Saturday, August 1, 2026
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अंकित शर्मा हत्याकांड का मास्टरमाइंड था ताहिर हुसैन, उम्रकैद को मौत की सजा में करवाएंगे तब्दील : भाजपा

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नई दिल्ली, 31 जुलाई (आईएएनएस)। दिल्ली दंगों के दौरान इंटेलिजेंस ब्यूरो अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में कड़कड़डूमा कोर्ट ने छह साल बाद सजा का ऐलान कर दिया है। कोर्ट ने आम आदमी पार्टी के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन को मुख्य दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है और पांच लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया है। इस केस में ताहिर हुसैन के चार अन्य साथियों को भी उम्रकैद और 20-20 हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई गई है।

जॉइंट कमिश्नर ऑफ पुलिस सुरेंद्र कुमार ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा, “2020 में नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली में हुए दंगों के दौरान आईबी अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या ताहिर हुसैन के घर के सामने कर दी गई थी और उनकी लाश को नाले में फेंकने की कोशिश की गई थी। इस लंबी कानूनी प्रक्रिया में 13 जुलाई को कोर्ट ने पहले ताहिर हुसैन और उसके चार साथियों को दोषी करार दिया था। अब कोर्ट ने सजा सुनाकर इस प्रक्रिया को पूरा किया।”

इस फैसले के बाद राजनीतिक बयानबाजी भी तेज है। नेताओं ने कोर्ट के फैसले का स्वागत किया है और न्याय की जीत बताया है। भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने कहा, “आज के फैसले ने न्याय में हमारा भरोसा और मजबूत किया है। जिस व्यक्ति को मैं दिल्ली दंगों का मास्टरमाइंड मानता हूं, जो उस समय आम आदमी पार्टी का पार्षद था, उसे और उसके साथियों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। हम इस फैसले का स्वागत करते हैं। न्याय की जीत हुई है।”

उन्होंने आगे कहा, “यह ट्रायल कोर्ट का सिर्फ पहला फैसला है। जिस बेरहमी और साजिश के तहत यह अपराध किया गया और नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली में हिंसा फैलाई गई, उसे देखते हुए मुझे लगता है कि अभी आगे भी कानूनी कार्रवाई की गुंजाइश है। जो लोग जिम्मेदार थे, उन्होंने ही दंगे भड़काए थे और इसमें आम आदमी पार्टी के नेताओं की बड़ी भूमिका थी। मुझे उम्मीद है कि आखिरकार इस सजा को मौत की सजा में बदल दिया जाएगा। फिलहाल सभी दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है और न्याय की प्रक्रिया शुरू हो गई है।”

दिल्ली सरकार के मंत्री कपिल मिश्रा ने भी फैसले को न्याय की शुरुआत बताया। उन्होंने कहा, “आज का अदालती फैसला न्याय की शुरुआत है। दिल्ली दंगों के दौरान, शाहीन बाग की आड़ में हिंदुओं के नरसंहार की साजिश के तहत हर तरफ से सड़कें जाम कर दी गई थीं। उस साजिश में ताहिर हुसैन की अहम भूमिका थी। आरोप है कि उसने बम और पत्थर जमा किए, गुलेलें बनाईं और सैकड़ों दंगाइयों को अपनी छत पर इकट्ठा होने दिया। आईबी के बेगुनाह अफसर अंकित शर्मा को ताहिर हुसैन के घर ले जाया गया, कई बार चाकू मारा गया और मौत के बाद भी उन्हें चाकू मारा गया। हम उम्रकैद को मौत की सजा में बदलने की अपील करेंगे।”

मंत्री आशीष सूद ने कहा, “आज उन लोगों के लिए शर्म का दिन है, जो खुद को स्वतंत्र यूट्यूबर कहते हैं और जो खुद को दिल्ली का मालिक कहते थे यानी अरविंद केजरीवाल और संजय सिंह, जो दिल्ली की जनता के वोटों से राज्यसभा पहुंचे। इन लोगों ने एक बेगुनाह नौजवान की हत्या को छिपाने की कोशिश की। उन्होंने वोट बैंक की राजनीति के लिए ऐसा करने की कोशिश की। उन्होंने ताहिर हुसैन को दंगों के लिए तैयार किया। मैंने सुना है कि आम आदमी पार्टी ताहिर हुसैन का सारा खर्च उठा रही थी।”

मौलाना साजिद रशीदी ने कहा, “2020 में हुए दंगे दुर्भाग्यपूर्ण थे। वहां मौजूद लोगों का कहना है कि बाहरी लोग बड़ी संख्या में मौजूद थे। इसके अलावा, 4-5 मस्जिदें जलाई गईं और मुसलमानों की सैकड़ों दुकानों को भी नुकसान पहुंचाया गया। ताहिर हुसैन एक अच्छे इंसान हैं। जिस दिन यह घटना हुई, उस दिन रात करीब 8 या 8:15 बजे उन्होंने मुझे फोन किया और कहा, ‘मैं चारों तरफ से घिरा हुआ हूं और पुलिस मुझे बचा नहीं रही है।'”

समाजवादी पार्टी के विधायक रविदास मेहरोत्रा ने कहा, “दंगों के सिलसिले में कोर्ट में एक मामला दर्ज किया गया था। कोर्ट ने अब अपना फैसला सुना दिया है और हम इस फैसले का स्वागत करते हैं। हमने मांग की थी कि दिल्ली दंगों की जांच हाई कोर्ट के जज से कराई जाए, लेकिन उस समय की भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने ऐसी जांच का आदेश नहीं दिया।”