Tuesday, August 4, 2026
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उपचुनाव में जनता ने भारतीय जनता पार्टी का तोड़ दिया भ्रमः सुखदेव भगत

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नई दिल्ली, 4 अगस्त (आईएएनएस)। कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत ने उपचुनाव के नतीजों, झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) विवाद और अहम राजनीतिक मुद्दों पर टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि दतिया और बांकीपुर उपचुनाव में जनता ने भाजपा सरकार के भ्रम को तोड़ दिया।

बिहार के बांकीपुर उपचुनाव में भाजपा की हार पर कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत ने आईएएनएस से बातचीत में कहा, “भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के गढ़ में भाजपा का हारना यह साबित करता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कार्यशैली को लेकर जो भ्रम फैला रखा है, वह टूट चुका है। हर जगह लोगों में आक्रोश और निराशा है। इसी का परिणाम है बांकीपुर और दतिया में भाजपा को हार मिली है।”

पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह के बरी होने पर कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत ने कहा, “अदालत अपने सामने मौजूद सबूतों के आधार पर फैसला सुनाती है। हालांकि, कई बार सत्ता में बैठे लोग अपने फायदे के लिए सबूतों में हेर-फेर करते हैं। हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट जैसे उच्च न्यायिक मंच भी मौजूद हैं। आखिरकार, मुझे पूरा भरोसा है कि सच की ही जीत होगी।”

झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) विवाद पर भाजपा द्वारा सवाल उठाए जाने पर कांग्रेस सांसद ने कहा, “भाजपा को असलियत पता नहीं है और वे बिना किसी आधार के आरोप लगाते रहते हैं। मैंने निशिकांत दुबे को कांग्रेस पर पक्षपाती होने का आरोप लगाते हुए देखा। सबसे जरूरी बात यह है कि कोई पेपर लीक नहीं हुआ था। ओएमआर शीट में कुछ गलतियां थीं, जिसके बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने तुरंत कार्रवाई की। जैसे ही यह मामला सामने आया, चेयरमैन ने इस्तीफा दे दिया और 11 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इसके साथ ही सीआईडी जांच कर रही है। हालांकि मेरा मानना है कि इस मामले में सरकार को संवेदनशीलता दिखानी चाहिए। मुख्यमंत्री को युवाओं से संवाद करना चाहिए। प्रदर्शन कर रहे युवाओं से बातचीत कर समाधान निकालना चाहिए।”

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत द्वारा 6 अगस्त को ‘जेन जी’ से बात करने को लेकर कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत ने कहा, “यह अच्छी बात है। बातचीत जरूरी है और यह हमेशा होनी चाहिए। लोकतंत्र में बातचीत का बहुत महत्व है। हालांकि, ऐसी बातचीत खुली होनी चाहिए और इसमें दूसरों पर अपने विचार थोपने की कोशिश नहीं होनी चाहिए। स्वामी विवेकानंद ने कहा था कि नए विचारों को अपनाना चाहिए लेकिन मोहन भागवत ने अतीत में ‘जेन जी’ के बारे में, खासकर संस्कृति के नाम पर, जिस तरह की बातें कही हैं, उन्हें देखते हुए मुझे नहीं लगता कि यह बातचीत बहुत फायदेमंद साबित होगी।”