नई दिल्ली, 31 जुलाई (आईएएनएस)। उज्बेकिस्तान के विदेश मंत्री सैदोव बख्तियार ओडिलोविच 2 से 5 अगस्त तक आधिकारिक यात्रा पर भारत आएंगे। विदेश मंत्रालय (एमईए) के अनुसार, इस यात्रा के दौरान ओडिलोविच राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से राष्ट्रपति भवन में मुलाकात करेंगे और विदेश मंत्री एस. जयशंकर से भी बातचीत करेंगे।
इसके अलावा, वह दिल्ली में आयोजित होने वाले एक बिजनेस फोरम में भी हिस्सा लेंगे।
यात्रा कार्यक्रम के अनुसार, सैदोव बख्तियार ओडिलोविच 2 अगस्त को रात्रि 10:45 बजे नई दिल्ली स्थित इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा (टर्मिनल-3) पहुंचेंगे। इसके बाद 3 अगस्त को सुबह 10:20 बजे राष्ट्रपति भवन में भारत की राष्ट्रपति से शिष्टाचार भेंट करेंगे। इसके बाद सुबह 11:30 बजे वह बिजनेस फोरम में भाग लेंगे। फिर उसी दिन शाम को 6:00 बजे विदेश मंत्री सैदोव बख्तियार हैदराबाद हाउस में भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर से द्विपक्षीय बैठक करेंगे। 4 अगस्त को उनका दिल्ली में विभिन्न कार्यक्रमों में भाग लेने का कार्यक्रम निर्धारित है। यात्रा के अंतिम दिन, 5 अगस्त को दोपहर 1:45 बजे वह नई दिल्ली से प्रस्थान करेंगे।
20 जुलाई को विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने ओडिलोविच से फोन पर बात की थी और दोनों देशों के बीच संबंधों को और मजबूत करने पर चर्चा की थी। जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “आज उज्बेकिस्तान के सैदोव बख्तियार से अच्छी बातचीत हुई। हमने व्यापार, निवेश और अन्य क्षेत्रों सहित अपने द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने पर चर्चा की।”
ओडिलोविच ने बताया कि उनकी जयशंकर के साथ सार्थक फोन पर बातचीत हुई और दोनों ने नियमित संवाद जारी रखने पर सहमति जताई।
उन्होंने कहा कि उज्बेकिस्तान और भारत के बीच रणनीतिक साझेदारी पर आधारित संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं और सहयोग के सभी क्षेत्रों में अच्छी प्रगति हो रही है।
उन्होंने आगे कहा कि दोनों पक्षों ने सबसे ऊंचे लेवल पर आने वाले बाइलेटरल एंगेजमेंट के शेड्यूल के साथ-साथ इंटरनेशनल ऑर्गनाइजेशन के अंदर सहयोग को और मजबूत करने पर भी विचार शेयर किए। दोनों देशों ने अपने विदेश मंत्रालयों के बीच करीबी, भरोसेमंद और नियमित संवाद जारी रखने पर सहमति बनाई है।
मई में भारत और उज्बेकिस्तान के बीच नई दिल्ली में विदेश कार्यालय परामर्श का 17वां दौर आयोजित किया गया था। इसमें व्यापार और निवेश, पर्यटन, प्रौद्योगिकी, नवाचार, ऊर्जा, शिक्षा और अन्य क्षेत्रों में सहयोग को लेकर चर्चा हुई थी। दोनों देशों के अधिकारियों ने आपसी हितों से जुड़े क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया था।

