नई दिल्ली, 29 जुलाई (आईएएनएस)। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के बयान को लेकर सियासी विवाद तेज हो गया है। राहुल गांधी के बयान पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के कई सांसदों और नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की और उनके आरोपों को तथ्यहीन, भ्रामक और असंसदीय बताया। कई नेताओं ने राहुल गांधी से सदन और देश से माफी मांगने की मांग भी की।
भाजपा सांसद जनार्दन सिंह सिग्रीवाल ने राहुल गांधी की आलोचना करते हुए कहा कि उनके बयान पूरी तरह झूठे, बेबुनियाद और तथ्यों से परे हैं। किसी भी जिम्मेदार जनप्रतिनिधि को बिना प्रमाण के ऐसे आरोप नहीं लगाने चाहिए। राहुल गांधी ने सदन को गुमराह करने के साथ-साथ देश को भी भ्रमित करने की कोशिश की है। गोली चलाने का आदेश किसी मंत्री द्वारा नहीं बल्कि मजिस्ट्रेट द्वारा दिया जाता है और राहुल गांधी को इस बुनियादी प्रक्रिया की जानकारी होनी चाहिए।
भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर ने राहुल गांधी पर छात्रों के लिए कथित तौर पर ‘इडियट’ शब्द के इस्तेमाल को लेकर निशाना साधा। उन्होंने कहा, “यदि राहुल गांधी ने छात्रों के लिए इस शब्द का इस्तेमाल किया है तो उन्हें देश के युवाओं से माफी मांगनी चाहिए। छात्रों का अपमान किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता।”
भाजपा सांसद मयंकभाई नायक ने कहा, “राहुल गांधी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बारे में सदन में जो टिप्पणियां कीं, वे बेहद निंदनीय हैं। विपक्ष के नेता जैसे संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति को किसी भी प्रशासनिक कार्रवाई और उससे जुड़ी कानूनी प्रक्रिया की पूरी जानकारी होनी चाहिए।”
भाजपा सांसद मदन राठौड़ ने भी राहुल गांधी की आलोचना करते हुए कहा कि वे पहले भी कई बार सार्वजनिक रूप से माफी मांग चुके हैं। राहुल गांधी को अपने वर्तमान बयान के लिए भी सदन और देश से माफी मांगनी चाहिए।
भाजपा सांसद नरेश बंसल ने आरोप लगाया, “राहुल गांधी ने संबंधित विधेयक पर चर्चा के बजाय अपने राजनीतिक एजेंडे को आगे बढ़ाने का प्रयास किया। भाषण के दौरान कई असंसदीय शब्दों का इस्तेमाल किया गया, जिससे सदन की कार्यवाही प्रभावित हुई।”
केंद्रीय राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे ने कहा, “राहुल गांधी के पास उठाने के लिए कोई ठोस मुद्दा नहीं बचा है। राहुल गांधी बिना तथ्यों के बयान देते हैं और उनके वक्तव्यों में गंभीरता का अभाव दिखाई देता है।”
भाजपा सांसद भोला सिंह ने कहा, “किसी भी मामले में जांच की मांग करना अलग बात है, लेकिन बिना सबूत सीधे आरोप लगाना लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुरूप नहीं है। राहुल गांधी का उद्देश्य विधेयक पर रचनात्मक चर्चा करना नहीं बल्कि विवाद पैदा करना था। विपक्ष के नेता को बोलने के लिए पर्याप्त समय दिया गया था, लेकिन उन्होंने जिस भाषा का इस्तेमाल किया, वह संसदीय गरिमा के अनुरूप नहीं थी।”
भाजपा सांसद कमलजीत सहरावत ने कहा, “राहुल गांधी ने अपने भाषण की शुरुआत विधेयक पर चर्चा से नहीं की, बल्कि काल्पनिक परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए जंतर-मंतर पर मौजूद छात्रों का अलग-अलग तरीके से वर्णन किया। यह विधेयक पर गंभीर चर्चा से ध्यान भटकाने का प्रयास था।”
भाजपा सांसद धर्मशीला गुप्ता ने कहा, “राहुल गांधी की यह पुरानी शैली रही है कि संसद सत्र के दौरान वे ऐसे बयान देते हैं, जिनसे अनावश्यक विवाद पैदा होता है।”
केंद्रीय राज्य मंत्री एस. पी. सिंह बघेल ने कहा, “विपक्ष के नेता का पद अत्यंत जिम्मेदारी वाला होता है और इस पद पर बैठे व्यक्ति से संयमित एवं मर्यादित भाषा की अपेक्षा की जाती है। संसदीय बहस तथ्यों और तर्कों पर आधारित होनी चाहिए, न कि व्यक्तिगत आरोपों और असंसदीय शब्दों पर।”
तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) के सांसद कृष्णा प्रसाद तेनेटी ने भी राहुल गांधी के भाषण पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा, “राहुल गांधी ने कई बार ‘इडियट’ शब्द का प्रयोग किया, जो असंसदीय शब्दों की श्रेणी में आता है। केंद्रीय गृह मंत्री पर गोली चलाने का आदेश देने का आरोप लगाना तथ्यात्मक रूप से गलत है।”
जनता दल (यूनाइटेड) के सांसद देवेश चंद्र ठाकुर ने भी उनके द्वारा इस्तेमाल की गई भाषा पर आपत्ति जताते हुए कहा कि संसद जैसे सर्वोच्च लोकतांत्रिक मंच पर मर्यादित भाषा का प्रयोग होना चाहिए।

