रांची, 27 जुलाई (आईएएनएस)। झारखंड प्रदेश भाजपा ने राज्य के कथित ट्रेजरी घोटाले को लेकर हेमंत सोरेन सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पार्टी की प्रदेश इकाई के मुख्य प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने सोमवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि सरकार झारखंड कोषागार संहिता, 2016 और वित्तीय नियमों के विपरीत अपने चहेते अधिकारियों को बचाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सीआईडी इस मामले में निष्पक्ष जांच करने के बजाय सरकार की ‘एजेंसी ऑफ चॉइस’ बन गई है।
प्रतुल शाहदेव ने कहा कि राज्य के वित्त मंत्री स्वयं स्वीकार कर चुके हैं कि पिछले कुछ वर्षों के दौरान करीब 10,000 करोड़ रुपये के सरकारी धन का हिसाब नहीं मिल रहा है। इसके बावजूद जांच में बड़े अधिकारियों को बचाया जा रहा है और केवल निचले स्तर के कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा कि भाजपा शुरू से आशंका जताती रही है कि सरकार अपने पसंदीदा अधिकारियों को बचाने में लगी है।
उन्होंने कहा कि ट्रेजरी घोटाले की जांच के लिए गठित एसआईटी में ऐसे अधिकारियों को शामिल किया गया, जो उन जिलों में पुलिस अधीक्षक रह चुके थे, जहां कथित घोटाले से संबंधित चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है। ऐसे अधिकारियों से निष्पक्ष जांच की उम्मीद नहीं की जा सकती। भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि चारा घोटाले के मामलों में सीबीआई अदालत ने ट्रेजरी अधिकारियों की भूमिका को भी दोषी मानते हुए सजा सुनाई थी, जिसे बाद में हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने भी बरकरार रखा। वर्तमान मामले में सीआईडी ने आरोपपत्र दाखिल करते समय डीडीओ और ट्रेजरी अधिकारियों को क्लीनचिट दे दी, जबकि झारखंड वित्त नियमावली और झारखंड कोषागार संहिता में सरकारी धन की निकासी के संबंध में उनकी स्पष्ट जिम्मेदारी तय की गई है।
उन्होंने कहा कि झारखंड वित्त नियमावली की विभिन्न धाराओं तथा झारखंड कोषागार संहिता, 2016 के प्रावधानों के अनुसार डीडीओ और ट्रेजरी अधिकारियों का दायित्व है कि वे बिल, दस्तावेजों और हस्ताक्षरों की वैधता की जांच करें तथा किसी भी संदेह की स्थिति में भुगतान रोककर जांच करें। इसके बावजूद सीआईडी ने उन्हें जांच के दायरे से बाहर रखा है।
भाजपा प्रवक्ता ने यह भी आरोप लगाया कि चाईबासा ट्रेजरी घोटाले में भी सीआईडी ने केवल निचले स्तर के कर्मचारियों को आरोपी बनाया जबकि वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका की अनदेखी की गई। उन्होंने कहा कि राज्य में जिन मामलों की लीपापोती करनी होती है, उन्हें सीआईडी के हवाले कर दिया जाता है।
प्रतुल शाहदेव ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने ट्रेजरी घोटाले की विशेष ऑडिट के लिए आवश्यक दस्तावेज भी समय पर उपलब्ध नहीं कराए। उन्होंने कहा कि प्रिंसिपल अकाउंटेंट जनरल ने 11 मई 2026 को गृह विभाग की अपर मुख्य सचिव से 87 प्रकार के दस्तावेज मांगे थे लेकिन ढाई महीने बीत जाने के बाद भी सरकार ने उन्हें उपलब्ध नहीं कराया। उत्पाद सचिव के नेतृत्व में गठित एसआईटी ने भी अब तक अपनी जांच रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की है।
–आईएएनएस
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