप लगाकर उसे कमजोर करने की कोशिश करती है। छात्रों की मांगों पर गंभीरता से विचार करना और लोकतांत्रिक तरीके से समाधान निकालना ही इस पूरे विवाद का सबसे उचित रास्ता है।”