कोलकाता, 2 अगस्त (आईएएनएस)। बांग्लादेश से निर्वासित लेखिका तसलीम नसरीन के हालिया बयान और पश्चिम बंगाल दौरे के बाद देश की राजनीति में नई बहस छिड़ गई है। उनके बयान पर भाजपा, कांग्रेस और मुस्लिम संगठनों ने अलग-अलग प्रतिक्रिया दी है।
पश्चिम बंगाल भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सामिक भट्टाचार्य ने पत्रकरों से बातचीत करते हुए कहा, “तसलीमा नसरीन ने जो कहा है, उस पर भाजपा को हर बात और हर बार टिप्पणी नहीं करनी चाहिए। बांग्लादेश एक अलग देश है, और तसलीम नसरीन कभी बांग्लादेश की नागरिक थीं। मुझे उनकी मौजूदा नागरिकता की स्थिति के बारे में कोई जानकारी नहीं है।”
साथ ही सामिक भट्टाचार्य ने सीपीआईएम पर निशाना साधते हुए कहा, “अगर सीपीआईएम ने बुद्धदेव भट्टाचार्य की बातों पर अमल किया होता तो पश्चिम बंगाल में आज जो हालात हैं, जहां लश्कर-ए-तैयबा और आईएसआई के सक्रिय होने का आरोप है, वे हालात पैदा नहीं होते।”
टीएमसी के पूर्व प्रवक्ता रिजु दत्ता ने कहा, “विपक्षी पार्टियां अक्सर आरोप लगाती हैं कि भाजपा धर्मनिरपेक्ष नहीं है, इस्लाम विरोधी है और दूसरे धर्मों का सम्मान नहीं करती है। हालांकि, पश्चिम बंगाल में तसलीमा नसरीन का दौरा इसके उलट बात साबित करता है।”
कांग्रेस सांसद तारिक अनवर ने कहा, “यह उनका निजी बयान और राय है। चाहे मदरसा हो, स्कूल हो, संस्कृत विद्यालय हो या कोई अन्य संस्थान, ऐसे संस्थानों को चलाने वाले बच्चों को शिक्षा देने की कोशिश करते हैं।”
कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद ने कहा, “हमारे अपने देश में कई मुद्दे हैं। बेहतर होगा कि हम पहले उन पर चर्चा करें और उन्हें सुलझाने पर ध्यान दें।”
ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन के अध्यक्ष मौलाना साजिद रशीदी ने इस्लाम पर तसलीमा नसरीन की विवादित टिप्पणियों की आलोचना की और सरकार से उन्हें भारत में रहने की अनुमति न देने का आग्रह किया।
रशीदी ने कहा, “तसलीमा नसरीन एक ऐसी लेखिका हैं, जो हमेशा विवादों में रही हैं। पैगंबर मोहम्मद और धर्म से जुड़ी अन्य बातों पर अपनी टिप्पणियों के कारण उन्हें देश से बाहर रहना पड़ा है, लेकिन अगर वह कहती हैं कि यूनुस सरकार नाकाम रही, तो वह बांग्लादेश क्यों नहीं जातीं? उन्हें वहां जाकर बदलाव लाने की कोशिश करनी चाहिए। वह तो अब तक खुद में भी सुधार नहीं कर पाई हैं।”

