नई दिल्ली, 17 जुलाई (आईएएनएस)। केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय में राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष विभाग में राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने सोमवार को लोक सभा में लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 प्रस्तुत किया।
इस संशोधन विधेयक का उद्देश्य लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 के प्रावधानों को और मजबूत करना है। इसके तहत त्वरित जांच, विशेष फास्ट-ट्रैक अदालतों के माध्यम से त्वरित सुनवाई, विशेष लोक अभियोजकों की नियुक्ति, अपीलों का समयबद्ध निपटान और अधिक कठोर दंड प्रावधानों की व्यवस्था की गई है, ताकि लोक परीक्षाओं में अनुचित साधनों और संगठित गड़बड़ियों को प्रभावी तरीके से रोका जा सके।
हाल के वर्षों में प्रश्न-पत्र लीक होने और परीक्षा से जुड़ी संगठित गड़बड़ियों की घटनाओं को देखते हुए, मौजूदा कानूनी ढांचे को मजबूत करने के लिए ये प्रस्तावित संशोधन लाए गए हैं। इनका उद्देश्य अधिक जवाबदेही तय करना, ऐसे अपराधों के खिलाफ सख्त रोक लगाना और लोक परीक्षाओं की शुचिता बनाए रखना है।
इस विधेयक में अनुचित साधनों का इस्तेमाल करने वालों के लिए सजा बढ़ाने का प्रस्ताव है। इसके तहत जेल की सजा को कम से कम तीन वर्ष, जिसे पांच वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है, के मौजूदा प्रावधान से बढ़ाकर कम से कम पांच वर्ष, जिसे दस वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है, करने का प्रस्ताव है। इसके साथ ही, अधिकतम जुर्माना भी 10 लाख रुपए से बढ़ाकर 50 लाख रुपए करने का प्रस्ताव है।
इस अधिनियम के तहत अपराधों में शामिल पाए जाने वाले सेवा प्रदाताओं के लिए, विधेयक में अधिकतम जुर्माना 1 करोड़ रुपए से बढ़ाकर 5 करोड़ रुपए करने और उन्हें कोई भी लोक परीक्षा आयोजित करने से प्रतिबंधित करने की अवधि को चार वर्ष से बढ़ाकर आठ वर्ष करने का प्रस्ताव है।
इस विधेयक में सेवा प्रदाताओं के प्रबंधकीय कर्मियों के लिए कड़ी सजा का भी प्रस्ताव है। इसमें कम से कम पांच वर्ष और अधिक से अधिक दस वर्ष तक की जेल की सजा और अधिकतम जुर्माना 1 करोड़ रुपए से बढ़ाकर 5 करोड़ रुपए करने का प्रावधान है।
इस संशोधन विधेयक में परीक्षा से जुड़े संगठित अपराधों से बेहतर तरीके से निपटने के लिए जेल की कम से कम सजा को पांच वर्ष से बढ़ाकर सात वर्ष, जिसे दस वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है, करने और अधिकतम जुर्माना 1 करोड़ रुपए से बढ़ाकर 10 करोड़ रुपए करने का प्रस्ताव है।
यह विधेयक केंद्र सरकार को यह अधिकार भी देता है कि वह इस अधिनियम के तहत अपराधों की जांच का कार्य इस उद्देश्य के लिए गठित विशेष कार्य बल को सौंप सकता है।
त्वरित जांच और सुनवाई सुनिश्चित करने के लिए विधेयक में एक नई धारा 12क अंत:स्थापित करने का प्रस्ताव है। इसमें दो माह के भीतर जांच पूरी करने, इस अधिनियम के तहत अपराधों की दैनिक सुनवाई के लिए सत्र न्यायालय को विशेष फास्ट ट्रैक अदालत के तौर पर नामित करने, आरोप पत्र दाखिल होने की तारीख से तीन माह के अंदर सुनवाई पूरी करने और प्रत्येक विशेष फास्ट ट्रैक अदालत के लिए विशेष लोक अभियोजकों की नियुक्ति का प्रावधान है।
इस विधेयक में एक नई धारा 12ख अंत:स्थापित करने का भी प्रस्ताव है, जिसमें यह प्रावधान है कि विशेष फास्ट ट्रैक अदालत के किसी निर्णय, आदेश या सजा के खिलाफ अपील तीस दिनों की अवधि के भीतर उच्च न्यायालय के समक्ष की जा सकती है और जहां संभव हो, तीन माह के भीतर उसका निपटान किया जाना चाहिए।

