Saturday, August 1, 2026
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आरबीआई की एमपीसी बैठक में रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं होने की संभावना, पहली तिमाही में जीडीपी वृद्धि 7 प्रतिशत से ऊपर रहने की उम्मीद: रिपोर्ट

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नई दिल्ली, 1 अगस्त (आईएएनएस)। एसबीआई रिसर्च की शनिवार को जारी रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की अगस्त 2026 की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक में रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं होने की संभावना है। रिपोर्ट के मुताबिक, अगले दो तिमाहियों तक खुदरा महंगाई (सीपीआई) 5 प्रतिशत से ऊपर रहने की उम्मीद है, जबकि वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (क्यू1) में देश की आर्थिक वृद्धि 7 प्रतिशत से अधिक रह सकती है। ऐसे में आरबीआई के लिए फिलहाल ब्याज दरों को स्थिर रखना अधिक उपयुक्त होगा।

रिपोर्ट के अनुसार, जुलाई के दौरान 35 अरब डॉलर की पूंजी आमद (कैपिटल इनफ्लो) हुई, जिससे 24 जुलाई तक भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 12.5 अरब डॉलर बढ़ गया। साथ ही, जून के अंत तक तीन महीने तक की अवधि वाले फॉरवर्ड पोजीशन में 13 अरब डॉलर की कमी आई, जिससे विदेशी मुद्रा बाजार में दबाव कम हुआ।

एसबीआई रिसर्च का मानना है कि इन परिस्थितियों को देखते हुए आरबीआई की एमपीसी ब्याज दरों पर यथास्थिति बनाए रख सकती है। हालांकि, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, रुपये पर दबाव और वैश्विक पूंजी प्रवाह को लेकर अनिश्चितता के कारण केंद्रीय बैंक की ओर से अत्यधिक नरमरुख अपनाने की संभावना कम है।

आरबीआई की अगली मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक 3 से 5 अगस्त के बीच होगी, जबकि 5 अगस्त को नीतिगत फैसलों की घोषणा की जाएगी।

रिपोर्ट में कहा गया है कि पश्चिम एशिया संकट के कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था अब भी अनिश्चितता के दौर से गुजर रही है और विभिन्न देशों में आर्थिक रुझान अलग-अलग दिखाई दे रहे हैं। इस बीच, अमेरिकी अर्थव्यवस्था में भी अप्रैल-जून 2026 तिमाही के दौरान अपेक्षा से अधिक सुस्ती दर्ज की गई।

एसबीआई रिसर्च ने बताया कि पिछली तीन मौद्रिक नीतियों में आरबीआई ने पश्चिम एशिया युद्ध के प्रभाव को देखते हुए वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही के जीडीपी वृद्धि अनुमान को 6.9 प्रतिशत से घटाकर 6.6 प्रतिशत कर दिया था। लेकिन अब हालात में सुधार हुआ है और पहली तिमाही की वास्तविक वृद्धि दर पहले के अनुमान से काफी बेहतर, यानी 7 प्रतिशत से अधिक रह सकती है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि वैश्विक मुद्रा बाजार में अब भी असंतुलन बना हुआ है और मार्च के दौरान इसका सबसे अधिक असर भारतीय रुपये पर पड़ा। हालांकि, आरबीआई ने फॉरवर्ड बाजार में अपनी रणनीति के जरिए अल्पकालिक दबाव को कम करने का प्रयास किया, जिससे निर्यातकों और आयातकों की हेजिंग गतिविधियों के कारण रुपये पर पड़ने वाले दबाव को नियंत्रित करने में मदद मिली।

मानसून को लेकर रिपोर्ट में कहा गया है कि जुलाई में सामान्य से अधिक बारिश होने के कारण देशभर में वर्षा की कमी घटकर 13 प्रतिशत रह गई है। जलाशयों का जलस्तर लगभग सामान्य है और खरीफ फसलों की बुवाई पिछले वर्ष की तुलना में केवल 4.7 प्रतिशत कम है। इससे ग्रामीण मांग को समर्थन मिलने की उम्मीद है।

एसबीआई रिसर्च ने अपनी रिपोर्ट में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) को लेकर भी चिंता जताई है। रिपोर्ट के अनुसार, हर बड़ी तकनीकी क्रांति की तरह एआई क्षेत्र में भी भारी निवेश, तेजी से बढ़ती उम्मीदें और सट्टा गतिविधियां देखने को मिल रही हैं। ऐसे में यह संभव है कि कई कंपनियां वर्तमान समय में एआई इंफ्रास्ट्रक्चर पर जरूरत से ज्यादा निवेश कर रही हों, जिससे भविष्य में एआई बबल बनने का जोखिम पैदा हो सकता है।