Saturday, July 25, 2026
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भारत बन सकता है माइनिंग और कंस्ट्रक्शन उपकरण निर्माण का वैश्विक हब, सीआईआई-बीसीजी रिपोर्ट ने पेश किया रोडमैप

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नई दिल्ली, 25 जुलाई (आईएएनएस)। भारत का माइनिंग और कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट उद्योग आने वाले वर्षों में वैश्विक स्तर पर बड़ी ताकत बन सकता है। इसी दिशा में भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) और बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप (बीसीजी) ने संयुक्त रूप से “प्रेसिंग द थ्रॉटल: हाउ इंडियाज माइनिंग एंड कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट इंडस्ट्री कैन सपोर्ट डोमेस्टिक एम्बिशंस एंड बिकम अ ग्लोबल फोर्स” नाम से एक रिपोर्ट जारी की है।

इस रिपोर्ट में भारत को माइनिंग और कंस्ट्रक्शन उपकरणों के निर्माण और निर्यात का वैश्विक केंद्र बनाने के लिए विस्तृत रणनीति पेश की गई है।

रिपोर्ट में भारत के माइनिंग और कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट सेक्टर का व्यापक आकलन किया गया है। साथ ही घरेलू विनिर्माण को मजबूत करने, नई तकनीकों को तेजी से अपनाने, स्थानीयकरण बढ़ाने, वैश्विक प्रतिस्पर्धा मजबूत करने और भारत को इस क्षेत्र में पसंदीदा मैन्युफैक्चरिंग एवं एक्सपोर्ट हब बनाने के लिए स्पष्ट रोडमैप दिया गया है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि देश के दीर्घकालिक विकास लक्ष्यों को हासिल करने में माइनिंग और कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट सेक्टर की महत्वपूर्ण भूमिका होगी।

सीआईआई के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी ने कहा कि माइनिंग और कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट सेक्टर भारत की आधारभूत संरचना और औद्योगिक विकास की महत्वाकांक्षाओं का अहम हिस्सा है। इस क्षेत्र की अगली विकास यात्रा के लिए उद्योग और सरकार के बीच मजबूत सहयोग, अधिक निवेश, नवाचार, कौशल विकास और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस पर विशेष ध्यान देना होगा। यह रिपोर्ट भविष्य के लिए मजबूत, प्रतिस्पर्धी और तकनीक आधारित माइनिंग और कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट सेक्टर तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण सुझाव देती है।

रिपोर्ट के अनुसार, भारत का माइनिंग और कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट उद्योग दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते बाजारों में शामिल हो चुका है। वर्तमान में इस उद्योग का अनुमानित आकार 17 अरब अमेरिकी डॉलर है और इसमें हर साल 10 से 12 प्रतिशत की वृद्धि होने का अनुमान है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि सड़क, रेलवे, बंदरगाह, हवाई अड्डे, शहरी बुनियादी ढांचे, खनन और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में लगातार बढ़ रहे निवेश के कारण माइनिंग और कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट से जुड़े क्षेत्रों में पूंजीगत व्यय 2025 में लगभग 5.5 लाख करोड़ रुपए से बढ़कर 2030 तक 9 से 10 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच सकता है।

रिपोर्ट यह भी बताती है कि भारत में मशीनीकरण का स्तर अभी भी वैश्विक औसत से काफी कम है। इसका मतलब है कि भविष्य में आधुनिक उपकरणों की मांग, उत्पादकता और नई तकनीकों को अपनाने की अपार संभावनाएं मौजूद हैं।

सीआईआई माइनिंग एंड कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट डिवीजन के चेयरमैन विवेक भाटिया ने कहा कि ‘विकसित भारत’ का सपना विश्वस्तरीय आधारभूत संरचना, मजबूत विनिर्माण और आधुनिक खनन क्षेत्र के दम पर ही साकार होगा। माइनिंग और कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट उद्योग इस परिवर्तन का प्रमुख आधार बनेगा। सीआईआई-बीसीजी की यह रिपोर्ट घरेलू निर्माण को मजबूत करने, स्थानीयकरण बढ़ाने, नवाचार को प्रोत्साहन देने और भारत को वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग एवं एक्सपोर्ट हब बनाने की रणनीति प्रस्तुत करती है।

वहीं, बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप के मैनेजिंग डायरेक्टर एवं पार्टनर अभिषेक भाटिया ने कहा कि भारत का माइनिंग और कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट उद्योग एक महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़ा है। जैसे-जैसे बुनियादी ढांचे में निवेश बढ़ रहा है और ऑटोमेशन, इलेक्ट्रिफिकेशन तथा कनेक्टेड इक्विपमेंट जैसी नई तकनीकें तेजी से उद्योग को बदल रही हैं। भारतीय निर्माताओं के पास वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी क्षमता विकसित करने और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भारत की स्थिति मजबूत करने का सुनहरा अवसर है।