चेन्नई, 25 जुलाई (आईएएनएस)। तमिलनाडु का लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) राज्य भर की सैकड़ों हेरिटेज इमारतों को बहाल करने, उन्हें संरक्षित करने और उनका कमर्शियल इस्तेमाल करने की एक बड़ी योजना बना रहा है। इसका मकसद इन इमारतों की आर्किटेक्चरल विरासत को बचाना और साथ ही टिकाऊ तरीके से कमाई करके इनके लंबे समय तक रखरखाव को सुनिश्चित करना है।
अधिकारियों के अनुसार, तमिलनाडु में पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेंट के कंट्रोल में 264 हेरिटेज इमारतें हैं। ये इमारतें चोल, नायक और दक्षिण भारत के दूसरे राज्यों के साथ-साथ मुगल और ब्रिटिश औपनिवेशिक काल के समय की हैं।
इनमें से कई इमारतें आर्किटेक्चर के नजरिए से अहम हैं और राज्य के सांस्कृतिक और प्रशासनिक इतिहास के जरूरी हिस्सों को दिखाती हैं।
चेन्नई में सबसे ज्यादा 58 हेरिटेज इमारतें हैं। इसके बाद कोयंबटूर में 20, तंजावुर में 17 और कन्याकुमारी, मदुरै और सलेम में 12-12 इमारतें हैं। पुदुक्कोट्टई में ऐसी 10 इमारतें हैं, जबकि तिरुप्पुर और तिरुवन्नामलाई में 9-9 इमारतें हैं।बाकी जिलों में डिपार्टमेंट की देखरेख में एक या दो हेरिटेज इमारतें हैं।
इनमें से ज्यादातर इमारतों का इस्तेमाल अभी सरकारी डिपार्टमेंट जैसे कि स्वास्थ्य और परिवार कल्याण, न्यायपालिका, उच्च शिक्षा और राजस्व विभाग कर रहे हैं, हालांकि ठीक से रखरखाव न होने और संरक्षण पर ध्यान देने वाले मैनेजमेंट की कमी के कारण कई इमारतें खराब हालत में हैं।
पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेंट के एक सीनियर अधिकारी ने कहा कि इन ऐतिहासिक इमारतों का इस्तेमाल करने वाले कई सरकारी डिपार्टमेंट को इनके हेरिटेज महत्व के बारे में पता नहीं है। समय के साथ इनमें किए गए स्ट्रक्चरल बदलाव, आधुनिक चीजें जोड़ने और खराब रखरखाव के कारण इनका असली आर्किटेक्चरल स्वरूप खराब हो गया है।
डिपार्टमेंट ने मरम्मत के लिए सबसे ज्यादा खराब हालत वाली इमारतों की पहचान करना शुरू कर दिया है और संरक्षण के कामों के लिए काफी फंड भी तय कर दिया है।
अधिकारियों का मानना है कि सिर्फ इमारतों की मरम्मत करके उन्हें सरकारी दफ्तरों को वापस सौंपने से वे और ज्यादा खराब हो सकती हैं।
इसके बजाय, राज्य सरकार मरम्मत की गई हेरिटेज प्रॉपर्टीज को टूरिज्म एसेट में बदलने के विकल्पों पर विचार कर रही है, ताकि उनसे कमाई भी हो सके और उनका ऐतिहासिक महत्व भी बना रहे।
टूरिज्म डिपार्टमेंट के साथ ऐसे सही प्रोजेक्ट्स की पहचान करने के लिए बातचीत चल रही है जो पर्यटकों को आकर्षित कर सकें और कमर्शियल गतिविधियों के जरिए नियमित रखरखाव सुनिश्चित कर सकें।
अगर टूरिज्म डिपार्टमेंट इन प्रॉपर्टीज की जिम्मेदारी नहीं लेता है, तो पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेंट मरम्मत की गई जगहों पर लाइट-एंड-साउंड शो, हेरिटेज इंटरप्रिटेशन सेंटर, कैफे और पर्यटकों के लिए दूसरी सुविधाएं शुरू करने जैसे दूसरे मॉडलों पर विचार कर रहा है।
अधिकारियों ने कहा कि इस पहल का मकसद हेरिटेज संरक्षण और आर्थिक स्थिरता के बीच संतुलन बनाना है, ताकि तमिलनाडु की ऐतिहासिक इमारतें आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रहें और उपेक्षित स्मारकों के बजाय जीवंत सार्वजनिक स्थल बनी रहें।

