पटना, 27 जुलाई (आईएएनएस)। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) को और अधिक मजबूत बनाने और पेपर लीक जैसी घटनाओं पर रोक लगाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार द्वारा विशेषज्ञ समिति के गठन का स्वागत करते हुए पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (पीएमसीएच) की प्रिंसिपल इंचार्ज डॉ. मधु सिन्हा ने इसे शिक्षा व्यवस्था को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा कि यदि इस दिशा में प्रभावी कार्रवाई होती है तो योग्य और मेहनती छात्रों को उनका वास्तविक हक मिल सकेगा।
आईएएनएस से बातचीत में डॉ. मधु सिन्हा ने कहा कि सरकार का यह प्रयास बेहद सराहनीय है। पिछले कई वर्षों से परीक्षा प्रणाली में कई तरह की कमियां और लूपहोल्स मौजूद थे, जिन्हें सभी समझते थे, लेकिन उन्हें पूरी तरह रोक पाना संभव नहीं हो पा रहा था। नई विशेषज्ञ समिति इन कमियों की पहचान कर उन्हें दूर करने में सफल होगी। कई बार प्रतिष्ठित संस्थानों में भी ऐसे छात्र प्रवेश पा जाते हैं, जिनकी शैक्षणिक योग्यता पर गंभीर सवाल उठते हैं। ऐसे मामलों को देखकर काफी पीड़ा होती है क्योंकि इसका सबसे बड़ा नुकसान उन प्रतिभाशाली और मेहनती छात्रों को उठाना पड़ता है, जो पूरी ईमानदारी से परीक्षा की तैयारी करते हैं। ऐसे कई योग्य छात्रों को अपनी पसंद के क्षेत्र में अवसर नहीं मिल पाता और मजबूरी में उन्हें दूसरे व्यवसाय या अन्य क्षेत्रों का रुख करना पड़ता है।
डॉ. सिन्हा ने कहा कि चिकित्सा शिक्षा और मेडिकल प्रोफेशन केवल डिग्री हासिल करने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह सीधे तौर पर मरीजों के जीवन और मृत्यु से जुड़ा हुआ क्षेत्र है। इसलिए मेडिकल कॉलेजों में केवल वही छात्र प्रवेश पाने चाहिए जिनमें वास्तविक योग्यता हो और जो ईमानदारी से डॉक्टर बनने की इच्छा रखते हों। यदि विषय की पर्याप्त समझ और ज्ञान के बिना लोग डॉक्टर बनेंगे तो इससे भारतीय चिकित्सा व्यवस्था और भारतीय डॉक्टरों की वैश्विक प्रतिष्ठा पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। आज भारतीय डॉक्टरों की क्लिनिकल समझ और दक्षता का पूरी दुनिया में सम्मान किया जाता है और इस स्तर को बनाए रखना बेहद जरूरी है। उन्होंने विश्वास जताया कि सरकार द्वारा जिन विशेषज्ञों को इस समिति में शामिल किया गया है, वे निश्चित रूप से प्रभावी सुझाव देंगे और परीक्षा प्रणाली में व्याप्त अनियमितताओं को समाप्त करने की दिशा में ठोस काम करेंगे।
पेपर लीक के खिलाफ प्रस्तावित सख्त कानून पर डॉ. मधु सिन्हा ने कहा कि पहली नजर में प्रस्तावित जुर्माने की राशि बड़ी लग सकती है, लेकिन यदि पेपर लीक के जरिए करोड़ों रुपये का अवैध कारोबार होता है तो ऐसे मामलों में भारी आर्थिक दंड जरूरी है। यदि दोषियों पर एक-दो बार कड़ी वित्तीय कार्रवाई होगी तो स्वतः ही लोगों में कानून का डर पैदा होगा और इस तरह के अपराधों में कमी आएगी।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि कई देशों में सार्वजनिक स्थानों पर कूड़ा फेंकने जैसे छोटे अपराधों पर भी भारी जुर्माना लगाया जाता है, जिससे लोग नियमों का पालन करने के लिए बाध्य होते हैं। भारत में भी जब तक आर्थिक दंड और सख्त कानूनी कार्रवाई का प्रभावी प्रावधान नहीं होगा, तब तक ऐसे अपराधों पर पूरी तरह अंकुश लगाना कठिन रहेगा। शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता बनाए रखने और योग्य छात्रों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए पेपर लीक के खिलाफ कठोर कानून समय की आवश्यकता है।

