नई दिल्ली, 28 जुलाई (आईएएनएस)। संसद में पेपर लीक के मुद्दे पर जारी चर्चा के बीच भारतीय जनता पार्टी के सांसद अरविंद धर्मपुरी ने एंटी-पेपर लीक बिल का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि इस कानून से छात्रों के हितों की रक्षा करने और भविष्य में परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी एवं विश्वसनीय बनाने की उम्मीद है। उन्होंने संसद में चर्चा के दौरान विपक्ष के हंगामे पर राहुल गांधी की आलोचना की।
उन्होंने कहा कि स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इस बात पर जोर दे चुके हैं कि परीक्षा प्रणाली में ऐसे सुधार किए जाने चाहिए, जिससे भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
अरविंद धर्मपुरी ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में कहा कि नीट परीक्षा के पेपर लीक होने से देशभर में लगभग 20 लाख छात्र प्रभावित हुए थे। उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस मुद्दे पर लगातार सरकार को घेर रही है, लेकिन उसे पहले अपने शासन वाले राज्यों में किए गए वादों पर भी जवाब देना चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने वर्ष 2023 में तेलंगाना में फीस रीइम्बर्समेंट (फीस वापसी) योजना को दोबारा प्रभावी ढंग से लागू करने का वादा किया था। धर्मपुरी ने कहा, यह योजना अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक तथा आर्थिक रूप से कमजोर सामान्य वर्ग के छात्रों के लिए शुरू की गई थी और अविभाजित आंध्र प्रदेश में करीब 20 वर्ष पहले इसकी शुरुआत हुई थी। उन्होंने कहा कि यह एक प्रतिष्ठित योजना थी, जिसे पूर्व मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव (केसीआर) की सरकार के दौरान बंद कर दिया गया।
भाजपा सांसद ने दावा किया कि उस समय फीस रीइम्बर्समेंट योजना के तहत करीब आठ हजार करोड़ का बकाया था। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी ने हैदराबाद आकर यह आश्वासन दिया था कि बकाया राशि का भुगतान किया जाएगा और योजना को प्रभावी रूप से लागू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार बनने के बाद भी यह वादा पूरा नहीं हुआ और अब बकाया राशि बढ़कर लगभग 12 हजार करोड़ रुपए तक पहुंच गई है। कई कॉलेजों के सामने संचालन का संकट खड़ा हो गया है।
अरविंद धर्मपुरी ने यह भी कहा कि तेलंगाना में हर वर्ष करीब 20 लाख युवा स्नातक और इंजीनियरिंग की परीक्षाएं देते हैं, लेकिन उनके भविष्य के लिए कोई ठोस दिशा दिखाई नहीं दे रही है। उन्होंने कांग्रेस सरकार से चुनावी वादों को पूरा करने की मांग करते हुए कहा कि राज्य के युवाओं को रोजगार और शिक्षा के क्षेत्र में स्पष्ट नीति की आवश्यकता है।
उन्होंने राज्य में रोजगार के मुद्दे को भी उठाते हुए कहा कि तेलंगाना में अब तक कोई नियमित जॉब कैलेंडर लागू नहीं किया गया है। उनका आरोप था कि केसीआर सरकार के 10 वर्षों के कार्यकाल में अधिकांश समय जॉब कैलेंडर नहीं रहा और पिछले लगभग 11 से 12 वर्षों में राज्य में बड़े पैमाने पर सरकारी भर्ती प्रक्रिया प्रभावी ढंग से संचालित नहीं हुई। उन्होंने कहा कि युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया और समयबद्ध रोजगार कैलेंडर लागू किया जाना आवश्यक है।

