मुंबई, 4 अगस्त (आईएएनएस)। महाराष्ट्र के जाने-माने शिक्षाविद, समाजसेवी और पूर्व राज्यपाल पद्मश्री डॉ. डीवाई पाटिल का मंगलवार को कोल्हापुर में निधन हो गया। महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे ने शोक जताते हुए ‘एक्स’ पोस्ट के जरिए कहा कि डॉ. पाटिल के निधन से महाराष्ट्र ने एक दूरदर्शी नेता, महान शिक्षाविद और उदार मार्गदर्शक खो दिया है। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति दे और पाटिल परिवार को इस दुख को सहने की शक्ति दे।
एकनाथ शिंदे ने कहा कि डॉ. डीवाई पाटिल सिर्फ संस्थान बनाने तक सीमित नहीं रहे। उन्होंने ‘शैक्षणिक उत्कृष्टता’ और ‘संपूर्ण शिक्षा’ के सिद्धांतों पर जोर देकर देश की उच्च शिक्षा को एक नई दिशा दी। डीवाई पाटिल यूनिवर्सिटी में इंजीनियरिंग, मेडिकल, मैनेजमेंट, फार्मेसी, लॉ और आर्किटेक्चर समेत 16 से ज्यादा विषयों में 146 से अधिक कोर्स पढ़ाए जाते हैं। देश में सात स्वतंत्र यूनिवर्सिटी स्थापित करने का ऐतिहासिक रिकॉर्ड भी उनके नाम है। कोल्हापुर, पुणे और नवी मुंबई में उनके द्वारा बनाए गए अस्पताल लाखों मरीजों के लिए वरदान साबित हुए। यहां हर वर्ग के लोगों को बेहतर इलाज मिला। खेल के क्षेत्र में भी उन्होंने अपनी छाप छोड़ी। नवी मुंबई में उन्होंने अत्याधुनिक ‘डीवाई पाटिल स्टेडियम’ बनवाया जिसे दुनिया का 6वां सबसे बेहतरीन स्टेडियम माना जाता है। इस स्टेडियम ने भारत में खेलों के लिए नए मानक तय किए। शिक्षा के अलावा डॉ. पाटिल ने प्रशासनिक क्षेत्र में भी काम किया। वह बिहार, त्रिपुरा और पश्चिम बंगाल के राज्यपाल रहे। तीनों राज्यों में उन्होंने राज्यपाल पद की गरिमा को और ऊंचा किया।
डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे ने ‘एक्स’ पर पोस्ट कर कहा कि संस्थान बनाना आसान होता है लेकिन उसे अनुशासन, समर्पण और सामाजिक जिम्मेदारी के साथ चलाना बहुत बड़ी चुनौती है। डॉ. डीवाई पाटिल ने यह काम सहजता से किया।
वहीं, एनसीपी एसपी सांसद सुप्रिया सुले ने ‘एक्स’ पोस्ट में लिखा, “बिहार, त्रिपुरा और पश्चिम बंगाल के पूर्व राज्यपाल और शिक्षा के क्षेत्र में अहम योगदान देने वाले डॉ. डीवाई पाटिल के निधन की खबर बेहद दुखद है। डॉ. पाटिल ने कोल्हापुर, नवी मुंबई, पुणे और अन्य जगहों पर स्कूल, इंजीनियरिंग, मेडिकल और मैनेजमेंट कॉलेजों का एक नेटवर्क स्थापित किया। लाखों युवाओं के लिए अच्छी शिक्षा के रास्ते खोलकर उन्होंने उनका भविष्य संवारा। इसके अलावा, एक विधायक और मंत्री के तौर पर उन्होंने लंबे समय तक पूरी निष्ठा से लोगों की सेवा की। सामाजिक जिम्मेदारी निभाते हुए उन्होंने प्रशासन में अपने काम की एक अलग छाप छोड़ी। शिक्षा और समाज के क्षेत्र में डॉ. डीवाई पाटिल साहब के योगदान को आने वाली पीढ़ियां हमेशा याद रखेंगी। उनकी दूरदर्शिता के कारण लाखों परिवारों का जीवन बेहतर हुआ है। इस मुश्किल घड़ी में, मेरी संवेदनाएं उनके परिवार के सदस्यों के साथ हैं। उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि।”

