Saturday, August 1, 2026
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बांग्लादेश: जमात-ए-इस्लामी और इस्लामी छात्र संगठन शिबिर ‘आतंकी और उग्रवादी’ संगठन घोषित

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ढाका, 1 अगस्त (आईएएनएस)। बांग्लादेश में तारिक रहमान के आने के बाद से देश के युवा कई बार सड़कों पर उतर चुके हैं। देशभर में छात्रों के बढ़ते विरोध प्रदर्शनों के बीच सरकार ने जमात-ए-इस्लामी और उसकी स्टूडेंट विंग, इस्लामी छात्र शिबिर की राजनीतिक गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाने का ऐलान किया है। तारिक रहमान के नेतृत्व वाली सरकार ने 1 अगस्त, 2024 को इस संबंध में एक नोटिफिकेशन जारी किया।

बांग्लादेश ने बीते गुरुवार को जमात-ए-इस्लामी पार्टी, उसकी स्टूडेंट विंग और दूसरी सहयोगी संस्थाओं पर ‘उग्रवादी और आतंकवादी’ संगठन के तौर पर प्रतिबंध लगा दिया। यह प्रतिबंध कई हफ्तों तक चले हिंसक विरोध प्रदर्शनों के बाद देशभर में की गई कार्रवाई का हिस्सा है। बांग्लादेश में हफ्तों तक चले हिंसक विरोध प्रदर्शन में 200 से ज्यादा लोग मारे गए और हजारों लोग घायल हो गए।

बांग्लादेशी मीडिया द डेली स्टार के अनुसार, 16 जुलाई से 21 जुलाई तक देश में फैली हिंसा की वजह से हुई मौतों और नुकसान की जांच के लिए हाई कोर्ट के तीन जजों का एक कमीशन बनाया गया।

इससे पहले, नाहिद इस्लाम और छात्र आंदोलन के दूसरे कोऑर्डिनेटर रिहा कर दिए गए। इन्हें डिटेक्टिव ब्रांच (डीबी) ऑफिस में रखा गया था। इस बीच, एंटी-डिस्क्रिमिनेशन स्टूडेंट मूवमेंट ने घोषणा की कि वह 2 अगस्त को प्रार्थना सभा के आयोजन के साथ और स्टूडेंट्स और आम लोगों का एक बड़ा मार्च निकालेगा।

बांग्लादेश में अप्रैल से जून 2026 के बीच भीड़ की हिंसा और राजनीतिक संघर्षों में कुल 74 लोगों की मौत हुई। ढाका स्थित मानवाधिकार संगठन अधिकार की तिमाही रिपोर्ट के अनुसार, इस दौरान 33 लोगों की मौत भीड़ के हमलों में हुई जबकि राजनीतिक हिंसा में 41 लोगों की जान गई और 970 लोग घायल हुए।

रिपोर्ट के मुताबिक, भीड़ द्वारा मारे गए अधिकांश लोगों पर चोरी या डकैती का संदेह था। कुछ लोगों की हत्या गांवों में होने वाली अनौपचारिक पंचायतों (सलिश) के दौरान या धार्मिक भावनाएं आहत करने के आरोप में की गई। संगठन ने कहा कि यह स्थिति कानून व्यवस्था और न्याय प्रणाली पर लोगों के घटते भरोसे को दर्शाती है, जिसके कारण लोग खुद कानून हाथ में ले रहे हैं।

रिपोर्ट में बताया गया कि इस अवधि में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के भीतर आपसी संघर्ष की 57 घटनाएं दर्ज हुईं जबकि नेशनल सिटिज़न पार्टी (एनसीपी) में दो घटनाएं सामने आईं। बीएनपी की अंदरूनी गुटबाजी में चार लोगों की मौत हुई और 400 लोग घायल हुए जबकि एनसीपी के आंतरिक संघर्ष में 16 लोग घायल हुए।

रिपोर्ट के अनुसार, बीएनपी के भीतर विवाद जबरन वसूली, क्षेत्रीय वर्चस्व, खुदाई की मिट्टी की बिक्री, स्थानीय चुनाव टिकट, पार्टी सम्मेलन और राजनीतिक कार्यक्रमों को लेकर थे। कई घटनाओं में बंदूकों-बमों और अन्य घातक हथियारों का इस्तेमाल भी किया गया।

मानवाधिकार संगठन ने आरोप लगाया कि बीएनपी के कुछ नेताओं और कार्यकर्ताओं पर जबरन वसूली, जमीन कब्जाने, अपहरण, दुष्कर्म, शैक्षणिक संस्थानों और सरकारी कार्यालयों पर हमले, पुलिस के काम में बाधा डालने और राजनीतिक विरोधियों पर हमले जैसे गंभीर आरोप लगे हैं।